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आयुष मंत्रालय का गर्भवती महिलाओं को ज्ञान, मांसाहार और वासना से करें परहेज

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 14 , 2017 , 14:50 IST | नई दिल्ली

आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में राज्यमंत्री श्रीपद नाइक द्वारा जारी की गई एक बुकलेट में सेहतमंद शिशु पाने के लिए मांसाहार से परहेज, काम-वासना से बचने और मन में आध्यात्मिक विचार लाने की सलाह पर विवाद गहराता जा रहा है।

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विपक्ष ने इस मसले पर केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय को घेरते हुए कहा है कि सरकार गर्भवती महिलाओं को अनचाही सलाह न दें।

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इस बारे में मंत्रालय प्रभार संभाल रहे डॉ. ई आचार्या ने कहा कि यह सिर्फ एक सलाह है, मंत्रालय ने सलाह जारी की है गर्भवती महिलाएं माने या न मानें यह उनके इच्छा पर निर्भर है। 

उन्होंने बचाव करते यह भी कहा कि मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं को सिर्फ मांसाहार से परहेज बरतने की सलाह दी है ना कि सेक्स से दूर रहने की। 

गर्भवती महिलाओं को काम और वासना से रहना चाहिए दूर

महिलाओं को अक्सर उनके जीवन से संबंधी नसीहतें मिलती रहती हैं, चाहे घर हो, दफ्तर या यूं ही कोई अनजान व्यक्ति। महिलाओं को सलाह (भले ही वह अनचाही ही हो) की कभी कोई कमी नहीं रहती। गर्भवती महिलाओं को तो सलाह देने में कोई पीछे नहीं रहता।

इस बार भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस बारे में भावी माताओं के लिए नसीहतों की एक सूची जारी की है।

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आयुष मंत्रालय ने मदर एंड चाइल्ड केयर पर जारी किया बुकलेट

एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मद्देनज़र आयुष मंत्रालय द्वारा ‘मदर एंड चाइल्ड केयर’ पर जारी एक बुकलेट के मुताबिक,

अगर आप सेहतमंद शिशु पाने की इच्छुक हैं, तो मांस मत खाइए, गर्भधारण के बाद शारीरिक संबंध न बनायें, मन में अच्छे विचार लाएं, साथ ही अपने कमरे में सुंदर तस्वीरें लगाएं।

RSS ने भी गोरा और संस्कारी बच्चा पाने के लिए जारी किए थे टिप्स

गौरतलब है कि पिछले दिनों आरएसएस की चिकित्सा शाखा ‘आरोग्य भारती’ द्वारा शिशु को गर्भ में ही गोरा और संस्कारी बनाने की ख़बर सामने आई थी। तब बताया गया था कि माता-पिता के तीन महीने का शुद्धिकरण, ग्रहों के मुताबिक संभोग, महिला के गर्भवती हो जाने के बाद पूरी तरह से परहेज़ और प्रक्रियात्मक व सही भोजन का पालन करने से परफेक्ट संतान की प्राप्ति हो सकती है।

गर्भवती माता को बुरी संगत से दूर रहना चाहिए

इस बुकलेट में यह भी सलाह दी गई है भावी माता को ग़ुस्से, बुराई, काम-वासना और आसक्ति से दूर रहना चाहिए। बुरी संगत में नहीं रहना चाहिए, आत्मावलोकन करना चाहिए, आध्यात्मिक विचार मन में लाने चाहिए। साथ ही शांत चित्त से महापुरुषों के बारे में पढ़ना चाहिए।

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