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3 दिन से जमीन में दबे हैं राजस्थान के 21 किसान, कर रहे हैं 'जमीन समाधि सत्याग्रह'

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 4 , 2017 , 12:52 IST | जयपुर

जयपुर के पास एक गांव में किसानों ने अनोखे तरीके से उनकी जमीनें जब्त करने का विरोध दर्ज कराया। सोमवार को गांधी जयंती के मौके पर नींदर गांव के किसानों ने गर्दन तक गहरे गड्ढों में बैठकर जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया।

तीन दिनों से 21 किसान जमीन में आधे दबे हैं, लेकिन सरकारी अधिकारियों पर इसका कोई फर्क नहीं है। दरअसल इस गांव की करीब 1350 बीघा जमीन पर जयपुर विकास प्राधिकरण नई कॉलोनी बनाने जा रहा है। लेकिन यहां के किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं। जेडीए के जोन डिप्टी कमिश्नर राजकुमार सिंह ने आंदोलनकारियों की यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी से वार्ता भी करवाई।

सत्याग्रह के दौरान महिला समेत 7 किसानों की तबीयत बिगड़ गई। महिला को बेहोश की हालत में गड्‌डे से बाहर निकाला गया। जब उसे होश आया तो उसने कहा कि मुझे क्यों निकला? इसी प्रकार 6-7 अन्य किसानों की भी तबीयत बिगड़ गई। खास बात यह है कि तबीयत बिगड़ने पर भी धरनार्थियाें का हौसला कहीं भी कम नहीं हो रहा। उनका कहना है कि जमीन बचाने के लिए कोई भी कुर्बानी देनी पड़े तो वे तैयार हैं।

विरोध स्वरुप बीते तीन दिनों से यहां के किसान जमीन समाधि सत्याग्रह कर रहे हैं। गड्ढों में आधे दबे किसान भूखे रहकर विरोध जता रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई भी सरकारी नुमाइंदा इन किसानों से बात करने नहीं पहुंचा है।

किसानों की यह है मांगे-

- जेडीए खेती की जमीन को अवाप्त मुक्त करे।
- यदि अवाप्ति करनी ही है तो पहले सर्वे करवाए, लोगों की राय जाने।
- जमीन की अवाप्ति वर्तमान अवाप्ति अधिनियम से हो।
- किसानों को मुआवजा बढ़ाकर दिया जाए। अवाप्ति में जमीन को बारानी दिखा रखी है। जबकि, पूरी जमीन पर खेती हो रहे है।

जयपुर विकास प्राधिकरण 1350 बीघा जमीन में से करीब 500 बीघा जमीन अवाप्त कर चुका है। जबकि 700 बीघा से अधिक जमीन पर उसे कब्जा लेना बाकी है। लेकिन किसानों के विरोध के चलते आवाप्ति की कार्रवाई मुश्किल लग रही है।


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