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ICJ: फिर अटका भारतीय जज दलवीर भंडारी का चुनाव, ब्रिटेन अटका रहा रोड़ा

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 14 , 2017 , 19:39 IST | जेनेवा

अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) में बतौर जज दूसरे कार्यकाल के लिए भारतीय जज दलवीर भंडारी का चुनाव अटक गया है। एक सीट पर चुनाव के लिए भारत के दलवीर भंडारी और ब्रिटेन के क्रिस्टफर ग्रीनवुड के बीच सोमवार को भी चुनाव बेनतीजा रहा। महत्वपूर्ण बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में बहुमत इंडियन जज के साथ है, लेकिन ब्रिटेन के सुरक्षा परिषद में होने के नाते P-5 समूह राह में रोड़ा अटका रहा है। इस गतिरोध से दो बातें साफ हो गई हैं- पहला, भारत जैसे देशों के लिए बड़ा पावर शिफ्ट हुआ, जिसे रोका नहीं जा सकता और दूसरा, बदलाव को स्वीकार करने के लिए महत्वपूर्ण संगठन तैयार नहीं है।

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अब आखिरी दो उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला

संयुक्त राष्ट्र के 70 वर्षों के इतिहास में एलीट P-5 ग्रुप का कोई भी कैंडिडेट अंतरराष्ट्रीय अदालत से गैरहाजिर नहीं रहा। अब आखिरी दो उम्मीदवारों के लिए सीधा मुकाबला रह गया है। अंतिम दौर के मतदान में भंडारी को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 121 वोट मिले, जबकि पिछले दौर के मतदान में 116 वोट मिले थे। यह भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के लिए एक पुरस्कार की तरह है। जबकि ग्रीनवुड का वोट पिछले बार के 76 से घटकर 68 रह गया। महासभा में पूर्ण बहुमत के लिए 97 मत मिलने जरूरी होते हैं। हालांकि मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अटक गया। भारतीय उम्मीदवार को 6 वोट मिले जबकि यूके के उम्मीदवार को 9 वोट मिले।

P-5 के वर्चस्व को भारत की चुनौती

ताजा चुनाव से साफ है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना समर्थन नहीं खोया और P5 देश अपने में से एक उम्मीदवार को छोड़ना नहीं चाहते हैं। सामान्य परिस्थितियों में भंडारी के पक्ष में सुरक्षा परिषद के 1 या 2 वोट मिल सकते थे लेकिन P-5 समूह के देश अपनी पोज़िशन में बदलाव के लिए तैयार नहीं दिखते। लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत (जो P-5 का सदस्य नहीं है) ने यूके की दावेदारी को रोक रखा है। भारत ने दिखा दिया है कि लंबे समय तक P-5 का वर्चस्व नहीं रह सकता है।

पीएम मोदी ने भी ICJ में भारतीय जज के लिए चलाया था अभियान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भंडारी के दोबारा चुने जाने के लिए निरंतर अभियान चलाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख सदस्यों के साथ शिखर सम्मेलनों में इस मामले को उठाया। लेकिन NSG में प्रवेश की तरह इसमें भी भारत को रुकावट का सामना करना पड़ा है।

कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने ब्रिटेन पर लगाया आरोप

इस बीच, कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने आरोप लगाया है कि ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र महासभा के बहुमत की इच्छा को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ के एक तिहाई सदस्य हर तीन साल में नौ वर्ष के लिए चुने जाते हैं। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद में अलग-अलग लेकिन एक ही समय चुनाव कराए जाते हैं। आईसीजे में चुनाव के लिए मैदान में उतरे छह में से चार उम्मीदवारों को संयुक्त राष्ट्र कानूनों के अनुसार पिछले गुरुवार को चुना गया और उन्हें महासभा एवं सुरक्षा परिषद दोनों में पूर्ण बहुमत मिला।

आईसीजे के शेष एक उम्मीदवार के चयन के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद ने सोमवार को अलग-अलग बैठकें कीं। सुरक्षा परिषद में चुनाव के पांचों दौर में ग्रीनवुड को ज्यादा वोट मिले। सुरक्षा परिषद में बहुमत के लिए 8 वोट की आवश्यकता होती है। ब्रिटेन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। इसके मद्देनजर ग्रीनवुड, भंडारी की तुलना में लाभ की स्थिति में हैं। जबकि भंडारी को महासभा के सभी पांचों दौर के चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला।

अब आगे क्या?

आईसीजे की इस सीट के चुनाव के बेनतीजा रहने के बाद महासभा और सुरक्षा परिषद ने बैठक को बाद की किसी और तारीख के लिए स्थगित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के पूर्व शीर्ष अधिकारी थरूर ने कहा कि महासभा की आवाज को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा ने भारतीय एवं ब्रिटेन के उम्मीदवारों के बीच अंतरराष्ट्रीय अदालत के न्यायाधीश के चयन के लिए मतदान किया जिसमें संयुक्त राष्ट्र की वैधता और प्रभावशीलता दांव पर है। महासभा की आवाज को लंबे समय से नजरअंदाज किया जाता रहा है।'

 


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