नेशनल

पीएम मोदी ने सूचना प्रसारण मंत्रालय के 'फेक न्यूज' के फैसले को पलटा, होगा वापस

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
419
| अप्रैल 3 , 2018 , 14:37 IST

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फेक न्यूज पर लिए गए फैसले को पीएम मोदी ने वापस लेने को कहा है। पीएमओ ने पूरे मामले में दखल देते हुए सूचना प्रसारण मंत्रालय से कहा कि फेक न्यूज को लेकर जारी की गई प्रेस रिलीज को वापस लिया जाना चाहिए। यह पूरा मसला प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और प्रेस संगठनों पर छोड़ देना चाहिए। पीएमओ ने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ प्रेस काउंसिल को ही सुनवाई का अधिकार है।

बता दें कि 2 अप्रैल को स्मृति इरानी ने फेक न्यूज पर तमाम पाबंदियों की घोषणा की थी जिसके बाद सियासत गर्माती दिखाई दे रही थी। कांग्रेसी नेता अहमद पटेल नें सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध किया था।

जानें क्या है पूरा मामला-:

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को पत्रकारों की मान्यता का संशोधित गाइडलाइन जारी किया। केन्द्र सरकार ने कहा था कि गलत खबर देने या उसका प्रचार करने वाले पत्रकार की अधिमान्यता स्थायी रूप से रद्द की जा सकती है। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए संशोधित दिशानिर्देशों में यह व्यवस्था की गई है।

कांग्रेस के नेता अहमद पटेल ने ट्वीट करके ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यह कैसे पता चलेगा कि खबर फेक है या सही?

अहमद पटेल के सवाल-

- इसकी क्या गारंटी है कि इन नियमों से ईमानदार पत्रकारों का शोषण नहीं किया जाएगा?
- फेक न्यूज में क्या-क्या हो सकता है इसका फैसला कौन करेगा?
-क्या ये संभव है कि शिकायत के आधार पर जब तक जांच जारी है तब तक मान्यता रद्द न की जाए?
- इसकी क्या गारंटी है कि बनाई गई गाइडलाइन्स का इस्तेमाल सिर्फ फेक न्यूज चेक के लिए किया जाएगा, बल्कि पत्रकारों को सहज रिपोर्टिंग से रोकने के लिए नहीं?

स्मृति ईरानी ने दिया ट्वीटर पर जवाब-

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पटेल के सवालों का ट्वीट के जरिए ही जवाब दिया। उन्होंने लिखा, "आपको जागा हुआ देखकर खुशी हुई अहमद पटेल जी। न्यूज आर्टिकल या ब्रॉडकास्ट की गई न्यूज फेक है या नही इसका फैसला पीसीआई और एनबीए करेंगे और आपको पता होगा कि दोनों ही गैर-सरकारी संस्थाएं है।"

क्या है सरकार की गाइडलाइन-

मंत्रालय द्वारा जारी बयान में इस बारे में संक्ष‍िप्त जानकारी दी गई है कि किस तरह से किसी फेक न्यूज के बारे में शिकायत की जांच की जाएगी और किसके द्वारा की जाएगी।

बयान के मुताबिक, 'अब फेक न्यूज के बारे में किसी तरह की शिकायत मिलने पर यदि वह प्रिंट मीडिया का हुआ तो उसे प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का हुआ तो न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBA) को भेजा जाएगा। ये संस्थाएं यह तय करेंगी कि न्यूज फेक है या नहीं।'

यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी शिकायत मिलने पर किसी पत्रकार को ज्यादा परेशानी न हो, शिकायत की प्रक्रिया को दोनों एजेंसियों के द्वारा 15 दिन के भीतर निपटाने की व्यवस्था होगी। इस बारे में खुद सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट पर एक प्रतिक्रिया में कहा है, 'यह बताना उचित होगा कि फेक न्यूज के मामले पीसीआई और एनबीए के द्वारा तय किए जाएंगे, दोनों एजेंसियां भारत सरकार के द्वारा रेगुलेट या ऑपरेट नहीं की जाती हैं।'

वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर ट्वीट करती हैं,'सरकार के आज के आदेश के मुताबिक सजा सिर्फ उन्हें मिलेगी जो मान्यता प्राप्त हैं। उन्हें सिर्फ शिकायत के आधार पर ही दंड दे दिया जाएगा, अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा नहीं की जाएगी. मुझे नहीं लगता कि यह उचित है मैम।'


कमेंट करें