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तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- शादी खत्म करने का सबसे घटिया तरीका है यह

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 12 , 2017 , 17:13 IST | नयी दिल्ली

मुस्लिमों में प्रचलित तीन तलाक और हलाला की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में दूसरे दिन शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रही। सलमान खुर्शीद (निजी तौर पर कोर्ट की मदद करने वाले वकील) के तर्कों पर सुनवाई हुई। उन्‍होंने कहा है कि किसी और देश में तीन तलाक नहीं दिया जाता, ऐसा सिर्फ भारतीय मुस्लिम ही करते हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने खुर्शीद से पूछा कि अगर तीन तलाक भारत में ही है तो बाकि देशों ने इसे खत्म करने के लिए क्या किया। खुर्शीद ने जवाब में कहा कि जो भारत में हो रहा है, वैसा दूसरे देशों में भी हुआ होगा। तभी यह खत्‍म हो पाय

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सुनवाई में कोर्ट ने तीन तलाक पर बड़ी टिप्पणी की, कोर्ट ने कहा कि,

इस्लाम की विभिन्न विचारधाराओं में तीन तलाक को भले ही 'वैध' बताया गया हो, लेकिन यह शादी के रिश्ते को खत्म करने का सबसे घटिया और अवांछनीय तरीका है।

इससे पहले बृहस्‍पतिवार को कोर्ट ने कहा कि पहले वह यह तय करेगा कि यह इस्लाम का मौलिक हिस्सा है या नहीं। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने यह साफ कर दिया कि मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह के मसले पर संभवत: विचार नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह तीन तलाक से जुड़ा मुद्दा नहीं है।

न्यायमूर्ति जोसेफ कुरियन, आरएफ नरीमन, यूयू ललित तथा अब्दुल नजीर की सदस्यता वाली पीठ ने इस मामले में विचारणीय मुद्दे तय करते हुए कहा, 'हम इस पर गौर करेंगे कि क्या तीन तलाक पवित्र है और क्या इसे मौलिक अधिकार की तरह लागू किया जा सकता है।'

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आपको बता दें कि इस पीठ में विभिन्न धर्मों सिख, ईसाई, पारसी, हिंदू और मुस्लिम से ताल्लुक रखने वाले जज शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि इस निष्कषर्ष पर पहुंचता है कि तीन तलाक धर्म का मौलिक हिस्सा है तो वह उसकी संवैधानिक वैधता के सवाल में नहीं जाएगा।

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