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दुनिया में सबसे ज्यादा बाघ भारत में हैं फिर क्यों मंडरा रहा अस्तित्व पर खतरा?(टाइगर स्पेशल)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 29 , 2017 , 15:59 IST | नयी दिल्ली

बाघों के लिए आज का दिन बेहद खास है। आज भारत समेत पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जा रहा है। बाघों के लिए सबसे चिंता का विषय है उनकी संख्या का कम होना। 

बाघों की घटती हुई संख्या को देखकर पूरी दुनिया के लोग चिंतित हुए और सभी देशों ने सहमति बनाकर 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में इंटरनेशनल टाइगर डे की शुरुआत की तभी से हम हर साल 29 जुलाई को टाइगर डे मनाते हैं।

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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अनुसार पूरे विश्व के 97 प्रतिशत बाघ खत्म हो चुके हैं और दुनियाभर में महज 3890 बाघ ही बचे हैं। जिसमें सबसे अधिक संख्या भारत में है जो पूरे विश्व की 70 फीसदी है। जुलाई 2016 में हुई गणना के अनुसार अकेले भारत में 2500 टाइगर बचे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क में 408 टाइगर हैं। हर साल भारत में 25 से 50 टाइगर मार दिए जाते हैं।

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इनकी संख्या कम होने के कई कारण हैं। जैसे जंगलों का धीरे-धीरे खत्म होना, ग्लोबल वार्मिंग, लगातार शिकार करना बाघों की तेजी से घटती संख्या को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है, नहीं तो ये खत्म हो जाएंगे। बाघ एक तरह का जंगलों में रखा खुला सोना है। तस्कर इन बाघों का शिकार करते हैं, क्योंकि इनकी खाल, दांत, हड्डियां आदि बहुत महंगी होती हैं। इन्हें खेल, शिकार, परंपरा और दवाइयों के मकसद से मार दिया जाता था, पर अब इनका शिकार करने वालों को वर्षों जेल की सजा होती है। पिछले वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यू एफ ग्लोबल अभियान चलाए जाने के बाद ही टाइगर के पॉपुलेशन में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। अमिताभ बच्चन समेत कई लोगों ने बाघ बचाने के लिए लोगों से अपील की है। 

दुनिया में बाघ की लगभग 11 प्रजातियां पाई जाती थीं जिसमें से ट्राइनिल और जापानी दो प्रजातियां प्रागैतिहासिक काल में ही विलुप्त हो गई थीं। बीसवीं सदी में इसमें से तीन और प्रजातियां बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर और जैवन टाइगर विलुप्त हो गईं। फिलहाल दुनिया में बाघ की 6 प्रजातियां अभी पाई जाती हैं। ये छह प्रजातियां हैं- बंगाल टाइगर, इंडोचाइनीज टाइगर, मलयन टाइगर, साइबेरियन टाइगर, साउथ चाइना टाइगर और सुमत्रन टाइगर।

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भारत में सरिस्का, पन्ना और राजाजी जैसे पार्कों में बाघों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञ का मानना है कि यहां पर एपीए और बीपीएल दो श्रेणियों में बाघ बंटे हुए हैं। अगर हम चाहते हैं कि बाघों की संख्या और तेजी से बढ़े तो इसके लिए जंगलों को बचाना होगा। साथ ही माइनिंग, अवैध निर्माण, राजमार्ग, रेलवे लाइन और नए शहर को जंगलों से दूर रखना होगा।


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