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ये क्या हो रहा है 'प्रभु'? इंसानों के खाने लायक नहीं है रेलवे का खाना: CAG रिपोर्ट

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जुलाई 21 , 2017 , 13:12 IST | नई दिल्ली

ट्रेनों में और रेलवे स्टेशन पर आप जिस खाने को चाव से खाते हैं वो दरअसल इंसानों के खाने लायक है ही नही। शुक्रवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की संसद में पेश की गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूषित खाद्य पदार्थों, रिसाइकिल किया हुआ खाद्य पदार्थ और डब्बा बंद व बोतलबंद वस्तुओं का उपयोग उस पर लिखी इस्तेमाल की अंतिम तारीख के बाद भी किया जा रहा है। इसके अलावा, अनाधिकृत ब्रैंड की पानी की बोतलें बेची जा रही हैं।

जांच में यह भी पाया गया कि रेलवे परिसरों और ट्रेनों में साफ-सफाई का बिलकुल ध्यान नहीं रखा जा रहा। इसके अलावा, ट्रेन में बिक रहीं चीजों का बिल न दिए जाने और फूड क्वॉलिटी में कई तरह की खामियों की भी शिकायतें हैं। सीएजी और रेलवे की जॉइंट टीम ने 74 स्टेशनों और 80 ट्रेनों का मुआयना किया। ऑडिट में पाया गया कि ट्रेनों और स्टेशनों, कहीं भी साफ-सफाई नहीं रखी जा रही। ऑडिट रिपोर्ट में लिखा है, 'पेय पदार्थों को तैयार करने के लिए नल से सीधे अशुद्ध पानी लेकर इस्तेमाल किया जा रहा था। कूड़ेदान ढंके नहीं हुए थे और उनकी नियमित अंतराल पर सफाई नहीं हो रही थी। खाने की चीजों को मक्खी, कीड़ों और धूल से बचाने के लिए उन्हें ढंककर नहीं रखा जा रहा था। इसके अलावा, ट्रेनों में चूहे, कॉकरोच पाए गए।'

सीएजी ने अपने किये गए ऑडिट में पाया कि रेलवे की फूड पॉलिसी में लगातार बदलाव होने के वजह से यात्रियों को बहुत ज्यादा परेशानियां होती हैं। इसलिए रेलवे की फूड पॉलिसी यात्रियों के लिए हमेशा एक सवाल बनी रहती है। यात्री हमेशा कन्फ्यूज्ड रहते हैं कि ट्रेन की चाय-पानी और खानें की कीमत क्या हैं। इस तरह से मनमाने तैर पर यात्रिओं से एक्स्ट्रा पैसे चार्ज किये जाते हैं।

सीएजी के मुआयने के दौरान किसी भी ट्रेन में वेटरों और कैटरिंग मैनेजरों के पास बेची जाने वाली चीजों से जुड़ा मेन्यू और रेट कार्ड नहीं मिला। रिपोर्ट में लिखा है, 'खाने की चीजें तयशुदा से कम मात्रा में बेची जा रही थीं। अनाधिकृत कंपनियों के डिब्बाबंद पानी की बोतलें बेची जा रही थीं।' इस बात का भी जिक्र है कि रेलवे परिसरों में ओपन मार्केट की तुलना में ज्यादा कीमत पर चीजें बेची जा रही थीं।

इसके अलावा, यह भी लिखा है कि भारतीय रेल प्रशासन जरूरी बेस किचन, ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीनें जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावशाली कदम उठाने में नाकाम रहा। रिपोर्ट में लिखा है, 'सात रेलवे जोन्स में कैटरिंग सर्विस के लिए प्रावधानों का ब्लूप्रिंट ही नहीं तैयार किया गया।'


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