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अगली पीढ़ी को सिर्फ तस्वीरों में दिखेंगी ये 5 जनजातियां, जानिए क्यों हो रही हैं विलुप्त?

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 3 , 2017 , 20:02 IST | नई दिल्ली

हम विकास और आधुनिकता की दौड़ में इतना आगे निकल चुके हैं कि हज़ारों सालो से हमारी हम क़दम कुछ जनजातियाँ विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुकी हैं।

अकुंतसु

ब्राज़ील में इस लुप्त होती जनजाति के मात्र 5 लोग ही जीवित बचे हैं। 1980 तक अकुंतसु उत्तर पश्चिमी ब्राज़ील में शांति से रहते थे इनकी संख्या हज़ारों में थी। यह जनजाति शिकार और खेती से अपना जीवन ज्ञापन करते थे, लेकिन वक़्त बदला और औद्योगिक विकास के नाम पर नरसंहार हुआ और इस जनजाति का सफ़ाया कर दिया गया।

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जारवा

अंडमान निकोबार की यह जनजाति की संख्या अब बस 200- 300 के बीच में ही रह गयी है। यह जनजाति 1998 तक बाहरी दुनिया के सम्पर्क में नहीं आयी थी। बाहर की दुनिया से इन्हें सम्पर्क रास नहीं आया इस सम्पर्क की बदौलत दो बार जारवा जनजाति मीजल्स की चपेट में आ गयी।  इस के बाद भारत सरकार ने कड़े क़दम उठाये हैं इस जनजाति का दुनिया से सम्पर्क रोकने के लिए, मगर वक़्त का पहिया लगातार घूम रहा है, अगर हम इन्हें बचा ना पाएँ तो अपनी आने वाली पीढ़ीयों को धरोहर नहीं तस्वीरें ही दिखा पायेंगे।

Jarawa

नुकाक माकू

कोलंबिया की इस जनजाति की आबादी 420 रह गयी है। पहले उपनिवेशी ताक़तों और फिर सरकार और विद्रोहियों के बीच फैले गृहयुद्ध ने नूक्क जनजाति को शरणार्थी कैंप और इधर उधर धक्के खाना पड़ रहे हैं। अब ये 420 की जनसांख्या तक ही सीमित रह गये हैं।

Coloambia

क्रिउन जनजाति


कंबोडिया में यह जनजाति आज विलुप्ति की कगार पर खड़ी है। इस जनजाति के अब केवल 110 लोग ही रह गये है खेमेर काल में इस जनजाति को अपनी भाषा बोलने की सज़ा मिली थी। 1970 के दशक में हुए नरसंहार के कारण इनसे इनका घर,संस्कृति और सभ्यता भी छीन ली गयी है। देखना की बात अब ये होगी कि ये ख़ुद को कब तक बचाए रखेंगे या नए दौर की बलि चढ़ जाएँगे।

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लिवोनियन्स


लातिविया की ये 4000 साल पुरानी जनजाति आज केवल 200 लोगों की जनसंख्या बन कर रह गयी है। ये मछुआरे हैं। लैट्वीयन सरकार लिव संस्कृति को बचाने का भरसक प्रयास कर रही है।

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