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दुनिया की सबसे भयावह त्रासदी: जब 72 साल पहले आज ही के दिन दहल उठा था हिरोशिमा

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 6 , 2017 , 12:31 IST | टोक्यो

आज का दिन शायद ही कोई भूल सके। आज का दिन जापान के इतिहास में काला दिन माना जाता है। इस दिन एक ऐसी घटना हुई थी जिससे पूरा जापान दहल उठा था। इस घटना से आज भी वहां के लोग उबर नहीं पाए है ।

आपको बताते चलें कि हिरोशिमा दुनिया का पहला ऎसा शहर है जहां अमेरिका ने 1945 में यूरेनियम बम गिराया था और इसके तीन दिन बाद यानी 9 अगस्त को नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया। इस बमबारी के पहले दो से चार महीनों के भीतर हिरोशिमा में 90 हजार से 1 लाख 60 हजार और नागासाकी में 60 हजार से 80 हजार लोग मारे गए थे। जहाँ कई मुल्कों द्वारा अमेरिका की इस हरकत पर कड़े शब्दों में निंदा की गयी थी। आज इस अटैक को 72 वर्ष हो गए हैं लेकिन जापान का ये हिस्सा आज भी उस हमले से प्रभावित है। आज भी यहाँ पर उत्पन्न हो रही संतानों पर इस हमले का असर साफ देखा जा सकता है।

आखिर क्या हुआ था उस दिन

उस दिन कैलेण्डर पर तारीख थी 6 अगस्त 1945 । इस घटना को दोबारा न दोहराए जाने की लोग कामना करते हैं। जापान में जो हुआ था उसके पीछे तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन का हाथ था।

अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के एक आदेश ने जापान के हिरोशिमा शहर को लाशों के शहर में तब्दील कर दिया था। पूरा हिरोशिमा शहर श्मशान बन गया था जहां नजर जाती थी वहां लोगों के शवों के सिवाय कुछ नजर नहीं आ रहा था। 6 अगस्त 1945 ही वो दिन है जिस दिन अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु हमला किया था। जापान दुनियां का एकमात्र देश है जिसने परमाणु हमले को झेला है।

अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन से परमाणु बम गिराए जाने की अनुमति मिलने के बाद रात के बाद की पहली सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर अमरीकी वायुसेना की तरफ से बी-29 'एनोला गे' ने 'लिटिल बॉय' नामक परमाणु बम के साथ जापान के हिरोशिमा की तरफ अपनी यात्रा शुरू कर दी थी। कहा जाता है कि 'लिटिल बॉय' नामक परमाणु बम को जब विमान में लेस किया था तब इसमे बारूद नही था और बाद में मॉरिस जैप्सन ने चार बड़े बैग से बारूद भर कर और फिर प्लग लगा कर इस बम को सक्रिय कर दिया था।

परमाणु बम से सक्रिय 'एनोला गे' के पायलट कर्नल पॉल डब्लू तिब्बेत्स लेकर पश्चिम दिशा की तरफ मौजूद जापान के हिरोशिमा की तरफ तेजी से वो करने की दिशा में बढ़ने लगे थे जिसकी कल्पना भी उस वक्त नही की जा सकती थी। साफ आसमान के तले हिरोशिमा के लोग अपने कामों में मगन थे। उनको एहसास भी नहीं था कि कुछ देर में उनकी दुनियां वीरान हो जाएगी। रोजमर्रा के कामों में लगे हिरोशिमा के लोगो के ऊपर 9700 पाउंड (4400 किलोग्राम) वजन, 10 फुट लंबाई और लगभग 28 इच व्यास वाले परमाणु बम 'लिटिल बॉय' को सवा आठ बजे कर्नल पॉल डब्लू तिब्बेत्स ने छोड़ा था। 6 अगस्त 1945 के दिन हिरोशिमा शहर में मौजूद लाखों लोगों की मौत हो गई थी। साथ ही जो बचे थे वो परमाणु बम के रेडिएशन के शिकार हो गए थे। जिसका असर आज तक लोगों में देखा जाता है।

जापानी सरकार आज भी इन लोगों को मदद मुहैया करवाती है। रेडिएशन के शिकार लोगों को जापान में हिबाकुशा कहा जाता है। इन लोगों की संख्या 2 लाख के आसपास बताई जाती है। अमीरका ने जापान के हिरोशिमा शहर को वीरान इसलिए बनाया था क्योकि वह एक बंदरगाह वाला शहर था जो जापानी सेना को राशन पहुचाने का केंद्र था और जापानी सेना अपना संचार तंत्र भी यही से ऑपरेट करती थी।

20 हजार टन टीएनटी की क्षमता और ब्रहमांड की शक्ति समेटने वाले इस परमाणु बम को बनाने में लगभग दो अरब डॉलर का खर्च आया था। अमेरिका ने इसके बाद 9 अगस्त को 9 बजकर 50 मिनट पर 31,000 फीट की ऊंचाई से बी-29 नामक 4050 किलो वाले बम को औद्योगिक नगर कोकुरा में गिरा कर तबाही के मंजर को एक बार फिर से दोहराया था। फैट मैन नामक इस बम की वजह से जापान की गोला-बारूद बनाने वाली फैक्टरियाँ तबाह हो गयी थी।

6 और 9 अगस्त के बाद जापान को एक बार फिर से दुःख, दर्द, चीखों बर्बादी और तबाही का सामना 12 अगस्त को करना पड़ा जब अमरीका ने नागासाकी को अपना निशाना बनाया। 12 अगस्त को हिरोशिमा में हुई तबाही का मंजर नागासाकी में दोहराने के लिए अमरीका के विमान ने सुबह 9 बजे उड़ान भरी और जब वह जापान पहुंचा तो मौसम में बादल थे।

11 बजकर 2 मिनट पर 52 सेकेण्ड पर नीचे गिरने के बाद पृथ्वी तल से 500 फुट की ऊंचाई से जापान के नागासाकी शहर पर दूसरा परमाणु बम गिरा। जिसमे 70,000 लोग मारे गये थे और लगभग इतने ही लोग इसके सक्रमण का शिकार हुए थे। बम को जब नागासाकी पर गिराय गया था। तब आसमान में मशरूम के जैसा आकार उभय आया था।

परमाणु बम से इतनी मौत हो जाने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने दुःख जताने की जगह रात को यें ऐलान करते हुए कहा कि अब जापानियों को ज्ञात हो गया होगा कि परमाणु बम क्या-क्या कर सकता है। इन दो परमाणु हमले के 6 दिन बाद जापान के युद्ध मंत्री और सेना के अधिकारी के खिलाफ जाते हुए प्रधानमंत्री बारोन कांतारो सुजुकी ने दोस्त देशो के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

हिरोशिमा और नागासाकी की बदहाली पर जहां अमेरिका इतरा रहा था वही पूरा जापान कराह रहा था। तकलीफ, तबाही और तकरीरों का दौर जारी था। जो लोग हमले में मारे गए थे। उनके अंतिम संस्कार के लिए लोग नहीं मिल रहे थे और जो रेडिएशन का शिकार हुए थे। उनको इलाज नहीं मिल पा रहा था। हालात ये थे कि लोग दर्द से तड़प रहे थे और सरकार असहाय नजर आ रही थी।

नागासाकी और हिरोशिमा पर परमाणु हमले क्या हुए हर देश में एक जंग छिड़ गई और वो जंग है खुद को परमाणु शक्ति बनाने की। हालात ये हैं कि आज अपने पड़ोसी देशों को धमकाने के लिए लोग परमाणु हमले की धमकी देते हैं और आपसी मतभेदों को खत्म करने की जगह उनको और बढ़वा देते हैं।


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