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देश में 2 Cr से ज़्यादा बेटियां हैं जिन्हें उनके माता-पिता जन्म नहीं देना चाहते थे: आर्थिक सर्वे

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 30 , 2018 , 14:10 IST

देश में लगभग दो करोड़ 10 लाख बेटियां ऐसी हैं जिन्हें उनके माता-पिता जन्म नहीं देना चाहते थे। यानी उनके माता-पिता को चाहत तो बेटे की थी लेकिन उसकी जगह अनचाही बेटियों का जन्म होता गया। देश में पहली बार अपनी तरह का यह आकलन सामने आया है. वह भी सरकारी स्रोत से।

सरकार ने अमेरिकी शोध को बनाया इकोनॉमिक सर्वे का आघार

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2017-18 के आर्थिक सर्वेक्षण में यह आकलन शामिल किया गया है और इसके लिए अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर सीमा जयचंद्रन के अध्ययन और शोध पत्रों को आधार बनाया गया है। सीमा इस यूनिवर्सिटी में विकास अर्थशास्त्री हैं। उनके शोध पत्र 2017 में प्रकाशित किए गए हैं। शोध पत्रों के अनुसार भारत में 0 से 25 साल तक की जितनी बेटियां हैं उनमें अधिकांश ‘सन मेटा प्रिफ़रेंस’ का नतीज़ा हैं।

जब तक बेटा न हो लोग संतान को जन्म देते रहते हैं

यानी वे बटियां जिनका जन्म बेटों की चाहत की वज़ह से होता गया। इस अध्ययन के लिए एसआरएलसी (सेक्स रेसियो ऑफ लास्ट चाइल्ड यानी आख़िरी बच्चा लड़का है या लड़की) के मानदंड को आधार बनाया गया था। इससे यह बात स्पष्ट हुई कि भारत में अब भी अधिकांश माता-पिता तब तक संतानों को जन्म देते रहते हैं जब तक उनके यहां बेटा नहीं हो जाता। कई बार तो एक से अधिक बेटे की चाहत में ही कई-कई बेटियों का जन्म होता रहता है।


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