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भारत ने दिखाई ताकत, बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस के लैंड अटैक वर्जन का टेस्ट सफल

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 21 , 2017 , 17:51 IST | नई दिल्ली

भारतीय नौसेना ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के लैंड अटैक वर्जन का शुक्रवार को टेस्ट किया, जो बेहद कामयाब रहा। ब्रह्मोस को जमीन से, पनडुब्बी या पानी के जहाज से या विमान से भी छोड़ा जा सकता है। इसे पनडुब्बी से दागने के लिए दो सफल टेस्ट पहले किए जा चुके हैं।
नौसेना के एक अधिकारी के मुताबिक ,


हम जैसा चाहते थे, टेस्ट के नतीजे वैसे ही मिले हैं, यह टेस्ट बंगाल की खाड़ी में किया गया।

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चीन सीमा पर है ब्रह्मोस की तैनाती 

भारत ने इस मिसाइल को अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी सीमा पर तैनात किया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने इस पर एतराज भी जताया था। पीएलए ने अपने माउथ पीस ‘पीएलए डेली’ में लिखा था कि इससे बॉर्डर पर खतरा पैदा होगा।

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न्यूक्लियर वॉर हेड तकनीक से लैस है

ब्रह्मोस देश की सबसे मॉर्डन और दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है। दुनिया की कोई भी मिसाइल तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकती। यहां तक की अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल भी इस मामले में इसके आगे कमतर है।

ब्रह्मोस को लेकर चीन की घबराहट की सबसे बड़ी वजह इसका न्यूक्लियर वॉर हेड तकनीक से लैस होना है। यह 290 km दूरी तक के लक्ष्य को भेद सकती है। चीनी सेना का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर इनकी तैनाती के बाद उनके तिब्बत और युन्नान प्रांत पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि परमाणु हथियारों को लेकर भारत की नीति हमेशा से साफ रही है कि वह पहले परमाणु हमला नहीं करेगा और रिहायशी इलाकों में तबाही नहीं मचाएगा।


वायुसेना के बेड़े का है हिस्सा


भारतीय वायुसेना में शामिल सुखोई विमान ब्रह्मोस के साथ बेहद कामयाबी से उड़ान भर चुका है। भारतीय वायुसेना दुनिया की पहली ऐसी एयरफोर्स है, जिसके जंगी बेड़े में सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल शामिल है। भारत इसे सुखोई से दागने की तकनीक और बेहतर करने में जुटा है।


लक्ष्य के रास्ता बदलते ही यह भी बदल देती है रास्ता


ब्रह्मोस मेनुवरेबल तकनीक से लैस है। यानी दागे जाने के बाद यदि लक्ष्य रास्ता बदल ले तो यह मिसाइल भी अपना रास्ता बदल लेती है और हर हाल में उसे निशाना बनाती है।
दरअसल, दूसरे मिसाइल्स का लक्ष्य टैंक से दागे गए गोलों की तरह पहले से तय होता है और वे वहीं जाकर गिरती हैं। या फिर मिसाइल्स लेजर गाइडेड होती हैं, जो लेजर किरणों के आधार पर लक्ष्य को साधती हैं। मगर कोई लक्ष्य गतिशील हो तो उसे निशाना बनाना कठिन हो सकता है। यहीं मेनुवरेबल तकनीक काम आती है।


भारत-रूस का साझा प्रोजेक्ट है ब्रह्मोस


ब्रह्मोस को ब्रह्मोस कॉरपोरेशन द्वारा बनाया जा रहा है। यह कंपनी भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिशिया का ज्वॉइंट वेंचर है। ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। रूस इस प्रोजेक्ट में लॉन्चिंग टेक्नोलॉजी मुहैया करवा रहा है। इसके अलावा उड़ान के दौरान रूट गाइड करने की कैपेबिलिटी भारत ने डेवलप की है।


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