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1992 में एक युवा ने शुरू किया था तिरंगे की आज़ादी का संघर्ष...(15 अगस्त विशेष)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 15 , 2017 , 07:06 IST | नयी दिल्ली

देश को आज़ाद हुए 70 साल हो चुके हैं। पूरा देश आज़ादी का जश्न मना रहा है। इस जश्न का सबसे ख़ास अहसास कराता है तिरंगे को हाथों में थामना। तिरंगा लहराकार हम अपनी आज़ादी का जश्न मनाते हैं। स्वतंत्रता दिवस के अलावा भी हम तिरंगे को सम्मान देने के लिए उसे लहराते रहते हैं क्योंकि यह हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। देश की इस आन-बान-शान की खातिर अपनी जान की भी परवाह नहीं करते। 

तिरंगे की आजादी का संघर्ष:

क्या आप जानते हैं कि आजाद भारत में भी तिरंगे की असली आजादी के लिए संघर्ष हुआ है। बता दें 12 साल लंबे संघर्ष के बाद हरियाणा के एक उद्योगपति और युवा के मजबूत हौसलों की वजह से हर भारतवासी को 24 घंटे अपने घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान पर तिरंगा फहराने का अधिकार मिल पाया। 

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पहले तिरंगे को कुछ खास मौकों पर ही लहराने की इजाजत होती थी। तिरंगे को जुनून की हद तक चाहने वाले उस युवा का नाम है नवीन जिन्दल जिसके संघर्ष से हर भारतवासी तिरंगे की असली आजादी देख पाया।

दरअसल, इसके पीछे एक भावनात्मक कहानी है। बात साल 1992 की है। 1992 में नवीन जिन्दल अमेरिका से अपनी पढ़ाई खत्म कर भारत आये थे, उनके दिल में तिरंगा के लिए अपार सम्मान था। भारत आकर जब नवीन जिन्दल छत्तीसगढ़ स्थित रायगढ़ की अपनी फैक्ट्री गए तो वहां उन्होंने सम्मानस्वरूप तिरंगा लहराया। इस पर तत्कालीन बिलासपुर कमिश्नर ने नवीन जिन्दल को कानून का हवाला देकर झंडा फहराने से मना कर दिया। बिलासपुर कमिश्नर ने कहा कि हमारे देश का फ्लैग कोड इसकी इजाजत नहीं देता कि कोई आम नागरिक ख़ास दिनों को छोड़कर तिरंगा फहराये।  

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(फाइल फोटो)

नवीन जिन्दल को यह बात इतनी चुभ गई कि उन्होंने तिरंगे के अधिकार की खातिर अदालत का दरवाजा खटखटा दिया। नवीन जिन्दल ने संविधान की धारा 226 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की जिसमें कहा गया कि कोई ऐसा कानून नहीं है जो किसी भारतीय नागरिक को झंडा फहराने से रोकता हो। 22 सितंबर 1995 को दिल्ली हाईकोर्ट ने नवीन जिन्दल की याचिका पर आदेश दिया कि भारत का नागरिक खास दिनों को अलावा भी, किसी और दिन तिरंगा फहरा सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। 1995 से लेकर साल 2001 की कानूनी लड़ाई के बाद वो दिन आया जब नवीन जिन्दल को तिरंगा फहराने का अधिकार मिला। 2 मई 2001 को सुप्रीम कोर्ट ने नवीन जिन्दल को पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराने की इजाजत दी। बात सिर्फ नवीन जिन्दल की नहीं थी, नवीन चाहते थे कि देश के हर नागरिक को अपने घरों और दफ्तरों पर तिरंगा फहराने का अधिकार मिले, उन्होंने कानूनी लड़ाई फिर जारी रखी।

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2001 से लेकर 2004 तक की कानूनी लड़ाई के बाद वो ऐतिहासिक दिन आया जिसने हर भारतीय को साल के 12 महीने अपने हाथ से तिरंगा फहराने का अधिकार दिया। 23 जनवरी 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि देश के प्रत्येक नागरिक को आदर, प्रतिष्ठा एवं सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज को फहराने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि झंडा फहराना हर भारतीय का मौलिक अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने केन्द्र की उस याचिका को खारिज कर दिया जो उसने हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ दाखिल की थी।

अदालत के आदेश के बाद भारत सरकार ने भी फ्लैग कोड में संशोधन कर भारत के सभी नागरिकों को प्रतिदिन राष्ट्रीय ध्वज को फहराने का अधिकार दिया, बशर्ते कि ध्वज को फहराने में ध्वज की गरिमा बरकरार रहे।

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इसके बाद से हर भारतीय हर दिन तिरंगा फहराने लगा। इससे पहले सिर्फ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अलावा किसी और दिन भारत के नागरिकों को राष्ट्र ध्वज फहराने का अधिकार नहीं था, खास कर अपने घरों या कार्यालयों में।

साल 2009 में नवीन जिन्दल ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया कि देश में रात को भी विशाल ध्वज दंड पर तिरंगा फहराने की इजाजत दी जाए। गृह मंत्रालय ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि देश में राष्ट्रीय ध्वज को रात में भी विशाल ध्वज दंड पर फहराने की इजाजत है लेकिन झंडे को पूरी रोशनी में सम्मान के साथ फहराया जाए।

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(फाइल फोटो)

तिरंगे से प्रेम की नवीन जिन्दल की कहानी यही खत्म नहीं होती है। तिरंगे की खातिर नवीन जिन्दल ने ‘फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ की स्थापना 3 जून 2002 में की। ‘फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ देश के प्रत्येक नागरिक को तिरंगे के साथ जोड़ने और भारतीयों के बीच तिरंगे को लोकप्रिय बनाने की कोशिश करता है। नवीन जिन्दल के नेतृत्व में ‘फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ देशभर में 60 से ज्यादा स्मारकीय झंडे लगा चुका है। ‘फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ ने देश भर में दिल्ली से लेकर करगिल तक स्मारकीय झंडे स्थापित किये हैं।

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(फाइल फोटो)

ये है पूरी कहानी तिरंगा फहराने के अधिकार की। जरा सोचिये जब हम तिरंगा फहराते हैं तो हमारा सीना गर्व से कितना चौड़ा हो जाता है। इसलिए हमारा और हर भारतीय का यह कर्तव्य बनता है कि हम अपने राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें।


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