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कुलभूषण जाधव की 'जिंदगी' के लिए भारत ने ICJ के सामने लिखित दलीलें पेश की

ललिता सेन, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 14 , 2017 , 11:25 IST | नई दिल्ली

भारत ने कुलभूषण जाधव मामले में बुधवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के समक्ष अपना मजबूती से पक्ष रखते हुए लिखित दलीलें पेश कीं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने जाधव केस में पाकिस्तान की तरफ से विएना संधि उल्लंघन को लेकर अपना लिखित पक्ष आईसीजे में पेश किया है।आईसीजे भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण के मामले की सुनवाई कर रहा है।

भारत ने बुधवार को कहा कि जाधव केस में राजनियक संबंधों पर वियना सम्मेलन 1963 का पाकिस्तान द्वारा गंभीर उल्लंघन किया है। पाकिस्तान ने बार बार अनुरोध के बावजूद जाधव तक राजनयिक पहुंच की इजाजत नहीं दी थी।

कुलभूषण जाधव फिलहाल पाकिस्तान की कैद में हैं। कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगाया है। जाधव के खिलाफ भारत ने आईसीजे में शरण ली है। बता दें कि, आईसीजे ने मामले में अंतिम फैसला आने तक जाधव की फांसी पर 18 मई को रोक लगा दी थी।

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दरअसल भारतीय नौसेना के अधिकारी रह चुके 47 साल के जाधव को पाकिस्तान में मौत की सजा सुनाई गई थी। पाकिस्तान की सेना ने बीते अप्रैल में एक गुप्त सैन्य मुकदमे में जाधव को जासूसी और आतंकवाद का दोषी ठहराया था। कुलभूषण को पिछले साल अरेस्ट किया गया था।

पिछले 4 महीने पहले हुई सुनवाई में जाधव की पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाए जाने के खिलाफ याचिका पर भारत को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में बड़ी जीत मिली थी। इंटरनेशनल कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाए जाने तक जाधव की फांसी पर रोक लगाए रखने का आदेश दिया था। ICJ के जज जस्टिस रॉनी अब्राहम ने फैसला सुनाते हुए कहा कि उसे जासूस बताने वाला पाकिस्तान का दावा नहीं माना जा सकता। पाकिस्तान ने कोर्ट में जो भी दलीलें दीं, वह भारत के तर्क के आगे कहीं नहीं ठहरतीं हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि वियना संधि के तहत भारत को कुलभूषण जाधव तक कॉन्सुलर एक्सेस मिलना चाहिए। अब्राहम ने कहा कि जाधव की गिरफ्तारी विवादित मुद्दा है।

पिछली सुनवाई के दौरान आईसीजी ने जाधव की फांसी पर रोक के साथ ही पाकिस्तान से काउंसलर एक्सेस देने को भी कहा था, लेकिन पाकिस्तान ने कोर्ट का ऑर्डर नहीं माना। इसके बाद 2 जुलाई को पाकिस्तान ने जाधव को काउंसलर एक्सेस देने के लिए की गई भारत की अर्जी फिर खारिज कर दी थी। पाकिस्तान अब तक 17 अर्जियां खारिज कर चुका है।

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बता दें कि, भारत की तरफ से इंटरनेशनल कोर्ट में सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने 8 मई को पिटीशन दायर की थी। भारत ने यह मांग की थी कि भारत के पक्ष की मेरिट जांचने से पहले जाधव की फांसी पर रोक लगाई जाए। हरीश साल्वे ने कुलभूषण जाधव का केस लड़ने की फीस महज एक रुपये ली। साल्वे को भारत सरकार ने इंटरनेशनल कोर्ट में देश का पक्ष रखने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी।

पाकिस्तान का दावा है कि उसने कुलभूषण जाधव को पिछले साल मार्च में बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया है। वहीं भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से गिरफ्तार किया गया जहां उसके व्यापारिक हित हैं।


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