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ईरान-इराक बॉर्डर पर भूकंप से अबतक 445 लोगों की मौत, 3 दिन का शोक घोषित

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 14 , 2017 , 12:46 IST | तेहरान

ईरान-इराक सीमा के पास रिक्टर पैमाने पर 7.3 तीव्रता का भूकंप आने से मृतकों की संख्या बढ़कर 445 हो गई। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री कासिम जान बाबे ने मीडिया को बताया कि मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है। ईरान के अधिकारियों ने बताया कि इस आपदा में 2500 अधिक लोग जख्मी हुए हैं।

फिलीपींस यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आपदा पर दुख जताया है। ईरान के पश्चिमी करमान शाह प्रांत में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। इस आपदा के बाद प्रशासन ने प्रांत में तीन दिन का शोक घोषित कर दिया है। भूकंप के झटके तुर्की और इजरायल तक महसूस किए गए जबकि इराक की राजधानी बगदाद की कई इमारतों में दरारें आ गई हैं।

ईरान के प्रेस टीवी के मुताबिक, देश में भूकंप से सर्वाधिक लोगों की मौत कर्मनशाह प्रांत के सारपोल-ए-जहबा शहर में हुई है। यहां 100 लोगों की मौत हुई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक, रविवार को ईरान सीमा के पास इराक के शहर हालाब्जा से 30 किलोमीटर दक्षिणपश्चिम में रात 9.20 बजे भूकंप आया। भूकंप 33.9 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया।

कुर्दिस्तान, खुजेस्तान, हमेदान, पश्चिमी एवं पूर्वी अजरबेजान और मध्य तेहरान सहित ईरान के कई प्रांतों में रिक्टर पैमाने पर 4.5 तीव्रता के झटके के साथ लगभग 30 आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए। भूकंप के झटके तुर्की, इजरायल, कुवैत, लेबनान, आर्मेनिया, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान में भी महसूस किए गए।

ईरान में भूकंप से सर्वाधिक प्रभावित शहर खासर, शिरिन, सारपुल और अजगेल रहे। हालांकि, दूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में हुई तबाही का आकलन करना मुश्किल है क्योंकि वहां सड़कें और टेलीफोन लाइनें नष्ट हो गई हैं। इराकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सुलेमानिया प्रांत के दरबंदीखान में छह लोग मारे गए हैं और 50 घायल हो गए हैं।

इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी देश में भूकंप के बाद नागरिकों की स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। ईरान विश्व में सर्वाधिक भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों में से एक है। ईरान के इतिहास में सबसे विध्वंसक भूकंप जून 1990 में आया था। इसमें रूबदार, मांजिल और लुहसन जैसे उत्तरी शहर नष्ट हो गए थे और बड़ी संख्या में गांव नष्ट हुए थे, जिसमें लगभग 37,000 लोगों की मौत हो गई थी।


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