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मेट्रो का किराया नहीं बढ़ाना है तो दिल्ली सरकार DMRC को दे 3000 करोड़ रु: शहरी विकास मंत्री

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 7 , 2017 , 18:38 IST | नई दिल्ली

दिल्ली मेट्रो किराया बढ़ाए जाने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली की केजरीवाल सरकार आमने-सामने है। केंद्र ने साफ कर दिया है कि प्रस्तावित मेट्रो किराये में कमी नहीं की जाएगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मेट्रो रेल के किराये में प्रस्तावित इजाफे को कानून सम्मत बताया है।

उन्होंने कहा, 'किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) किराया कमी के लिए विचार कर सकती है, अगर दिल्ली सरकार हर साल 3,000 करोड़ रुपये से अधिक दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को देने के लिए राजी हो।'

केंद्र ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से कहा कि मेट्रो एक्ट के मुताबिक प्रस्तावित मेट्रो किराया को स्थगित नहीं किया जा सकता है।

मौजूदा किराया निर्धारण समिति द्वारा किराए में प्रस्तावित बढ़ोतरी को 10 अक्टूबर से लागू करने के डीएमआरसी के फैसले का दिल्ली सरकार लगातार विरोध कर रही है। इस बाबत केजरीवाल ने पुरी को हाल ही में पत्र लिख कर छह महीने में दो बार किराया बढ़ोतरी को जनता के साथ अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी बताते हुए इसे रोकने की मांग की थी।

अब हरदीप पुरी ने केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा है कि दिल्ली मेट्रो अधिनियम प्रस्तावित किराया बढ़ोतरी को रोकने की इजाजत नहीं देता है। उन्होंने कहा कि फिर भी यदि केजरीवाल किराया वृद्धि को रोकना चाहते हैं तो नई किराया निर्धारण समिति का गठन किया जा सकता है, बशर्ते दिल्ली सरकार दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को मेट्रो परिचालन में हर साल होने वाले 3000 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई कर दे।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पुरी ने केजरीवाल के सुझावों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर उन्हें मौजूदा परिस्थतियों में किराये बढ़ोतरी को रोकना नामुमकिन बताते हुये उनकी मांग को स्वीकार करने के एवज में किये जा सकने वाले उपाय भी सुझाये हैं. पुरी ने कहा कि मेट्रो रेल (परिचालन एवं रखरखाव) अधिनियम 2002 के तहत गठित समिति की सिफारिशें मेट्रो प्रबंधन पर बाध्यकारी होती हैं। इतना ही नहीं इस कानून के तहत केंद्र या राज्य सरकार और डीएमआरसी के निदेशक मंडल के पास भी समिति की सिफारिशों में बदलाव करने का कानूनी अधिकार नहीं है।


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