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पहली बार ISRO लॉन्च करेगा प्राइवेट कंपनियों की मदद से बना सैटेलाइट, जानिये क्या है खास

अनुराग गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 31 , 2017 , 10:01 IST | बेंगलुरु

अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए गुरुवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) गुरुवार की शाम 7 बजे अपना 8वां रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च करेगा। बता दें कि भारतीय इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि इसरो प्राइवेट कंपनियों की मदद से बने किसी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजेगा।

इस सैटेलाइट का नाम आईआरएनएसएस-1 एच है। जिसे शाम 7 बजे श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी 39 रॉकेट की मदद से छोड़ा जाएगा। बता दें कि इस सैटेलाइट को बनाने में 6 प्राइवेट कंपनियों के ग्रुप का 25फीसदी योगदान रहा है। 1,425 किलोग्राम वजन के इस सैटेलाइट को बनाने में 1,420 करोड़ रुपये की लागत आई है।

आईआरएनएसएस-1 एच सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1 ए की जगह लेगा। क्योंकि आईआरएनएसएस-1 ए की न्यूक्लियर घड़ियों ने काम करना बंद कर दिया है और सटीक स्थिति डेटा देने के लिए न्यूक्लियर घड़ियां बेहद अहम है।

इस सैटेलाइट के जरिए जीपीएस की क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। दरअसल, IRNSS-1ए ‘नाविक’श्रृंखला के सात उपग्रहों में शामिल हैं। ये एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है, जिसे भारत ने अमेरिका के जीपीएस की तर्ज पर विकसित किया है।

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इसरो का कहना है कि इससे पहले कभी भी किसी प्राइवेट कंपनियों की मदद से सैटेलाइट तैयार नहीं किया गया। पहले प्राइवेट कंपनियां सिर्फ हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, पार्ट और जरूरी सामान ही मुहैया कराती थीं, मगर इस बार कंपनियों के इंजीनियर और टेक्निकल्स एसेंबलिंग, इलेक्ट्रिकल इंटीग्रेशन, टेस्टिंग आदि काम में शामिल रहे हैं।


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