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देश में बनेंगे 17 नए हाईवे जहां लैंड और टेक ऑफ होंगे एयरक्राफ्ट

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 10 , 2017 , 17:58 IST | नई दिल्ली

ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने कहा है कि 17 ऐसे हाईवे बनाए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल एयरस्ट्रिप के तौर पर भी हो सकेगा। इसके लिए काम इस साल ही शुरू हो जाएगा। गडकरी ने ये भी कहा कि ई-ऑटोरिक्शा ग्रामीण भारत की जरूरत है। हम इस पर विचार कर रहे हैं। पावर ग्रिड की तरह वॉटर ग्रिड भी बनाई जाएंगी।

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गंगा की साफ -सफाई पर भी बोले गडकरी

पिछले हफ्ते हुए कैबिनेट फेरबदल में गडकरी को रिवर डेवलपमेंट और गंगा रेजुवेनेशन मंत्रालय का एडिशनल चार्ज भी दिया गया है। गडकरी ने कहा कि अब मेरे पास गंगा को अविरल और निर्मल बनाए रखने की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रिक मोड पर रखने की जरूरत है। हम इसके लिए पॉलिसी ला रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में ई-ऑटोरिक्शा और ऐसे ही दूसरे व्हीकल चलाए जाएंगे। ये व्हीकल लीथियम आयन बैटरी से चलेंगे। इससे लागत 40% तक कम हो जाएगी। बड़ी तादाद में व्हीकल्स बनाने में खर्च और भी कम आएगा।"

इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल चलाना सस्ता पड़ेगा

गडकरी ने ये भी कहा कि भारत में कोयला और बिजली सरप्लस में है। लिहाजा व्हीकल्स का इलेक्ट्रॉनिक मोड में होना सस्ता पड़ेगा। इससे ट्रांसपोर्ट चार्ज भी कम आएगा। लोगों को हमेशा ट्रांसपोर्ट मिलेगा। चाहे आप वेस्ट बंगाल हो, या फिर असम, आंध्र प्रदेश, नॉर्थईस्ट के इलाके, उत्तर प्रदेश या बिहार, मेट्रो और ई-ट्रांसपोर्ट हाथ रिक्शा को खत्म कर देगा। हाथ से रिक्शा खींचना अमानवीय है।"

सूखे से निबटने के लिए बनाए जाएंगे रिवर ग्रिड

गडकरी ने कहा कि पावर ग्रिड की तर्ज पर रिवर ग्रिड बनाई जाएंगी। ये इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) के तहत काम करेगी। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई गांवों में तो पीने के पानी भी नहीं है। दूसरी तरफ बिहार और उत्तर प्रदेश में भारी बाढ़ आती है। ऐसे में हम वॉटर ग्रिड क्यों नहीं बना सकते, ताकि ज्यादा पानी को जरूरत वाले इलाके में भेजा जा सके।

अगले 3 महीनों में 50 हजार रुपए की लागत से 5 में से 3 नदियों को जोड़े जाने का प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। नदियों को जोड़ना पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था। हम गंगा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियों के ज्यादा पानी को छोटी नदियों में क्यों नहीं ले जा सकते।

 


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