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दलाई लामा का चीन को दो टूक जवाब, बोले- भारत नहीं करता मेरा कूटनीतिक इस्तेमाल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 5 , 2017 , 14:30 IST | बीजिंग

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा के अरूणाचल प्रदेश दौरे पर चीनी मीडिया ने एक बार फिर भारत पर हमला बोला है। चीनी मीडिया ने पुराना राग अलापते हुए कहा है कि भारत दलाई लामा का इस्तेमाल कर रहा है और चीन विरोधी उसकी गतिविधियां एक कूटनीतिक पैंतरा है।

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चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया है कि दलाई लामा धर्म की आड़ में चीन के खिलाफ पृथकतावादी गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। दलाई लामा को संवेदनशील क्षेत्र में आमंत्रित करने से भारत और चीन के रिश्ते बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

चीन के आरोप का जवाब देते हुए आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने ये स्पष्ट किया कि भारत ने कभी भी मेरा इस्तेमाल चीन के खिलाफ नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई मुझे दानव समझता है तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

अब से एक महीने पहले चीन ने 81 वर्षीय दलाई लामा के अरूणाचल दौरे को लेकर भारत से आपत्ति जताई थी और अरूणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा किया था।

लेख में आगे कहा गया है कि चीन ने इस मसले पर अपनी आवाज उठाई थी लेकिन भारत ने कहा था कि चीन उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे। यह बेतुका है।
गौरतलब है कि दलाई लामा की तवांग यात्रा को लेकर चीन की आपत्ति करने पर भारत ने मंगलवार को कड़े तेवर दिखाए।

भारत ने चीन से कहा था कि वह हमारे अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करे क्योंकि अरूणाचल प्रदेश हमारा अभिन्न हिस्सा है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने कहा था कि दलाई लामा की अरूणाचल यात्रा पूरी तरह धार्मिक है और इसका कोई राजनीतिक तात्पर्य नहीं निकाला जाना चाहिए।

चीन की नाराजगी कोई नई बात नहीं

भारत में निर्वासित जीवन जी रहे तिब्बती अध्यात्मिक नेता दलाई लामा पहले भी अरुणाचल प्रदेश की यात्रा कर चुके हैं। तब भी चीन ने ऐसी नाराजगी जताई थी। बीजिंग की नाराजगी जताना कोई नई बात नहीं हैं। नई दिल्ली ने साफ किया है कि चीन को भारत की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि,

भारत वन-चाइना पॉलिसी का सम्मान करता है। हम चीन से भी ऐसे ही पास्परिक रुख की उम्मीद करते हैं

चीन दलाई लामा को अलगाववादी मानता है

उनकी अरुणाचल यात्रा का विरोध करते हुए चीन ने कहा कि भारत को सीमा विवाद को और जटिल बनाने से बचने के लिए इस तरह के कदमों के दूर रहना चाहिए।

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नई दिल्ली ने इसके जवाब में कहा कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता का दौरा धार्मिक है, उसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

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चीन अरुणाचल प्रदेश के तवांग पर करता है दावा

चीन को लगता है कि दलाई लामा और अन्य प्रभावशाली हस्तियों की अरुणाचल यात्रा के जरिये भारत पूर्वोत्तर के राज्य में अपना दावा मजबूत कर रहा है। बीजिंग अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके को पूर्वी तिब्बत कहता है और इसी आधार पर उस पर अपना दावा जताता है।

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सन 1959 में तिब्बत में चीनी सेना के खिलाफ हुए विद्रोह के दौरान दलाई लामा तवांग के रास्ते ही भागकर भारत आए थे। तब से वह भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। कई दशकों तक उन्होंने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला शहर से तिब्बत की निर्वासित सरकार भी चलाई।

तवांग को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ने का भी चीन कर रहा है विरोध

इस बीच भारत के तवांग को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी बना रहा है। बीजिंग इसका भी विरोध कर रहा है। चीन पूरी दुनिया से वन चाइना पॉलिसी का सम्मान करने को कहता है। इसके तहत ज्यादातर देश तिब्बत को चीन का हिस्सा मानते हैं। वहीं भारत का तर्क साफ है कि अगर चीन वन-चाइना पॉलिसी का सम्मान चाहता है तो उसे दूसरे देशों की संप्रभुता का भी सम्मान करना होगा।

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