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GST का दर्द दूर करेगी सरकार, इन 5 बड़े बदलावों की संभावना

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 6 , 2017 , 09:25 IST | नई दिल्ली

जीएसटी की व्यवस्था को लेकर छोटे कारोबारियों की शिकायतों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में बड़ा ऐलान कर सकती है। राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली की मीटिंग में निर्यातकों को राहत देते हुए 'वर्चुअल करंसी' के जरिए टैक्स के इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का ऐलान किया जा सकता है। इसके अलावा छोटे एवं मझोले उद्योगों को राहत देते हुए जीएसटी लागू करने की प्रक्रिया की में सुधार के लिए कुछ फैसले लिए जा सकते हैं।

अमित शाह केरल से भाग कर दिल्ली आए, जेटली ने छोड़ी मीटिंग

पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से बुधवार को सरकार के आर्थिक फैसलों के बचाव और गुरुवार को अरुण जेटली और अमित शाह से मुलाकात के बाद जीएसटी को लेकर कई बड़े फैसलों की उम्मीद की जा रही है। माना जा रहा है कि केरल में अपनी महत्वपूर्ण पदयात्रा को बीच में छोड़कर ही दिल्ली आए अमित शाह ने बैठक के दौरान पीएम मोदी को जमीनी हकीकत के बारे में बताया। जेटली ने इंडिया इकनॉमिक समिट में अपने प्रस्तावित भाषण को छोड़ दिया है। पीएमओ के सूत्रों का कहना था कि यह रूटीन बैठक ही थी। बैठक की पूरी जानकारी उजागर नहीं हो पाई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो इस बैठक में जीएसटी से संबंधित लोगों की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की गई।

2018 तक टलेगा जीएसटी काअनुपालन

छोटे व्यापारियों को तिमाही आधार पर जीएसटी भरने की छूट दी जा सकती है। छोटे व्यापारियों को जीएसटी के अनुपालन में भी राहत मिल सकती है। इसके चलते जीएसटी का अनुपालन मार्च 2018 तक टाला जा सकता है। इसके अलावा निर्यातकों को भी राहत मिल सकती है।

इन पर भी हो सकता है फैसला

छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी, छूट की स्लैब को 75 हज़ार से बढ़ाकर 1.5 करोड़ तक किया जा सकता है

टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिल सकती है

पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के अंदर लाने की प्रक्रिया पर विचार हो सकता है

छोटे टैक्सपेयर पर बोझ को कम करने पर विचार

कम्पोज़िशन स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन को दोबारा खोला जा सकता है

किए जा सकते हैं ये 5 बदलाव

1. डेढ़ करोड़ के टर्नओवर वाले व्यापारियों को हर महीने के बजाए तीन महीने में रिटर्न दायर करने के लिए कहा जा सकता है

2. वस्त्र उद्योग के लिए जीएसटी के दरों में कमी की जा सकती है

3. छोटे कारोबारियों के लिए सरल दरें की जा सकती हैं

4. निर्यातकों को राहत मिलने की संभावना है

5. कुछ वस्तुओं की कर श्रेणी में बदलाव किया जा सकता है


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