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पिता लगाते हैं फेरी, झुग्गी में बीता बचपन, 16 बार हुआ फ्रैक्चर लेकिन IAS बन कर ही मानीं उम्मुल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 3 , 2017 , 22:09 IST | नई दिल्ली

कहते हैं अपनी कमजोरी को अगर आप अपनी ताकत बना लें तो आसमां भी आपके कदमों में होगा। ऐसा हुआ भी है। और ये कर दिखाया है एक दिव्यांग लड़की उम्मुल खेर ने। उम्मुल के पिता फेरी लगाते थे। मां दूसरों के घरों में काम करती थी। खुद उम्मुल बच्चों को पढ़ाकर खुद की पढ़ाई का पैसा इकट्ठा करती थी। उम्मुल के सामने सिर्फ गरीबी ही एक समस्या नहीं थी, उम्मुल को अजैले बोन डिसऑर्डर बीमारी के साथ पैदा हुई थी, एक ऐसा बॉन डिसऑर्डर जो बच्‍चे की हड्डियां कमज़ोर कर देता है। हड्डियां कमज़ोर हो जाने की वजह से जब बच्चा गिर जाता है तो फ्रैक्चर होने की ज्यादा संभावना रहती है। इस वजह से 28 साल की उम्र में उम्मुल को 15 से भी ज्यादा बार फ्रैक्चर का सामना करना पड़ा है। लेकिन उम्मुल ने कभी हार नहीं मानी, उम्मुल ने सभी समस्याओं से लड़ते हुए देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर ली है।

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उम्मुल का जन्म राजस्थान में हुआ लेकिन शुरू से ही उम्मुक दिल्ली में रहीं। पहले निजामुद्दीन के पास झुग्गियों में बचपन बीता। जब झुग्गियां टूट गई तो परिवार त्रिलोकपुरी आ गया। घर की आर्थिक तंगी की वजह से उसके घर वाले नहीं चाहते थे कि वो आगे पढ़े, लेकिन उम्मुल कुछ करना चाहती थी। उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उम्मुल जब 9वीं में तभी उसने अपने घर वालों से अलग रहने का फैसला कर लिया। उसके बाद से लगातार उम्मुल ने खुद की मेहनत से अपनी पढ़ाई का खर्चा उठाया।

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पांचवीं क्लास तक दिल्ली के आईटीओ में विकलांग बच्चों की स्कूल में पढ़ाई की। फिर आठवीं तक कड़कड़डूमा के अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट में पढाई की. यहां मुक्त में पढ़ाई होती थी। आठवीं क्लास में उम्मुल स्कूल की टॉपर थी फिर स्‍कॉलरशिप के जरिये दाख़िला एक प्राइवेट स्कूल में हुआ। यहां उम्मुल ने 12वीं तक पढ़ाई की। दसवीं में उम्मुल के 91 प्रतिशत मार्क्‍स थे। 12वीं क्लास में उम्मुल के 90 प्रतिशत मार्क्‍स थे। तब भी उम्मुल अकेले रहती थी, ट्यूशन पढ़ाती थी। 12वीं के बाद उम्मुल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के गार्गी कॉलेज में साइकोलॉजी से ग्रेजुएशन किया।

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उम्मुल का जेएनयू में मास्टर ऑफ़ आर्ट्स के लिए एडमिशन हुआ। उम्मुल ने साइकोलॉजी की जगह इंटरनेशनल रिलेशंस चुना। जेएनयू में उम्मुल को हॉस्टल मिल गया। जेएनयू के हॉस्टल का कम चार्ज था अब उम्मुल को ज्यादा ट्यूशन पढ़ाने की जरुरत नहीं पड़ी। फिर उम्मुल ने जेएनयू से ही एमफील की पढाई पूरी की। जनवरी 2016 में उम्मुल ने आईएएस के लिए तैयारी शुरू की और अपने पहले प्रयास में सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर। उम्मुल ने 420वीं रैंक हासिल की है।


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