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दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल-1 की क्षमता होगी डबल,4 करोड़ यात्री करेंगे इस्तेमाल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 7 , 2017 , 17:54 IST | नई दिल्ली

इंदिरा गांधी इंटरनेशल एयरपोर्ट पर अक्टूबर से डोमेस्टिक फ्लाइट्स के ऑपरेशन टी-2 पर शुरू होंगे। टर्मिनल-1 से करीब 80 लाख यात्री टर्मिनल-2 पर शिफ्ट होंगे। अभी तक टर्मिनल 2 से सिर्फ हज यात्रियों के लिए ही फ्लाइट जाती थी। 2018 में टी-1 के रेनोवेशन का काम शुरू होना है। पिछले साल टी-1 के 1डी और 1सी, दोनों सब टर्मिनल मिलाकर ढाई करोड़ पैसेंजर्स ने इनका इस्तेमाल किया, जबकि क्षमता 2 करोड़ पैसेंजर्स की है। इसे बढ़ाने के लिए दोनों सब टर्मिनल को मिलाकर एक किया जाएगा।

काम को 2021 तक पूरा करने का है टारगेट -

- ओल्डभवन को तोड़कर इसको टी-1 में मिलाया जायेगा। यह काम 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

- रेनोवेशन के बाद  टी-1 की क्षमता सालाना 4 करोड़ पैसेंजर की हो जाएगी। आगे चलकर आने वाले पैसेंजर्स का आज के मुकाबले दो तिहाई वक्त बचेगा। इस प्लानिंग पर एयरपोर्ट ऑपरेटर डायल काम कर रहा है।

- सभी टर्मिनल्स को मिलाकर आईजीआई  की छमता 7 करोड़ पैसेंजर्स की है। अपग्रेडेशन के बाद इसकी छमता 11.9 करोड़ पैसेंजर्स की हो जाएगी।

रेनोवेशन तीन साल तक चलेगा लेकिन  टर्मिनल पूरी तरह बंद नहीं होगा। रेनोवेशन के बाद टी-3 जैसी होगी सुविधाएँ-

1. एंट्री गेट

अभी: आठ गेट है और टिकट चेक करने के लिए 16 सिक्युरिटी प्वाइंट हैं। पीक आवर में एक पैसेंजर को 8 मिनट लगते हैं।

नए में: 13 गेट पर 26 सीआईएसएफ अधिकारी टिकट की जांच करेंगे।

फायदा: गेट से जांच पूरी कर निकलने मेंं 2-3 मिनट लगेंगे।

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2. चेक-इन

अभी: बैगेज चेक इन के लिए यहां 4 आईलैंड सिस्टम हैं। पीक आवर में यात्री को 20 से 25 मिनट लग जाते हैं।

नए में :आईलैंड सिस्टम तो 5 ही होंगे लेकिन 35 सेल्फ चेक-इन कियोस्क लगाए जाएंंगे।

फायदा: सेल्फ चेक-इन सिस्टम लगने से यात्री को महज 2-3 मिनट लगेंगे।

3. सिक्युरिटी चेक

अभी: जांच के लिए अभी 27 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और 18 एक्सरे मशीनें हैं। सिक्युरिटी क्लियरेंस में 10-15 मिनट लगते हैं।

नए में: आटोमैट्रिक ट्रे रिट्रीवल होगा। 22 एक्सरे मशीनें और 32 डिटेक्टर भी होंगे।

फायदा: पीक आवर में 2 से 3 मिनट में जांच पूरी हो जाएगी।

4. एयरोब्रिज,बैगेज बेल्ट

अभी: सिर्फ 15 बस गेट हैं।

नए में: 22 एयरोब्रिज होंगे और 13 बस गेट भी। 10 बैगेज बेल्ट होंगी। साथ ही उनकी लंबाई 18 मी. बढ़ाकर 70 मीटर की जाएगी।

फायदा: बस गेट से फ्लाइट क्लियर करने में 35 मिनट लगते हैं। एयरोब्रिज से 10-15 मिनट में हो जाएगा।

टी 2 को रेनोवेट कर टी 3 जैसा बनाया, यहां अक्टूबर से शुरू होगी फ्लाइट-

- 31 साल पुराने टी-2 को रेनोवेट कर टी-3 जैसा बनाया गया है।

- टी-2 का ऑपरेशन 1986 में शुरू हुआ था। जुलाई 2010 तक यहां से इंटरनेशनल फ्लाइट्स जाती थीं, जो टी-3 पर ट्रांसफर कर दी गईं।

- उसके बाद से टी-2 का इस्तेमाल हज टर्मिनल के तौर पर ही हो रहा है।

अक्टूबर से डोमेस्टिक फ्लाइट्स के ऑपरेशन टी-2 पर शुरू होंगे। इंडिगो, स्पाइसजेट और गो-एयर से उन फ्लाइट्स की जानकारी मांगी गई है, जिन्हें टी-2 पर शिफ्ट किया जाना है। आपको बता दे कि टी 2 और टी 3 के बीच पाथवे भी होंगे 74 चेकइन काउंटर, 9 सिक्योरिटी चैनल, 6 एयरोब्रिज, 6 बैगेज बेल्ट, 4 गेट आने और 2 निकलने के लिए। टी-2 और टी-3 आसपास हैं। इनके बीच आने-जाने के लिए पाथवे होगा।


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