बिज़नेस

अब देश में बचेंगे सिर्फ 12 सरकारी बैंक, SBI जैसे 4 बड़े बैंक बनाने की योजना

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
179
| जुलाई 17 , 2017 , 12:51 IST | नई दिल्ली

केन्द्र सरकार पब्लिक सेक्टर बैंक की संख्या घटाकर 12 तक सीमित करने पर विचार कर रही है। सरकार इससे जुड़े एक एजेंडे पर काम कर रही है। ऐसा करने का केंद्र सरकार का मकसद बैंकिंग सेक्टर को मजबूती देना है। इस एजेंडे का मतलब सरकार चाहती हैं कि देश में केवल 3 से 4 बड़े सरकारी बैंक हो जो ग्लोबल लेवल पर काम करें।

एक अधिकारी ने बताया कि 21 पब्लिक सैक्टर बैंकों को मध्य अवधि में 10 से 12 में समेट दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि थ्री-टायर स्ट्रक्चर के हिसाब से 3 से 4 ऐसे बैंक बनाए जाएंगे जो भारतीय स्टेट बैंक जितने बड़े होंगे। उस अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि क्षेत्रीय बैंक जैसे कि पंजाब और सिंध बैंक व आंध्रा बैंक स्वतंत्र बैंक के तौर पर काम करते रहेंगे। इसके अलावा कुछ मिड-लैंडर्स भी अपने ऑप्रेशन चलाते रहेंगे।

पिछले महीने वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार सरकारी बैंकों के मर्जर को लेकर तेजी से काम कर रही है। हालांकि उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। एस.बी.आई. के मर्जर से उत्साहित वित्त मंत्रालय ऐसा ही दूसरा प्रोपोजल क्लीयर करने पर विचार कर रहा है। हालांकि यह तभी मुमकिन होने की उम्मीद है जब बैड लोन की स्थिति नियंत्रण में आ जाती है। भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के मुताबिक व्यवस्था में कुछ बड़े बैंक, कुछ छोटे और कुछ स्थानीय बैंक रहेंगे। उन्होंने कहा था कि सिस्टम में वैरायटी की जरूरत है।

नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एक संभावित विकल्प तो यह हो सकता है कि पंजाब नैशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ोदा, कैनरा बैंक और बैंक ऑफ इंडिया ऐसे बैंकों की तलाश करना शुरू कर सकते हैं जो अधिग्रहण के लिए तैयार हैं। बैंकों के समायोजन में उसके कर्ज, ह्यूमन रिसोर्स, भौगोलिक स्थिति आदि फैक्टर्स को ध्यान में रखा जाएगा।

गौरतलब है कि कुछ माह पहले सरकार ने एसबीआई में उसके पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय किया था। इसके बाद से स्टेट बैंक देश का सबसे बड़ा और दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में जगह बनाने में कामयाब रहा है।


कमेंट करें