नेशनल

IT विभाग बेहिसाब संपत्ति वाले 7 लोकसभा सांसद और 98 विधायकों की करेगा जांच

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
164
| सितंबर 11 , 2017 , 20:45 IST | नई दिल्ली

मोदी सरकार देश में काले धन को लेकर सतर्क हो गई है। काले धन पर रोक लगाने के अब आयकर विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आयकर विभाग  के निशाने पर अब 7 लोकसभा सांसद और राज्य के 98 विधायक है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके बताया है कि दो चुनावों के बीच इन जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में 'बेतहाशा बढ़ोतरी' हुई है।आपको बता दे कि  नेताओं की काली कमाई पर रोक लगाने के लिए लखनऊ के एक एनजीओ 'लोक प्रहरी' ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

लोक प्रहरी ने याचिका के जरिये आरोप लगाया कि 26 लोकसभा सांसदों, 11 राज्यसभा सांसद और 257 विधायकों की संपत्ति दो चुनावों के बीच काफी बढ़ गयी है। आपको बता दे कि नेताओं की प्रॉपर्टी दो चुनावों के बीच 500 फीसदी तक बढ़ गई हैं और अब  सुप्रीम कोर्ट ने सीबीडीटी से इस संबंध में जवाब मांगा हैं। इस मामले में सीबीडीटी मंगलवार को आय से ज्यादा प्रॉपर्टी रखने वाले सांसदों और विधायकों के नाम सुप्रीम कोर्ट को सौंप सकता है।

सीबीडीटी ने कहा कि लोकसभा के 26 और राज्यसभा के 11 सांसदों और 257 विधायकों के पास आय से अधिक संपत्ति हैं। इस माले की जांच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने की हैं। सीबीडीटी ने कहा कि इन सभी के खिलाफ जांच होगी। 

Note-1-new_1505116838

इस मसले पर बुधवार को कोर्ट ने क्या कहा था –

जस्टिस जे. चेलमेश्वर और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा था, ''सीबीडीटी की ओर से दायर किया एफिडेविड अधूरा है। क्या भारत सरकार का यही एटीट्यूड है? अब तक आपने (सरकार) क्या किया? पहले कहा था कि हम चुनाव सुधार के खिलाफ नहीं हैं। इस बारे में सभी जानकारियां ऑन रिकॉर्ड (कोर्ट में) होनी चाहिए।''

बुधवार को कोर्ट ने 12 सितंबर तक इस मामले  में सरकार की ओर से एफिडेविट दाखिल करने का ऑर्डर दिया था। कोर्ट ने ये भी कहा था कि अगर सरकार को इस जानकारी के पब्लिक के बीच आने से खतरा है तो सरकार एफिडेविट सीलबंद लिफाफे में भी दे सकती हैं। लेकिन सरकार को ये बताना होगा कि पब्लिक होने से आखिर क्या खतरा हैं।

सरकार ने क्या जवाब दिया –

सरकार के वकील बोले  फेयर इलेक्शन देश के लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। इस बारे में कोर्ट के निर्देशों का हम स्वागत करते हैं। जल्द ही इस बारे में सभी जानकारियां कोर्ट को देंगे। यह सरकार की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छ भारत (अभियान) के अंदर आता है। ये सिर्फ कूड़े की सफाई के लिए ही नहीं है।


कमेंट करें