ओपिनियन

सिर्फ 2 जवानों का नहीं हमारे आत्मसम्मान का सर कलम हुआ है मोदी जी!

icon कुलदीप सिंह | 0
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| मई 1 , 2017 , 18:46 IST | नई दिल्ली

नए हफ्ते और महीने की शुरुआत फिर एक मनहूस ख़बर से हुई है, हर वतन परस्त के दिलो दिमाग पर गुस्सा छाया हुआ है। जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाके में कृष्णा घाटी सेक्टर में पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम लाइन ऑफ कंट्रोल के भीतर 200 मीटर तक घुस आई और दो भारतीय जवानों की हत्या कर दी।

यूं तो भारत पाकिस्तान सीमा पर आए दिन गोलीबारी होती है, दोनों तरफ के सैनिक और नागरिक अपनी जान गंवाते हैं लेकिन जब पाकिस्तान के सैनिक और अर्धसैनिक बल शहीदों के शव से साथ हैवानियत करते हैं तो हर हिन्दुस्तानी का खून खौल उठता है।

इस बार भी पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम ने फौज और बीएसएफ के दो जवानों की हत्या के बाद उनके शव क्षत-विक्षत कर दिए। मुमकिन है ये कार्रवाई कर बॉर्डर एक्शन टीम ने अपने हुक्मरानों को ये जताने की कोशिश की हो कि भारतीय सेना की तरह वो भी सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं। दुश्मन की सरहद में जाकर कार्रवाई कर सकते हैं लेकिन भारत में मौजूद हर शख्स इसे नामर्दानगी समझता है। जंग में सैनिक शहीद होते हैं लेकिन दुश्मन की मौत के बाद उसके शव के साथ दुनिया की कोई फौज बर्बरता नहीं करती। शवों की चीरफाड़ कर खीझ निकालने की ये नपुंसक परंपरा पाकिस्तानी फौज और उसकी सरपरस्ती में पलने वाले अर्धसैनिक बल ही निभाते हैं।

हिन्दुस्तान भी पाकिस्तान के सैनिकों को गोली मार चुका है, आए दिन कश्मीर में आस्तीन के सांप यानी आतंकी मारे जाते हैं लेकिन हमारी फौज लाशों की आंखे या सिर काटकर मर्द होने का दावा नहीं करती।

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ऐसा लगता है कि सोमवार को हुई पाकिस्तान की कार्रवाई का खाका रविवार को ही बना लिया गया था, पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष ने एलओसी का दौरा कर भारतीय सेना पर बिना वजह फायरिंग करने का आरोप लगाया था। दरअसल ये इशारा था जिसे बखूबी अंजाम दिया गया।

शहीद हेमराज, मनदीप, नायब सुबेदार परमजीत सिंह और बीएसएफ कांस्टेबल प्रेम सागर पाकिस्तान की नपुंसक सोच पर अपने सर न्योछावर करने वाले जवानों की फेरहिस्त बढ़ती जा रही है। सवाल ये है कि अब हमारी फौज को क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट कहते हैं सर्जिकल स्ट्राइक करके भारतीय सेना सिर्फ आतंकी मारती है हम पाकिस्तानी फौज को कुछ खास नुकसान नहीं पहुंचा पाते। इस बार पाकिस्तान की नापाक फौज को सबक सिखाया जाना जरूरी है।

इसे आप संयोग कहेंगे या विडंबना...पाकिस्तान को अपना दोस्त समझने वाले तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन भारत के दौरे पर हैं। कल ही उन्होने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए तुर्की को आमंत्रित करने का सुझाव मोदी जी को इशारो इशारों में दे दिया। भारत और तुर्की आपस में सहयोग बढ़ाने के लिए व्यापारिक समझौते कर रहे हैं। क्या एर्दोगन के दौरे के दौरान कश्मीर विवाद को अंतराष्ट्रीय पटल पर फिर से सुर्खियां दिलाने के लिए पाकिस्तान ने वहशीपन दिखाने की जुर्रत की है? मुमकिन है ऐसा ही हुआ हो.....

मोदी जी ने साल 2015 में कश्मीरियों के विकास के लिए 80,000 करोड़ के पैकेज की घोषणा की थी, हाल ही में महबूबा मुफ्ती दिल्ली आकर आपके हमारे टैक्स की गाढ़ी कमाई से 19000 करोड़ का एकस्ट्रा पैकेज लेकर चली गईं। कश्मीर पर हिन्दुस्तान का रुपया ऐसे बहाया जा रहा है जैसे झेलम और चेनाब में पानी बह रहा है। इस पर भी राज्य सरकार सूबे में पत्थरबाजी बंद करवाने का आश्वासन तक नहीं दे पाती।

जहन मे कई सवाल उबल रहे हैं

देश जानना चाहता है कि आखिर कश्मीर और पाकिस्तान पर मोदी सरकार की पॉलिसी है क्या? लाखों भारतीयों के गुस्से को शांत करने के लिए मोदी सरकार क्या करेगी? क्या हमारी फौज को खुली छूट दी जाएगी?

पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम ने सिर्फ दो भारतीय जवानों के शव क्षत विक्षत नहीं किए हैं बल्कि पूरे भारत के आत्म सम्मान का सर कलम कर दिया है। मुझे और पूरे देश को हमारे मजबूत प्रधानमंत्री से उम्मीद है कि वो इस आत्म-सम्मान को वापस लौटाएंगे, छोटी ही सही लेकिन उम्मीद है कि अब देश के जवान सर नहीं कटवाएंगे। 


Amarjawan