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कुलभूषण को बचाने के लिए भारत हर हद तक जाने को तैयार, संसद में बोले राजनाथ सिंह

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 11 , 2017 , 13:04 IST | नई दिल्ली

कुलभूषण जाधव को पाकिस्‍तान में फांसी दिए जाने का मुद्दा लोकसभा में जोर-शोर से उठा। सरकार की ओर से बोलते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत इस सजा की पुरजोर शब्‍दों में निंदा करता है। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत इस मसले पर किसी भी हद तक जाने को तैयार है। भारत कुलभूषण के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

उन्‍होंने कहा कि इस मामले में न्‍याय के सिद्धांतों की अनदेखी हुई है। कुलभूषण को बचाव के लिए वकील तक मुहैया नहीं कराया गया। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि कुलभूषण को अगवा कर पाकिस्‍तान में लाया गया।

उधर, राज्यसभा में इस मसले पर बोलते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने कहा कि पाकिस्‍तान ने एक बनावटी मामला खड़ा किया है। वास्‍तव में पाकिस्‍तान के पास कुलभूषण जाधव के खिलाफ कोई सुबूत नहीं है।

सुषमा ने कहा कि,

कुलभूषण ने कुछ भी गलत नहीं किया। यदि फांसी हुई तो भारत और पाकिस्‍तान के द्विपक्षीय संबंधों पर विपरीत असर पड़ेगा

सुषमा स्वराज ने यह भी कहा कि वह जाधव के परिवार के संपर्क में हैं। सात बार जाधव के माता-पिता से फोन पर बात कर चुकी हैं। उन्‍होंने सदन को भरोसा दिलाते हुए कहा कि,

कुलभूषण केवल अपने मां-बाप का बेटा नहीं है बल्कि वह पूरे हिंदुस्‍तान का बेटा है

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में कहा कि अगर जाधव को बचाया नहीं गया, तो यह सरकार की कमजोरी होगी। सरकार को कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर पाकिस्‍तान पर दबाव बनाना चाहिए। उन्‍हें बचाने के हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

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जाधव के मुद्दे पर लोकसभा में केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि कांग्रेस जाधव पर हल्‍की राजनीति कर रही है। जाधव के साथ हम सब खड़े हुए हैं। सभी लोगों को मिलकर जाधव को बचाना चाहिए।

लोकसभा में जाधव को फांसी की सजा सुनाए जाने के मुद्दे पर ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पाकिस्‍तान की सैन्य अदालत एक 'बनाना' अदालत है, जहां किसी नियम का पालन नहीं किया जाता।

किसी को भी बिना सबूतों के किसी को भी सजा सुना दी जाती है। भारत सरकार को इस मुद्दे पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि जाधव को सुरक्षित वापस लाया जा सके।

पाक सैन्य अदालत के खिलाफ डिमार्च जारी

बता दें कि भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को बुलाया और जाधव को मौत की सजा देने के लिए पाकिस्तानी सैन्य अदालत के खिलाफ एक डिमार्च जारी किया। इधर विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग को अदालत में जाधव की सुनवाई के बारे में भी सूचित नहीं किया गया था। मंत्रालय ने कहा कि पिछले साल ईरान से जाधव का अपहरण किया गया था और उनकी उपस्थिति पाकिस्तानी अधिकारियों ने कभी भी स्पष्ट नहीं की थी।

बता दें कि भारतीय नागरिक और पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई है। कुलभूषण पर पाकिस्तान आर्मी कानून के तहत मुक़दमा चलाया गया। पाकिस्तान लगातार ये दावा कर रहा है कि वो रॉ के एजेंट हैं। हालांकि भारत पहले ही साफ़ कर चुका है कि कुलभूषण रॉ एजेंट नहीं हैं।

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