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सरकार बनने के बाद यूपी विधानसभा का पहला सत्र सोमवार से होगा शुरू, विपक्ष उठाएगा कानून व्यवस्था का मुद्दा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 14 , 2017 , 21:02 IST | लखनऊ

उत्तर प्रदेश में 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार, यानी 15 मई से शुरू होने जा रहा है। इस बार सदन में कई दिग्गज नदारद रहेंगे। वहीं सत्ता परिवर्तन के कारण अधिकांश सदस्यों की सीट बदली दिखेगी। इस बार सदन में पहली बार बड़ी संख्या में नए विधायक दिखेंगे।

विधानसभा में सबसे बड़ा आसन विधानसभा अध्यक्ष का होता है। करीब 15 साल बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक इस कुर्सी पर विराजमान रहेगा। भाजपा ने भगवंतनगर से विधायक हृदय नारायण दीक्षित को विधानसभा अध्यक्ष बनाया है। वहीं नेता सदन की कुर्सी पर अब तक पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बैठा करते थे। इस पर अब योगी आदित्यनाथ बैठे हुए दिखेंगे।

नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर स्वामी प्रसाद मौर्य बैठा करते रहे हैं, लेकिन अब इस आसन पर सपा के राम गोविंद चौधरी दिखेंगे। इसी तरह संसदीय कार्यमंत्री के रूप में विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का काम आजम खां करते थे, लेकिन अब यह कार्य सुरेश कुमार खन्ना करेंगे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का पक्ष अब स्वामी प्रसाद मौर्य नहीं, बल्कि लालजी वर्मा रखेंगे और कांग्रेस का पक्ष प्रदीप माथुर की जगह अजय कुमार लल्लू रखेंगे।

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बीते कई सालों तक बसपा का गुणगान करने वाले करीब दर्जन भर नेता इस बार भाजपा सरकार का बखान करते नजर आएंगे। स्वामी प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, चौधरी लक्ष्मी नारायण, दारा सिंह चौहान, एस.पी. बघेल, नंद गोपाल नंदी, धर्म सिंह सैनी इस बार सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दिखेंगे, क्योंकि ये सभी नेता योगी सरकार में मंत्री है।

सदन में अर्से से अपनी आवाज बुलंद करने वाले कई नेता इस बार सदन में नहीं दिखेंगे। सपा नेता अवधेश प्रसाद, ओम प्रकाश सिंह, अरविंद सिंह गोप, शाहिद मंजूर, नारद राय, रियाज अहमद, फरीद महफूज किदवई राजीव कुमार सिंह इस सदन से गायब रहेंगे, क्योंकि ये सभी चुनाव हार गए हैं। इसके अलावा सत्ता परिवर्तन के कारण अधिकांश विधायकों का स्थान बदला रहेगा।

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17वीं विधानसभा का पहला सत्र हंगामेदार होगा। लोकसभा की तर्ज पर यहां भी विपक्ष का जनाधार सिमट गया है। ऐसे में विपक्षी दल हंगामा करने से नहीं चूकेंगे। हर बार की तरह इस बार भी कानून व्यवस्था का मुद्दा सदन में विपक्ष जोर शोर से उठाएगा। इसमें सहारनपुर और गोरखपुर में भाजपा जनप्रतिनिधियों का मामला प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।

इसके अलावा 'भगवा बिग्रेड' द्वारा कानून को हाथ में लिए जाने की कोशिशों के मामले विरोधी दल प्रमुखता से उठाएंगे। सभी विपक्षी दल सरकार के खिलाफ रणनीति बनाने में लगे हुए हैं।


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