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जाधव केस में पाकिस्तान के 7 करोड़ पर भारी पड़ा भारत के हरीश साल्वे का एक रुपया

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 19 , 2017 , 11:31 IST | नई दिल्ली

पाकिस्तान में फांसी की सजा पाए कुलभूषण जाधव की तरफ से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में देश के नामी वकील हरीश साल्वे पेश हुए। लेकिन देश के इस सबसे महंगे वकील ने मामले में जाधव का पक्ष रखने के लिए सिर्फ एक रुपये की सांकेतिक फी ली वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के वकील खैबर कुरैशी ने 7 करोड़ फीस ली लेकिन वो ठीक से पैरवी नहीं कर सके।

भारत के पक्ष में फैसला आने के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी हरीश साल्वे की तारीफ की।  

देश के दिग्गज कारोबारी हैं साल्वे के मुवक्किल

जो लोग साल्वे से परिचित हैं, उन्हें इस बात से कोई हैरानी नहीं हुई। उनके मुवक्किलों की फेहरिश्त में अंबानी, मित्तल जैसे कारोबार जगत के दिग्गज और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम हैं, जिनका केस लड़ने में बहुत कम वकील दिलचस्पी रखते हैं।

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हालांकि, साल्वे वैसे केस बिना पैसे लिए लड़ते हैं, जिसकी बहुत चर्चा नहीं हो रही हो, लेकिन जो उनकी बौद्धिक क्षमताओं को चुनौती देने वाला हो या उनको इस बात का भरोसा हो कि आरोपी निर्दोष है।

आरुषि मर्डर केस में तलवार की पैरवी किए थे

उन्होंने आरुषि मर्डर केस में उसके पैरेंट्स का पक्ष रखा था। इस मामले में डॉक्टर दंपती पर बेटी का कत्ल का आरोप था। उन्होंने इसके अलावा उपहार अग्निकांड मामले में पीड़ितों का पक्ष रखा था। जो लोग साल्वे को करीब से जानते हैं, वो बता सकते हैं कि वह केस पर कितनी मेहनत करते हैं।

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(इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत की पैरवी करते साल्वे)

साल्वे की दिनचर्या बहुत ही व्यस्त है। वे हाई प्रोफाइल मामलों में पैरवी के लिए दुनिया भर में घूमते रहते हैं। ऐसा ही एक हाई प्रोफाइल मामला सिंह बंधुओं और जापानी दवा कंपनी दाइची सैंक्यो का था। साल्वे केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार के चहेते हैं, लेकिन उनको कोर्ट ने गुजरात दंगा मामलों में अदालती मित्र बनाया था।

आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट में सरकार की पैरवी कर चुके हैं साल्वे

आधार मामले में मोदी सरकार जब सुप्रीम कोर्ट में बेबस हो गई तो हारकर साल्वे की शरण में आई। साल्वे ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में ऊबर का पक्ष रखा था जिसमें मेरू जैसे लोकल ऑपरेटरों ने उस पर प्रीडेटरी प्राइसिंग का आरोप लगाया था। कॉम्पैट ने इस मामले में कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया को आरोपों की जांच करने का आदेश दिया, जिसका साल्वे ने अदालत में पुरजोर विरोध किया।

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