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भक्तों को आस! समाधि के बाद लौटेंगे गुरु आशुतोष महाराज, जानें क्या है सच

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 9 , 2017 , 18:20 IST | नई दिल्ली

भारत को संतों की भूमि कहा जाता है। यहां जब भी समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है कोई ना कोई महापुरूष अपने विचारों से उस दुविधा को ,अंधकार को अपनी ज्योति से दूर करता है। लेकिन उस संत के प्रति लोगों का विश्वास कब अंधविश्वास में बदल जाता है , संत के विचारों पर भक्तों की अंधभक्ति कब हावी होने लगती है ये निरंतर आसानी से समझा सकता है। गौतम बुद्ध ने कभी पूजापाठ का समर्थन नहीं किया था लेकिन आज उनके दुनिया भर में मंदिर हैं और उनकी पूजा भी की जाती है।

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आइए बातें करते है एक ऐसे ही संत की जिनके भक्त दुनिया भर में फैले हुए हैं। उन्होंने कुछ साल पहले समाधि ले ली और वही से एक विवाद शुरू हो गया भक्तों ने इनकी वापसी की आस में उनके शरीर को फ्रीज़ करके रख दिया ,मामला अदालत पहुंच गया और अब सालों बाद फैसला भी आ गया।

आशुतोष महाराज ने पंजाब से शुरु किया आध्यात्मिक सफऱ

‘दिव्य ज्योति जागृति संस्थान’ के संस्थापक आशुतोष महाराज भारतीय सनातन परंपरा के वाहक आध्यात्मिक गुरु रहे हैं। ऐसी मान्यता उनकी शिष्यों में है। मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र से आने वाले आशुतोष महाराज ने उस दौर में पंजाब को अपनी कर्मभूमि बनाई, जब पंजाब आतंकवाद की आग में जल रहा था।

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ऐसा माना जाता है ब्रह्मज्ञान की जिस तलाश में उन्होंने हिमालय में तपस्या की थी, उसकी प्राप्ति होते ही, दुनिया को इस ज्ञान से परिचय कराने के लिए हिमालय से निकलकर वे भारत भ्रमण पर निकले। यह वो दौर था, जब पंजाब बुरी तरह से आतंकवाद की चपेट में था। उन्हें लगा कि जो ज्ञान की प्राप्ति हुई है, उसकी सबसे अधिक आवश्यकता अशांति से गुजर रहे पंजाब के लोगों को ही है।

1991 में की दिव्य ज्योति जागृति संस्थान’ की स्थापना

उन्होंने पूरे पंजाब का भ्रमण किया और पाया कि लोग अंदर से अशांत हैं, जिसके कारण समाज और राष्ट्र को विध्वंस के रास्ते पर ले जाने के लिए हथियार और नशे का सहारा ले रहे हैं। साल 1983 में कभी पैदल तो कभी साइकिल से आशुतोष महाराज ने पंजाब के गांव-गांव में जाकर लोगों को यह समझाना शुरू किया कि जब तक मनुष्य अंदर से शांत नहीं होगा, तब तक समाज में अशांति इसी तरह से फैलती रहेगी। आशुतोष महाराज ने 1983-84 में नूरमहल में आश्रम की स्थापना की और ‘ब्रह्मज्ञान’ के द्वारा विश्व शांति के अपने अभियान को आगे बढ़ाया। सन 1991 में ‘दिव्य ज्योति जागृति संस्थान’ की स्थापना हुई।

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 बाबा के 'दिव्य शांति महोत्सव’ में 35 लाख लोगों ने लिया था हिस्सा

समाधि में जाने से करीब डेढ़ साल पूर्व 2012 में आशुतोष महाराज ने नूरमहल में ‘दिव्य शांति महोत्सव’ का आयोजन किया था, जिसमें देश भर से करीब 35 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। एक साथ, एक जगह किसी गुरु के सत्संग में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने की यह एक अभूतपूर्व घटना थी ऐसा उनके भक्त मानते हैं ।
महेश कुमार झा के नाम से भी पुकारे जाने वाले इस बाबा को 28 जनवरी 2014 को डॉक्‍टर्स ने क्लिनिकली डेड घोषित किया था। लेकिन उनके अनुयायियों ने उन्‍हें समाधिरत घोषित कर दिया। वे अब भी दावा कर रहे हैं कि बाबा समाधि में हैं और जल्‍द ही बाहर आएंगे।

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2014 को ली समाधि, कोर्ट ने बाबा के शरीर को सुरक्षित रखने की दी इजाजत 

5 जुलाई 2017 को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समाधि में लीन आशुतोष महाराज के शरीर को सुरक्षित रखने की अनुमति दे दी है। इससे उनके अनुयायी बहुत खुश हैं । बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करते हुए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (डीजेजेएस) के प्रमुख के शरीर को संरक्षित करने का फैसला सुनाया, इससे पहले साल 1 दिसंबर 2014 को जस्टिस एमएमएस बेदी की सिंगल बेंच ने डीजेजेएस प्रमुख के शरीर का अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि आशुतोष महाराज क्लिनिकली डेड को चुके हैं। लिहाजा, उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाए।

 


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