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छोटे से किसान से कामयाबी के शिखर पुरुष बनने की कहानी (जन्मदिन विशेष- ओ पी जिंदल)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| अगस्त 7 , 2017 , 09:37 IST | नयी दिल्ली

देश के महान उद्योगपति, समाजसेवी, जननेता और 'मैन ऑफ स्टील' कहे जाने वाले ओम प्रकाश जिंदल का आज जन्मदिन है। कहते हैं कि बचपन से ही ओपी जिंदल का मन मशीनों और तकनीकी कामों में ज्यादा लगता था। ओपी जिंदल का जन्म हरियाणा के हिसार जिले के छोटे से गांव नलवा में 7 अगस्त 1930 को हुआ था।

ओपी जिंदल के पिता नेतराम जिंदल एक किसान थे और माता चंद्रावली घरेलू महिला थीं। ओपी जिंदल की प्रारंभिक शिक्षा हरियाणा में ही हुई। 22 साल की छोटी सी उम्र में ओपी जिंदल ने व्यापार करना शुरू कर दिया। इसी के तहत हरियाणा के हिसार में उन्होंने बाल्टी बनाने की एक यूनिट स्थापित की। शुरुआती चुनौतियों और कड़ी मेहनत के बाद साल 1964 में उन्होंने एक पाइप यूनिट खोली। इसी के साथ उन्होंने 'जिंदल इंडिया लिमिटेड' की स्थापना की।

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कम उम्र में कारोबार शुरू करने वाले ओपी जिंदल ने 1969 में जिंदल स्ट्रीप्स लिमिटेड नाम से एक बड़ा कारखाना खोला। टाटा और कलिंग के बाद, भारत में अपनी तरह की ये तीसरी फैक्टरी थी। किसान से सफल उद्योगपति बनने वाले ओम प्रकाश जिंदल कठिन परिश्रम, निष्ठा और सच्चाई के लिए विख्यात थे। इसी वजह से 2004 में बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने स्टील के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया था।

सफल उद्योगपति होने के साथ-साथ ओपी जिंदल सच्चे देशभक्त और समाजसेवी भी थे। उद्योग में अपार सफलता पाने के बावजूद वे साधारण व्यक्तित्व वाले जमीन से जुड़े इंसान थे। उन्होंने समाज के कमजोर, पिछड़े और दलित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई प्रेरणादायक योजनाएं शुरू की। जनसेवा के कामों के लिए उन्होंने कई पहल की और स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास की सुविधाओं के विस्तार में योगदान दिया।

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जनसेवा के कामों को आगे बढ़ाने के मकसद से ओपी जिंदल ने समाज को लाभ देने वाली योजनाओं की शुरुआत की। ओपी जिंदल ने अपने पिता नेतराम जिंदल और माता चंद्रावली जिंदल के नाम से एनसी जिंदल चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। इस ट्रस्ट के तहत हरियाणा के हिसार में 500 बेड वाला अस्पताल चलाया जा रहा है। जहां गरीबों का मुफ्त इलाज किया जाता है। हिसार में ही विद्या देवी जिंदल नाम से एक रेजिडेंशियल स्कूल भी है। 40 एकड़ में लड़कियों के लिए बने इस स्कूल में 12वीं कक्षा तक की शिक्षा दी जाती है। वहीं दिल्ली के एनसी जिंदल पब्लिक स्कूल में करीब 4 हजार छात्र पढ़ते हैं।

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ये उनकी देशभक्ति और समाज सेवा का ही जज़्बा था जिसके चलते वो राजनीति में भी आए और अपने राज्य और देश को आगे बढ़ाने के काम में जुट गए। 1991 में पहली बार वे विधायक चुने गए। 1996 में हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर कुरुक्षेत्र से लोकसभा का चुनाव जीता। जिसके बाद केंद्र में अटल बिहारी वाजपयी के नेतृत्व में बनने वाली गठबंधन सरकार को अपना समर्थन देकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2005 में तीसरी बार हिसार से विधायक के लिए खड़े हुए और बड़ी जीत हासिल की और प्रदेश में ऊर्जा मंत्री की जिम्मेदारी निभाई। बतौर ऊर्जा मंत्री उनका सपना था कि हरियाणा और पूरे देश में बिजली पानी की तरह बहें।

राजनीति में ओपी जिंदल की छवि पाक साफ जननेता की रही। राजनीति और जनसेवा करते हुए वे लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे, लेकिन 31 मार्च 2005 को एक हेलिकॉप्टर हादसे में वो इस दुनिया से रूखसत हो गए।

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उनके जाने के बाद उनकी औद्योगिक विरासत को आगे बढ़ाया उनकी पत्नी सावित्री जिंदल और चार बेटों ने। उनके चारों बेटे पृथ्वीराज जिंदल, सज्जन जिंदल, रतन जिंदल और नवीन जिंदल उनके खड़े किए गए बिजनेस अंपायर को बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं। ओपी जिंदल उद्योग समूह का मुख्य व्यवसाय स्टील से संबंधित रहा है, फिर भी उसे 5 वर्गों-पाइप्स, कार्बन स्टील,स्टेनलेस स्टील, रेल और ऊर्जा में बांटा जा सकता है। अपने पिता ओपी जिंदल के नक्शे कदम पर चलते हुए सभी बेटों ने अपने पिता की विरासत को संभाल रखा है। आज उद्योग जगत में ओपी जिंदल के चारों बेटों का नाम देश के बड़े उद्योगपतियों में शुमार है। सभी देश के औद्योगिक और सामाजिक विकास में बढ़चढ कर अपना-अपना योगदान दे रहे हैं।

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ओपी जिंदल ग्रुप देश के अग्रणी कारोबारी घरानों में शामिल है। फोर्ब्स मैग्जीन की जुलाई 2017 में आई रिपोर्ट के मुताबिक ओपी जिंदल समूह की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल भारत की सबसे अमीर महिला में शुमार हैं। ओपी जिंदल के सपने को साकार करने में उनका परिवार पूरी शिद्दत से जुटा है और यही वजह है कि संसार से रुखसत होने के बाद भी ओपी जिंदल अपने कार्यों की वजह से हम सब के बीच आज भी अपने विचारों की वजह से जीवित है। 

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कुछ लोग जन्म से ही महान पैदा होते हैं, और कुछ लोग अपनी मेहनत के बलबूते पर अपने कर्म की बदौलत महान बनते हैं। ऐसे लोग भावी पीढ़ी के लिए छोड़ जाते हैं, एक आदर्श की छाप जिसे अपनाकर दूसरे लोग भी अपने जीवन में असीम सफलता हासिल करते हैं। स्वर्गीय ओम प्रकाश जिंदल, जिन्हें लोग प्यार से 'बाऊजी' पुकारते थे ऐसी ही शख्सियत थे।

देखिये ओ पी जिंदल के संघर्ष और कामयाबी की पूरी कहानी:


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