बिज़नेस

14 लाख कंपनियों ने नहीं भरा GSTR, 10 अक्टूबर है आखिरी तारीख

कुलदीप सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
145
| अक्टूबर 10 , 2017 , 16:23 IST | वाशिंगटन

जीएसटी पर सरकार ने सख्त तेवर दिखाए हैं , वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कर दिया है कि जुलाई महीने का आखिरी रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 10 अक्टूबर ही रहेगी और सरकार इस समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाने वाली है।


अरुण जेटली ने कहा कि हाल ही में लागू हुए जीएसटी को बेपटरी करने के प्रयासों के बावजूद राज्य इस नई व्यवस्था को तेजी से अपना रहे हैं। सोमवार शाम सात बजे तक 39 लाख कंपनियों या कारोबारियों ने अपना अंतिम रिटर्न जीएसटीआर-एक जमा कराया था। कुल 53 लाख इकाइयों को जीएसटीआर-एक दाखिल करना है।

जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ने रिटर्न दाखिल न करने वाली इकाइयों को एसएमएस और ईमेल भेजकर दो बार रिटर्न दाखिल करने को कहा है।
वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, पहले ही दो महीने का विस्तार दिया जा चुका है।अब करदाताओं को जुलाई के लिए जीएसटीआर-एक रिटर्न दाखिल करने के लिए और विस्तार नहीं दिया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि ऐसे करदाता जिन्होंने जुलाई के लिए जीएसटीआर-एक दाखिल नहीं किया है उन्हें सलाह दी जाती है कि वे तत्काल इसे दाखिल करें।
कोई भी कारोबारी जैसे ही जीएसटीआर-एक रिटर्न 10 अक्टूबर तक दाखिल करता है उसके खरीदार की जीएसटीआर-दो ए वाली प्रविष्टियां स्वत: ही सामने आ जाएंगी। खरीदार जरूरी होने पर अपने जीएसटीआर-दो को संशोधन के बाद अंतिम रूप दें और इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) की सुविधा लें।

यदि करदाता 10 अक्तूबर तक जीएसटीआर-एक दाखिल नहीं करते हैं तो खरीदार को आईटीसी लेने में दिक्कत आ सकती है। मंत्रालय ने कहा है कि माल अथवा सेवाओं के सभी आपूर्तिकर्ता विशेष तौर से खरीदारी करने वाले अपनी बिक्री के ब्यौरे को जीएसटीआर-एक में भरकर तय तिथि में भेज दें ताकि उनके खरीदार को इनपुट क्रेडिट में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।


जीएसटी को बेपटरी करने के सभी प्रयास विफल


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत की माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को अपनाने की राह ‘लगभग निर्विघ्न’ रही है और यह ‘गलत-जानकारी’ रखने वाले विपक्ष के इसे ‘बेपटरी’ करने के कई प्रयासों के बावजूद हुआ है।

जेटली इन दिनों एक सप्ताह की अमेरिका यात्रा पर हैं। यहां वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्वबैंक की वार्षिक बैठकों में शिरकत करेंगे।

जेटली ने कहा कि जीएसटी के तहत सरकार ने कई आकर्षक योजनाएं शुरू कीं ताकि भारत में कर के लिए गैर-अनुपालन की स्थिति को कर-अनुपालन की दिशा में ले जाया जाए।

न्यूयॉर्क में एक संबोधन में उन्होंने कहा,

राजनीतिक समूहों ने जीएसटी को बेपटरी करने के कई प्रयास किए, लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि उनकी खुद की राज्य सरकारों ने उनकी बातों को नहीं सुना क्योंकि वे समझ रही हैं कि इसका 80% हिस्सा राज्य के पास आएगा और इसीलिए उन्होंने अपनी पार्टी के कम जानकारी रखने वाले केंद्रीय नेता की बात को स्वीकार नहीं किया और अपने राज्य के राजस्व का नुकसान होने से बचाया।

उन्होंने यह बात यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और अमेरिका चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के एक संयुक्त कार्यक्रम ‘भारत के बाजार सुधार : आगे बढ़ने का रास्ता’ में प्रश्नों का जवाब देते हुए कही।

जेटली ने कहा,

राज्य सरकारें समझदार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी के साथ मुख्य समस्या यह है कि जो लोग कर अनुपालन नहीं कर रहे थे, संयोगवश इसकी वजह से वे पकड़ में आ गए। इसके चलते विभिन्न तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। अब इनमें से कुछ कानूनी हैं जबकि कुछ को कर नहीं चुकाने वालों ने पैदा किया कि जीएसटी उनके लिए समस्याएं उत्पन्न कर रहा है।

जेटली ने कहा कि सरकार के पास इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वह सही और जबरदस्ती पैदा की गई शिकायतों में भेद कर सके।


कमेंट करें