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पाक के 18 शहरों में भारत के खिलाफ जैश-ए-मोहम्मद का जिहादी कांफ्रेस, युवकों को मिलेगी ट्रेनिंग

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 3 , 2017 , 16:43 IST | इस्लामाबाद

जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए तैयबा, पाकिस्तान के ये दोनों सैन्य जिहादी संगठन मिलकर पाकिस्तान के सभी शहरों में जिहादी ट्रेनिंग को लेकर कांफ्रेस आयोजित कर रहें है। इस्लामिक कट्टरपंथ पर मिडिल ईस्ट में रिसर्च कर रहे बीबीसी के पूर्व पत्रकार तुफैल अहमद ने अपने एक रिसर्च रिपोर्ट में इसकी पूरे विस्तार से तस्दीक की है।

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उन्होंने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में लिखा है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा दोनों ही सैन्य जिहादी संगठन मिलकर पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में युवकों ओर किशोर युवाओं को कुरान की आयतें पढ़ाने के बहाने जिहाद की ट्रेनिंग दे रहे हैं। बता दें कि कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ इन्ही दोंनों जिहादी संगठनों ने अघोषित युद्ध छेड़ रखा है।

इस जिहादी कांफ्रेस को दौरत-ए-तश्फीर(आएत-ए-जिहाद) के नाम से पाकिस्तान के शहरों में आयोजित किया जा रहा है। कांफ्रेस के बहाने पाकिस्तानी युवाओं और किशोर युवाओं के जेहन में कट्टरपंथी इस्लामिक स्कॉलर जिहाद के आयत रटाए जा रहे हैं।

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तुफैल अहमद ने लिखा है कि जैश-ए-मोहम्मद के एक एसोसिएयट ने उन्हें बताया है कि इस कांफ्रेस के पहले टूर में 18 शहरों में युवाओं को जिहाद की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कांफ्रेस को अल-रहमत ट्रस्ट के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है। हर शहर में 100 से ज्यादा युवाओं को जिहाद की ट्रेनिंग दी जा रही है।

अल-रहमत ट्रस्ट एक एनजीओ है जिसका संचालन जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर की देखरेख में किया जाता है।

भारत को इन छह स्रोतों से जिहादी खतरा है

1. पाकिस्तान सरकार समर्थित जिहाद, खास कर कश्मीर में

2. बांग्लादेश, जहां जिहादी मजबूत हो रहे हैं

3. पश्चिम एशिया के जिहादी गुटों में वृद्धि

4. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिहाद को नियंत्रित करने में बड़ी शक्तियों की नाकामी

5. कानून के राज को मजबूत करने में भारतीय राज्य की नाकामी

6. उर्दू अखबारों, इस्लामी मौलवियों और साथ ही मुसलमान और हिंदू-इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा भारतीय मुसलमानों को कट्टर बनाया जाना। हिंदू-इस्लामी कट्टरपंथी, मतलब वो हिंदू जो इस्लामी कट्टरपंथियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देते हैं।

इनमें से पाकिस्तानी खतरे से निपटने में भारत सैन्य रूप से सक्षम है। पश्चिमी एशिया से पैदा होने वाले जिहाद का खतरा अगले दशक में भी बना रहेगा। लेकिन इस्लामिक स्टेट जैसे गुट अगर भारत से भर्तियां करने में कामयाब होते हैं तो इसके लिए उर्दू पत्रकार और इस्लामी मौलवी जिम्मेदार हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनका समर्थन करते हैं।

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गौरतलब है कि भारत के बहुत से राज्यों में कट्टरपंथ बढ़ रहा है, खासकर महाराष्ट्र, हैदराबाद और केरल में। यह एक गंभीर खतरा है।

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