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नागपुर में बोले प्रणब मुखर्जी, धर्म कभी देश की पहचान नहीं हो सकता, नफरत से सिर्फ नुकसान

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 7 , 2018 , 22:14 IST

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी ने नागपुर के रेशमीबाग स्थित आरएसएस मुख्यालय में संघ के तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण लेने वाले कैडर को संबोधित किया। आरएसएस के इस समारोह को लेकर देश में कई दिनों से सियासत गरम है। 

नागपुर में प्रणब मुखर्जी की बड़ी बातें:

  • अगर हम भेदभाव और नफरत करेंगे तो हमारी पहचान को खतरा। सहिष्णुता हमारी ताकत है। भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि, धर्म कभी भारत की पहचान नहीं बन सकता, नफरत से देश को सिर्फ नुकसान है।
  • पंडित नेहरू ने 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' पुस्तक में स्पष्ट रूप से व्यक्त किया, उन्होंने लिखा, "मुझे विश्वास है कि राष्ट्रवाद केवल हिंदू, मुसलमानों, सिखों और भारत के अन्य समूहों के विचारधारात्मक एकता से बाहर आ सकता है।"

  • मैं अपने विचारों को साझा करना चाहता हूं जो मैंने पिछले 50 वर्षों में महसूस किया है। भारत की आत्मा बहुलवाद में निहित है। धर्मनिरपेक्षता और हमारी समग्र प्रकृति हमें भारत बनाती है। धर्मनिरपेक्षता मेरे लिए विश्वास का विषय है और हमारे लिए होना चाहिए। यह एक समग्र संस्कृति है जो हमारे देश को बनाती है। "

  • भारत की आत्मा सहिष्णुता में बसती है। अलग रंग, अलग भाषा, अलग पहचान है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई की वजह से यह देश बना।
  • कई राजवंशों, शक्तिशाली साम्राज्यों ने उत्तरी और दक्षिणी भागों में भारत पर शासन किया।

  • मैं राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान होती है। देश के लिए समर्पण ही राष्ट्रभक्ति है।
  • आज हम एक बड़े संगठन हैं लेकिन हम यहां नहीं रुक सकते हैं। हम लोकप्रियता के लिए काम नहीं कर रहे हैं। हम प्रसिद्धि के लिए यह काम नहीं कर रहे हैं, हम हर समय आगे बढ़ना चाहते हैं। हम आराम नहीं करना चाहते हैं।

  • भारत वसुधैव कुटुंबकम का देश है। भारत में महाजनपदों की परंपररा रही है। हम विविधता का सम्मान करते हैं। विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।   
  • भारत में राष्ट्रवाद की परिभाषा यूरोप से अलग है। उन्होंने कहा, भारत पूरे विश्व में सुख शान्ति चाहता है। प्रणब मुखर्जी ने कहा, भारत पूरे विश्व को परिवार मानता है।
  • हिन्दुस्तान एक स्वतंत्र समाज है। भारत में विश्वविद्यालय की परंपरा बहुत पुरानी है। 1800 साल तक भारत शिक्षा का केंद्र था।

इस कार्यक्रम से पहले प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। हेडगेवार भवन में श्रद्धांजलि देने के बाद विज़िटर बुक में मुखर्जी ने लिखा- 'मां भारती के महान सपूत थे केशव बलिराम हेडगेवार।' हेडगेवार भवन में इस दौरान मोहन भागवत भी मौजूद रहे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति को आरएसएस परिसर दिखाया।


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