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कई मुग़ल बादशाह भी बड़ी शानो शौकत से मनाते थे दिवाली

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 11 , 2017 , 19:49 IST | नई दिल्ली

दिवाली हर साल बड़े हर्षो उल्लास से मनाया जाने वाला त्यौहार है। बहुत से लोग मानते है यह सिर्फ हिन्दू धर्म के भगवान श्री राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की ख़ुशी में मनाया जाता है। पर क्या आप जानते है दिवाली को अन्य धर्मों के लोग भी मानते है। यहां तक दिवाली का उल्लेख इतिहास में भी है । विश्व के कई ऐसे देश हैं जहां दीपावली मनाई जाती है। दीपावली खुशियों और प्रकाश का त्योहार है। इसे मनाने के पीछे इन धर्मों में कोई न कोई कारण है। ऐसे ही कारणों पर गौर करें तो इनका उद्देश्य एक दूसरे को खुशियां बांटना है।

1.जैन धर्म-

जैन धर्म में दिवाली का त्‍यौहार एक विशेष महत्‍व रखता है क्‍योंकि इसी दिन उनके भगवान महावीर को मोक्ष प्राप्‍त हुआ था। इसके चलते जैन धर्म में यह बेहद महत्‍वपूर्ण त्‍यौहार होता है। जैन लोग इसे महावीर निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे और 15 अक्‍टूबर 527 बीसी को पावापुरी बिहार में उन्‍होंने निर्वाण लिया था। उन्‍होंने अमावस्‍या की रात निर्वाण प्राप्‍त किया था।

2.सिख धर्म-

 

जैन धर्म की ही तरह सिख धर्म के लिए भी दिवाली का अपना महत्‍व है। यह वही दिन है जब अमृतसर में सिख धर्म के स्‍वर्ण मंदिर को 1577 में शिलान्‍यास किया गया था। इसके अलावा दिवाली पर ही सिख धर्म के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह जी 1619 मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से खुद को और अन्‍य हिन्‍दु गुरुओं को आजाद कर लाए थे। ग्‍वालियर के किले से बाहर आने के बाद गुरु और अन्‍य लोग सीधे अमृतसर स्थित स्‍वर्ण मंदिर गए थे। तब से लेकर अब तक सिख धर्म के अनुयायी इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन को मनाने के लिए पूरे स्‍वर्ण मंदिर को सजाया जाता है और सिख धर्म के लोग यहां विशेष पूजा करने के लिए आते हैं।

3.बुद्ध धर्म-

बुद्ध धर्म में वैसे तो दिवाली हिदुओं की तरह मनाई जाती है लेकिन नेपाल में बुद्ध धर्म के अनुयायी इसे कुछ अलग कारणों से भी मनाते हैं। कहा जाता है कि इसी दिन सम्राट अशोक ने सबकुछ छोड़कर शांति और अहिंसा का पथ चुना था और बुद्ध धर्म ग्रहण किया था। तब से लेकर अब तक इस दिन को अशोक विजयादशमी के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन सभी अनुयायी मंत्रों का जाप करते हैं और भगवान बुद्ध को याद करते हैं।

4.स्कन्द पुराण में ज़िक्र है -

दीपावली का उल्लेख हमारे वेद-पुराणों में भी देखने को मिलता है।7वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के नाटक में ज़िक्र दीपोत्सव का उल्लेख है और 10वीं शताब्दी में राजशेखर के काव्यमीमांसा में भी इसका ज़िक्र किया गया है।

5.शाहजहां की दिवाली -

अकबर के बाद 17वीं शताब्दी में शाहजहां ने दिवाली की शान और भी बढ़ाई। वे इस मौके पर 56 राज्यों से अलग-अलग मिठाई मंगाकर 56 थाल सजाते थे। 40 फूट के बड़े 'आकाश दीया' रोशन करने की परंपरा थी, इसे सूरजक्रांत कहा जाता था। इस दिन भव्य आतिशबाजी होती थी। इस पर्व को पूरी तरह हिंदू तौर-तरीकों से मनाया जाता था। भोज भी एकदम सात्विक होता था।

6.राजा विक्रमादित्य की कहानी-

राजा विक्रमादित्य ज्ञानवान, दयावान और बहादुर राजा थे। वह 56 ई.पू. राजा के रूप में घोषित किए गए। कहते हैं उनके राजा बनने की खुशी में राज्य के लोगों ने आनंद उत्सव मनाया। लोगों ने मिट्टी के छोटे-छोटे दीपक प्रज्वलित किए। तभी से यह परंपरा त्योहार के रूप में परिवर्तित हो गई। बहुत से इतिहासकारों ने इस बात की पुष्टि की है।

7.दयानंद सरस्वती की कहानी-

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने कार्तिक अमावस्या के दिन ही निर्वाण प्राप्त किया था। उन्‍होंने उस समय हिंदू धर्म की तमाम विसंगतियों को ठीक करने की पहल की। और इस तरह आर्य समाज की स्थापना हुई। दीपावली का त्योहार उनके निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

8.मुस्लिम बादशाहों की दिवाली-

दीपावली केवल हिन्दुओं का ही त्योहार नहीं है, बल्कि अन्य धर्मों द्वारा भी इसे मनाया जाता रहा है। 14वीं शताब्दी में मोहम्मद बिन तुग़लक दिवाली मनाते थे। मुस्लिम बदशाहों द्वारा दीपावली को धूमधाम से मनाने का उल्लेख है। इनमें सबसे पहले बारी आती है बदशाह अकबर की। 16वीं शताब्दी में अकबर धूम-धाम से दिवाली मनाते थे। इस दिन दिवाली दरबार सजता था और रामायण का पाठ और श्रीराम की अयोध्या वापसी का नाट्य मंचन होता था।


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