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Health Report: देश में कॉन्डम यूज में 52% की कमी, 8 साल में दोगुने हुए गर्भपात

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 12 , 2018 , 18:49 IST

11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया,इस दिवस के मौके पर लोगों को परिवार नियोजन के तरीकों और बढ़ती आबादी के दुष्परिणाम से लोगों को अवगत कराया गया। देश में टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में कमी आने के साथ-साथ परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग भी लगातार कम हो रहा है।

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स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 8 सालों के दौरान देश में कॉन्डम के इस्तेमाल में करीब 52 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं नसबंदी कराने के मामले 75 प्रतिशत तक कम हुए हैं। इसके साथ ही सामान्य गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल में भी करीब 30 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। मंत्रालय ने यह रिपोर्ट 2008 से 2016 तक के बीच किए गए सर्वे के आधार पर तैयार की है।

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यही नहीं नसबंदी कराने के मामले भी 75 प्रतिशत तक कम हुए ही है इसके साथ ही सामान्य गर्भनिरोधक गोलियों के प्रयोग में भी करीब 30 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। कपल्स अब परिवार नियोजन के लिए अबॉर्शन और इमरजेंसी पिल्स (आपातकालीन गर्भनिरोधक) का ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं।

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रिपोर्ट बताती है कि अगर हर तरह के कॉन्ट्रासेप्टिव्स के बारे में बात करें तो इनके कुल इस्तेमाल में 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जहां तक कंडोम के प्रयोग की बात है तो केरल जैसे सबसे ज्यादा साक्षरता दर वाले राज्य में इसमें 42 प्रतिशत तक की कमी आई है और इसके उलट बिहार में इसका प्रयोग करने वालों की संख्या पिछले 8 सालों के दौरान 4 गुना वृद्धि हुई है। इसके साथ ही बिहार में गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल भी बढ़ा है।

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बढ़ रहे हैं गर्भपात के मामले

पिछले 8 सालों में देश के अंदर गर्भपात के मामले बढ़े हैं। जिसके पीछे कारण असुरक्षित यौन संबंध, गर्भनिरोधक का महिलाओं पर बढ़ता दवाब और महिलाओं का बिगड़ता स्वास्थ्य है।

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सर्वे में कहा गया है कि ज्यादातर देश के पुरुष नसबंदी या कंडोम का प्रयोग नहीं करते हैं, जिसकी वजह से अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए महिलाओं को जबरदस्ती IUD या फिर गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग करना पड़ रहा है।


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