अभी-अभी

ISRO ने सबसे भारी रॉकेट GSLV मार्क-3 किया लॉन्च, अब अंतरिक्ष में इंसान भेज सकेगा भारत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
233
| जून 5 , 2017 , 18:22 IST | श्रीहरिकोटा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 का प्रक्षेपण कर दिया है। जीएसएलवी (GSLV) मार्क-3 ने अपने साथ संचार उपग्रह जीसैट-19 को लेकर उड़ान भरी है। जीएसएलवी एमके थ्री भारत का सबसे भारी रॉकेट है। जीएसएलवी एमके-थ्री का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार की शाम 5.28 बजे किया गया।

यह चार टन तक के वजन वाले सैटेलाइट्स को ले जा सकता है। इसकी क्षमता मौजूदा जीएसएलवी मार्क 2 की दो टन की क्षमता से दोगुना है।

जीएसएलवी मार्क 3 कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-19 को स्पेस में जियो- सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में स्थापित करेगा। जीटीओ धरती से सबसे दूर के बिंदू से 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई और इसके सबसे करीब के बिंदु से 170 किलोमीटर की दूरी पर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है। 

इसरो के चेयरमैन किरण कुमार ने बताया कि,

GSAT-19 के बाद GSAT-11 को भी भेजा जाएगा। ये दो सैटेलाइट गेम चेंजर माने जा रहे हैं। GSAT-19 और GSAT-11 सैटेलाइट्स के जरिए डिजिटल इंडिया के लिए फायदेमंद साबित होंगी। ये सैटेलाइट्स इंटरनेट सेवाओं और लाइव स्ट्रीमिंग के अनुभव को पूरी तरह बदल कर रख देंगी। ये हाई स्पीड इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने के साथ ही कम्युनिकेशन को असरदार बनाने में अहम रोल निभाएंगे।

मिश्रा के मुताबिक इस साल के आखिर में GSAT-11 छोड़ा जाएगा। इन दोनों सैटेलाइट के काम शुरू करते ही हाई-क्वालिटी इंटरनेट, फोन और वीडियो सर्विस मिलनी शुरू हो जाएगी। स्पेस में पहले से मौजूद GSAT सैटेलाइट्स का प्रभावी डाटा रेट एक गीगाबाइट प्रति सेकंड है, जबकि GSAT-19 प्रति सेकंड 4 गीगाबाइट डाटा और GSAT-11 तेरह गीगाबाइट प्रति सेकंड की दर से डाटा ट्रांसफर करने के काबिल है।

Gslv_1496563576

क्या है GSAT-19?

GSAT-19 में मॉडर्न प्लेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह हीट पाइप, फाइबर ऑप्टिक जायरो, माइक्रो-मैकेनिकल सिस्टम्स एक्सीलेरोमीटर, केयू-बैंड टीटीसी ट्रांसपोंडर और देश में बनी एक लीथियम आयन बैटरी से लैस है। GSAT-19 देश में तैयार सबसे वजनी सैटेलाइट है।

892615776-ISROGSLVMkIIIlaunch_6

GSAT-19 की खासियत

GSAT-19 का वजन 3,136 किलोग्राम है और ये अब तक का सबसे भारी सैटालाइट है। इस सैटेलाइट में कोई ट्रांसपोंडर नहीं होगा। इसमें नई तकनीक का इस्तेमाल होगा जिससे इंटरनेट की क्षमता 6-7 गुना बढ़ जाएगी। 

Hqdefault


कमेंट करें