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चीन कर रहा है हमारी जासूसी, भारतीय समुद्री क्षेत्र में देखी गईं चीनी युद्धपोत

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 4 , 2017 , 16:32 IST | गंगटोक

सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर तेज हुई जुबानी जंग और सीमा पर सेना के बीच हुई तनातनी के बीच खबर आ रही है कि हिंद महासागर के भारतीय समुद्री क्षेत्र में चीन के युद्धपोत और पनडुब्बी दिखे हैं। भारतीय नौसेना समुद्री सीमा पर लगातार चौकसी बढ़ाए हुई है और इंडियन नेवी को संभावित किसी भी खतरे से निपटने के लिए अलर्ट भी कर दिया गया है।

इंडियन नेवी की सेटेलाइट GSAT-7 ने चीनी पोत को घूमते देखा है

बता दें कि पिछले दो महीनों में भारत के नेवल सैटलाइट रुकमिनी (जीसैट-7) ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में कम से कम 13 चीनी नौसेना पोतों को घूमते देखा है। सूत्रों के मुताबिक इनमें आधुनिक लुयांग-3 भी शामिल है जो मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता रखता है।

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साथ ही युआन क्लास की एक पनडुब्बी भी यहां देखी गई है। इस क्षेत्र में दाखिल होने वाली यह 7वीं पनडुब्बी है। दिसंबर 2013 से लेकर अब तक चीन कभी परमाणु पनडुब्बी तो कभी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी को बारी-बारी से यहां तैनात करता रहा है।

चीन का जासूसी पोत भी देखा गया है सीमा में

चीनी युद्धपोतों को तीन साल पहले 2013-14 में भारतीय समुद्री क्षेत्र में देखा गया था। उसके बाद से चीनी युद्धपोतों की गतिविधियां इस इलाके में बढ़ती चली गईं। गौरतलब है कि चीन का जासूसी पोत (हाईविशिंग) भी पिछले सप्ताह भारतीय समुद्री इलाके में घुस आया था।

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बताया जाता है कि इसे बंगाल की खाड़ी में भारत-अमेरिका-जापान के नौसेना अभ्यास 'मालाबार' की जासूसी करने के मकसद से भेजा गया है जो अगले सप्ताह से शुरू हो रहा है।

डोकलाम में पीछे हटने को राजी नहीं चीन

उधर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने सोमवार को कहा कि भारत-चीन की सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित है और भारतीय सैनिक चीन की सीमा में दाखिल हुए हैं। डोकलाम में दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटने को राजी नहीं हैं, जो कि दरअसल भूटान का इलाका है, लेकिन चीन यहां सड़क बनाना चाहता है। इस बीच मामले को राजनयिक स्तर पर सुलझाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

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एक सूत्र ने कहा, 'इस मसले का समाधान कूटनीतिक तरीके से ही होगा। दोनों सेनाओं फिलहाल 'इंतजार करो और देखो' की नीति पर चल रही हैं। भारत और भूटान की मांग को देखते हुए चीन को फिलहाल यथास्थिति बहाल करनी चाहिए जो कि चीन की वजह से बदली है।'

 

 

 


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