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ग्लोबल रैंकिग में फिसड्डी है भारत, मोदी बोले लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी है स्वतंत्र प्रेस

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 3 , 2017 , 13:22 IST | नई दिल्ली

विश्व प्रेस स्वंतत्रता दिवस पर भारत में भी इसकी चर्चा होना लाजमी है, मगर इसको लेकर मौजूदा हालात क्या है इस पर चर्चा कम ही होती है। पिछले दिनों दुनिया भर के प्रेस पर अपनी नजर रखने वाली एक एजेंसी द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में पत्रकारों की आजादी 'हिंदू राष्ट्रवादियों' द्वारा दी जाने वाली धमकियों की वजह से घटी है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्र पत्रकारिता वाले इंडेक्स में भारत को 180 देशों में 136वां स्थान मिला है। मतलब दुनिया के 135 देशों में पत्रकारों को भारत से अधिक आजादी हासिल है।

प्रतिष्ठित एजेंसी 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' की वार्षिक रिपोर्ट में भारत 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' में 136वें स्थान पर है, जबकि पिछले वर्ष भारत की रैंकिंग 133 थी। रिपोर्ट में हालांकि पूरी दुनिया में मीडिया के लिए चिंताजनक हालात की बात कही गई है।

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बता दें कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस तीन मई को मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इस मौके पर 'स्वतंत्र व जोशपूर्ण प्रेस' की वकालत करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मोदी ने एक ट्वीट में कहा,

यह प्रेस के प्रति अपने अटल विश्वास को दोहराने का दिन है।

प्रधानमंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा,

आज के दिन और समय में सोशल मीडिया संपर्क के एक सक्रिय माध्यम के रूप में उभरा है और इससे हमारी प्रेस की स्वतंत्रता को और मजबूती मिली है।

दरअसल, स्वतंत्र पत्रकारिता में भारत का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। भारत के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारों को सोशल मीडिया पर 'बेहद कट्टरपंथी राष्ट्रवादियों' द्वारा निशाना बनाए जाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, उन्हें बदनाम करने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, अपशब्द कहे जाते हैं और यहां तक कि शारीरिक हिंसा की धमकी दी जाती है।

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रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की खुलकर आलोचना करने वाले पत्रकारों का मुंह बंद करने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत मुकदमा दर्ज कराने की धमकियां तक दी जाती हैं, जिसके तहत देशद्रोह के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।


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