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...बस आने ही वाले हैं सिद्धि विनायक, जानिये क्यों मनाते हैं गणेश चतुर्थी?

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 22 , 2017 , 20:00 IST | नयी दिल्ली

25 अगस्त को गणेश चतुर्थी है और इसके साथ ही 10 दिनों तक गणेश उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। इस उत्सव के लिए भक्तजनों की तैयारियां जोरों पर है। सब अपने सामर्थ्य के हिसाब से गणेश जी को प्रसन्न करने में लगे हैं। हिंदू धार्मिक कैलेंडर के मुताबिक, गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद के चौथे दिन मनाई जाती है।

क्यों मनाया जाता गणेश चतुर्थी का त्योहार है?

श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। इसीलिए हर साल इस दिन गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है। भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसीलिए इस दिन इसे गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

 

गणेश चतुर्थी हिन्दू धर्म का अत्यधिक मुख्य तथा बहुत प्रसिद्ध पर्व है। इसे हर साल अगस्त या सितंबर के महीने में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। ये भगवान गणेश के जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है जो माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र है। ये बुद्धि और समृद्धि के भगवान है इसलिये इन दोनों को पाने के लिये लोग इनकी पूजा करते है। लोग गणेश की मिट्टी की प्रतिमा लाते है और चतुर्थी पर घर पर रखते है तथा 10 दिन तक उनकी भक्ति करते है और उसके बाद अनन्त चतुर्दशी के दिन अर्थात् 11वें दिन गणेश विसर्जन करते है।

गणेश की कथा:

पुराणों के अनुसार कैलाश को भगवान शिव का निवास कहा गया है मान्यता है कि पार्वती ने जब मिट्टी से गणेश जी को बनाया उस समय भगवान शंकर वहां पर मौजूद नहीं थे। पार्वती स्नान करने कि लिए अंदर गई और गणेश को ये आदेश दिया कि कोई अंदर ना आने पाए, उसी समय अपने पुत्र गणेश से अनजान भगवान शिव वहां आ गए और गणेश के द्वारा रास्ता रोके जाने से क्रोधित भगवान शिव ने उनकी गर्दन काट दी।

इस खबर को सुन कर माता पार्वती ने भगवान शिव से उनके पुत्र को वापस करने की मांग की तब शिव ने अपने साथियों को आदेश दिया कि जो पहला जानवर मिले असका सिर लेकर आओ, पहले जानवर के तलाश में निकले साथियों को सफेद हाथी का बच्चा मिला जिसको लेकर वो शिव के पास आए और शिव ने हाथी का सर लगाकर गणेश को पुन: जीवित कर दिया यहीं कारण है कि गणेश जी का सर हाथी का है।


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