ख़ास रिपोर्ट

अपने दम पर लद्दाख की तस्‍वीर बदल रहे हैं सोनम वांगचुक

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 22 , 2017 , 15:51 IST | लद्दाख

3 इडियट्स फिल्म के फुंसुख वांगड़ू को तो आप जानते ही होंगे। दरअसल यह किरदार काल्पनिक नहीं, बल्कि लद्दाख के रहने वाले इंजिनियर सोनम वांगचुक से प्रेरित था। 3 इडियट्स में आमिर खान ने इन्हीं के जीवन को फुंसुख वांगड़ू के रूप में जिया था। 

उत्तर भारत के जम्मू क्षेत्र में लद्दाख से सोनम वांगचुक, इस क्षेत्र में पानी की कमी से निपटने में मदद करने के लिए रेगिस्तान में कृत्रिम ग्लेशियरों को बना रहे हैं।  

Sonam-wangchuk-Ice-Stupa

लद्दाख क्षेत्र के लोग अपनी कृषि योग्य भूमि को सिंचाई और ताजा पेयजल प्रदान करने के लिए बर्फ और हिमसंहारी बर्फ पिघलने पर भरोसा करते हैं।

वांगचुक ने कृत्रिम ग्लेशियरों को बनाने के लिए पाइप, गुरुत्वाकर्षण और ठंडे तापमान का उपयोग किया है जिससे उन्हें उम्मीद है कि इससे सूखे परिदृश्य में बदलाव होगा ।

सोनम ने लद्दाख में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए 'आइस पिरामिड' बनाया है जिससे यहां लंबे समय के लिए पानी स्टोर किया जा सके। इस पिरामिड से लद्दाख में पानी की कमी और सिंचाई की मुश्किलों से पार पाया जा सकता है।

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सोनम द्वारा बनाया गया आइस पिरामिड 

वांगचुक ने 2014 में बौद्ध पूजा में उपयोग किए जाने वाले टॉवरों पर आधारित अपनी बर्फ स्तूप परियोजना शुरू की।

वांगचुक ने बताया कि वह किस मकसद से और कैसे लोगों के हित में काम करते हैं या उसकी प्लानिंग करते हैं। वह पद्मश्री और रिटायर्ड सिविल इंजिनियर शेवांग नॉर्फेल से प्रेरित हैं, जिन्होंने लद्दाख के बाशिंदों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृत्रिम ग्लेशियर तैयार करने के आ​ईडिया हकीकत में तब्दील कर दिखाया था।

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हालांकि, सोनम से इससे एक कदम आगे निकलकर नया विकल्प निकाला है। उन्होंने 'आइस पिरामिड प्रॉजेक्ट' के तहत एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिससे कि स्थानीय लोगों की पानी की जरूरत को पूरा किया जा सके। पानी की किल्लत से जूझते क्षेत्र में यह आइडिया किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो रहा है। उन्होंने वर्टिकल आइस पिरामिड बनाए ताकि इनमें पानी को लंबे वक्त के लिए स्टोर किया जा ​सके। यह हर एक पिरामिड औसतन 35 से 40 मीटर ऊंचा है और इसमें एक वक्त पर तकरीबन 16 हजार क्यूबिक लीटर पानी स्टोर किया जा सकता है। इतने पानी से 10 ​हेक्टेयर जमीन को सींचा जा सकता है।

उन्होंने ऐसे लगभग 100 पिरामिड लद्दाख में तैयार किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस सिस्टम में ऐसा विकल्प भी तैयार किया है जिससे कि ग्लेशियर धूप में तेजी से नहीं पिघलता है। सोनम वांगचुक के इस नेक प्रयास से न सिर्फ स्थानीय लोगों को सिंचाई में मदद मिली बल्कि वहां इसके ज़रिए 500 से अधिक नए पेड़ भी लगाए जा चुके हैं।

सोनम पानी की कमी से जूझते लेह के युवा और किसान की हरसंभव मदद करने की ​कोशिश करते हैं। लद्दाख में बीते 20 वर्षों से शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे सोनम वांगचुक को हाल ही में प्रतिष्ठित पुरस्कार 'रोलेक्स अवॉर्ड' से नवाजा गया। मूल रूप से इंजिनियर सोनम को यह पुरस्कार लोगों के जीवन स्तर को बेहतर करने और विश्व संस्कृति को बचाने के लिए दिया गया है। इस अवॉर्ड को हासिल करने के बाद सोनम ने कहा कि,'यह अवॉर्ड मेरे लिए नहीं, भारत के लिए है।'

सोनम वांगचुक की यह एकमात्र उपलब्धि नहीं है। वह 1990 के दौर से लद्दाख के युवाओं की बेहतर शिक्षा के मकसद से लगातार सेक्मॉल (स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख) एनजीओ का भी संचालन कर रहे हैं। उन्होंने यहां के बच्चों के एजुकेशनल लेवल को सुधारने के लिए राज्य सरकार और ग्रामीणों की भी मदद ली। इसके माध्यम से वह बच्चों को पहाड़ी क्षेत्र में फाइनैंस के अवसर कैसे खुलें, इसके बारे में भी ट्रेनिंग देते हैं। वह उनको खेती-किसानी, व्यापार आदि के बारे में भी जानकारी देते हैं ताकि बच्चे अपने भविष्य के रास्ते अपनी रुचि के हिसाब से खोल सकें।

आपको बता दें कि लद्दाख हिमालय के उत्तरी पहाड़ों की बेल्ट में बसा एरिया है जहां 2,500 से 4,000 फीट तक की ऊंचाई पर गांव बसे हैं। यहां के लोगों के लिए पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। इसके साथ ही पिघलते हिमालयन ग्लेशियर भी यहां की आबादी के लिए खतरा हैं। सर्दियों में तो यहां का पारा कई बार माइनस 30 डिग्री तक जा पहुंचता है।


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