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कश्मीर के लिए खतरा हैं रोहिंग्या, अवैध शरणार्थियों की ख़ैर नहीं : राजनाथ

शाहनवाज़ ख़ान , ब्लॉगर | 0
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| सितंबर 13 , 2017 , 15:03 IST | जम्मू

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या मुसलमानों को जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है और उन्हें देश से बाहर करने के लिए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। कश्मीर के दौरे पर आये गृह मंत्री ने कहा कि हम ढाई दशक से आतंकवाद से जूझ रहे कश्मीर के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते हैं। लगभग 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान अवैध तरीके से भारत में शरण लिए हुए हैं।

''हम राज्य सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। अवैध तरीके से रहने वाले विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रोहिंग्या मुस्लिम जम्मू-कश्मीर के लिए खतरा हो सकते हैं, जो करीब 25 साल से आतंकवाद से लड़ रहा है। हम इससे समझौता नहीं कर सकते हैं। अवैध तरीके से देश में रहने वालों के लिए सरकार की नीति साफ है।''

कुछ दिनों पूर्व ही संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख जैद राद अल हुसैन रोहिंग्या मुसलमानों को भारत से वापस भेजने की मोदी सरकार की कोशिशों की निंदा की थी। अल हुसैन ने कहा था कि 'ऐसे वक्त में जब रोहिंग्या अपने देश में हिंसा का शिकार हो रहे हैं, तब भारत की ओर से उन्हें वापस भेजने की कोशिशों की मैं निंदा करता हूं, भारत के गृह राज्य मंत्री ने कथित रूप से बयान दिया है कि चूंकि भारत पर रिफ्यूजी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने वाला देश नहीं है इसलिए भारत इस मामले पर अंतर्राष्ट्रीय कानून से हटकर काम कर सकता है, लेकिन बुनियादी मानव करुणा के साथ।’ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के मुताबिक भारत का ये कदम अतंर्राष्ट्रीय कानूनों और प्रावधानों के विधिसंगत नहीं होगा।

http://www.khabarnwi.com/story/united-nations-criticise-narendra-modi-bjp-government

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त भारत में 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं इनमें से 16 हजार लोगों को संयुक्त राष्ट्र नें रिफ्यूजी का दर्ज़ा दिया है।

जैद राद अल हुसैन की टिप्पणी पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख के उस बयान पर भारत ने तीखा विरोध जताया है, जिसमें उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों के साथ कश्मीर के हालात व पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मुद्दे पर भारत पर प्रतिकूल टिप्पणी की हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजीव के चंदर ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत अपनी शर्तों पर शरण देगा, क्योंकि ये लोग सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं। 'भारत मानवाधिकार के लक्ष्यों को संतुलित फैसलों और तथ्यों की पड़ताल के साथ हासिल करना चाहता है। हमारी सरकार का नारा 'सबका साथ, सबका विकास' है, जो समग्र विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम देश के विकास में किसी भी नागरिक को पीछे नहीं रहने देना चाहते।' 

रोहिंग्या समुदाय का इतिहास

रोहिंग्या समुदाय 15वीं सदी के शुरुआती दशक में म्यांमार के रखाइन इलाके में आकर बस तो गया, लेकिन स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने उन्हें आज तक नहीं अपनाया है। म्यांमार में सैन्य शासन आने के बाद रोहिंग्या समुदाय के सामाजिक बहिष्कार को बाकायदा राजनीतिक फैसले का रूप दे दिया गया और उनसे नागरिकता छीन ली गई। साल 2012 में रखाइन में कुछ सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद रोहिंग्या और बौद्धों के बीच व्यापक दंगे भड़क गए. तब से म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा जारी है।


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