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केन्द्र सरकार से CM मुफ्ती ने की सीजफायर की मांग, कहा-अपनाएं वाजपेयी फॉर्मूला

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 10 , 2018 , 10:09 IST

जम्मू-कश्मीर में एक तरफ सेना ऑपरेशन ऑल आउट चला रही है और दूसरी तरफ पत्थर बाजों की हरकतों से वहां का आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। जिस पर मुख्यमंत्री महबुबा मुफ्ती ने चिंता जताते हुए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। जिसके बाद केंद्र से घाटी में रमजान और अमरनाथ यात्रा के लिए एकतरफा सीजफायर की मांग की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को वादी में लोगों को राहत देने के लिए ठीक उसी तरह एकतरफा संघर्ष विराम का एलान करना चाहिए, जैसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में किया था। हाल ही घाटी में पत्थरबाजी की घटना के दौरान चेन्नई के पर्यटक की मौत हो गई थी।

सीएम महबूबा मुफ्ती ने कहा, ''हम सभी को भारत सरकार से अपील करनी चाहिए कि रमजान के मुबारक मौके पर और अमरनाथ यात्रा की शुरुआत पर जैसे साल 2000 वाजपेयी जी ने सीजफायर किया था उसी तरह का कोई कदम उठाए।

इससे आम लोगों को थोड़ी रिलीफ मिले। इस वक्त जो एमकाउंटर हो रहे हैं, सर्च ऑपरेशन हो रहे हैं, उसमें आम लोगों को बहुत तकलीफ हो रही है। हमें ऐसे कम उठाने चाहिए जिससे लोगों का विश्वास बहाल हो।''

उन्होंने कहा कि रोज-रोज की मुठभेड़ों, प्रदर्शनों और तलाशी अभियानों से आम आदमी को बहुत परेशानी हो रही है। कुछ ऐसे कदम उठाएं जाएं, जिनसे यहां सुरक्षा-विश्वास का माहौल बने और आम लोगों को राहत मिले। महबूबा ने कहा कि आगे पाक रमजान महीना, श्री अमरनाथ यात्रा और ईद भी आने वाली है, इसलिए केंद्र को एकतरफा संघर्ष विराम के विकल्प पर विचार करना चाहिए।

सीजफायर से कैसे आएगी शांति-:

आतंकियों या सीमा पर जब सेना कार्रवाई नहीं करती है उसे सीजफायर या युद्धविराम कहते हैं। सीजफायर में सुरक्षाबल पहले कार्रवाई नहीं करते हैं। जिस तरफ से पहले गोलीबारी होती है उसे सीजफायर उल्लंघन कहते हैं। नवंबर 2000 में वाजपेयी सरकार ने सीजफायर का एलान किया था।

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रजमान की वजह से घाटी में सीजफायर का एलान किया गया था। रमजान में घाटी में सुरक्षाबलों की कार्रवाई से लोगों को परेशानी होती है। सुरक्षाबलों को कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया गया था। आतंकी हमला होने पर कार्रवाई की पूरी छूट मिली थी। रमजान-अमरनाथ यात्रा की वजह से फिर सीजफायर की मांग उठ रही है।


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