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नौकरियों का टोटा: IT, Manufacturing समेत कई सेक्टर से निकाले जा रहे हैं कर्मचारी

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 4 , 2017 , 11:33 IST | नई दिल्ली

भारत की सूचीबद्ध कंपनियों के रोजगार के आंकड़ों पर अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस द्वारा किए गये विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में ज्यादातर कंपनियों में पिछले सालों की तुलना में नौकरियां कम हुई हैं। इंडियन एक्सप्रेस के पास इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर कंपनियो को छोड़कर अन्य क्षेत्रों की 121 कंपनियों के रोजगार से जुड़े आंकड़े हैं। ये सभी कंपनियां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसए) में सूचीबद्ध हैं और वित्त वर्ष 2016-17 से जुड़े इनके आंकड़े उपलब्ध हैं।

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संक्षेप में पढ़िए कि तीन साल में इस सरकार ने कितने लोगों का रोज़गार छीना है।

1. 67 कपड़ा मिले बंद. 17,600 नौकरियां गई

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 67 कपड़ा मीलें बंद हो चुकी हैं। इनके 17,600 कर्मचारी बेरोज़गार हो गए। ये संगठित क्षेत्र के कर्मचारी हैं। असंगठित क्षेत्र में कम से कम इससे तिगुने लोग सड़क पर आए हैं। यानी कपड़ा उद्योग में ही मिनिमम 67-68 हज़ार लोगों की नौकरियां गईं।

2. L&T ने 14,000 कर्मचारियों को किया निकाल बाहर

नोटबंदी की जब चाबुक चली तो L&T ने 14,000 लोगों को निकाल दिया। L&T आईटी, मैनुफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, वित्तीय सलाह वगैरह देने वाली कंपनी है।

3. तीन आईटी कंपनियों ने निकाले 4,000 कर्मचारी

इस साल तीन बड़ी आईटी कंपनियों से कुल मिलाकर लगभग चार हज़ार लोग निकाले गए। TCS, टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसी कंपनियों से तो 10-12 हज़ार कर्मचारियों को निकाले गए हैं। यानी कुल 15-16 हज़ार।

4. HDFC ने निकाले 4,581 कर्मचारी

नोटबंदी के तुरंत बाद HDFC ने 4,581 लोगों को चलता किया। फिर अगली तिमाही में 6,096 लोगों को। यानी छह महीने में 10 हज़ार सिर्फ़ एक बैंक से निकाले गए। देश में कुल 29 प्राइवेट बैंक हैं। सरकार पर मेहरबान होकर कम औसत भी रखें तो कम से कम 50,000।

5. पवन ऊर्जा वाली कंपनी सुज़लॉन और टरबाइन बनाने वाली रेगेन पावरटेक ने पिछले छह महीने में 1,500 लोगों को निकाल दिया। Inox दो महीने से पगार नहीं दे रही है। ऊर्जा क्षेत्र की कई कंपनियों के यही हाल है। सरकार से उदारता बरतते हुए इस क्षेत्र का आंकड़ा 10 हज़ार रखते हैं।

6. 2016 में इस सरकार के फ्लैगशिप स्टार्टअप में से 212 बंद हो गए, जो पिछले साल से 50% ज़्यादा है। एक स्टार्टअप में अगर 10 लोग भी काम करते होंगे तो 3000 लोग बेरोज़गार हो गए।

7. लेकिन सबसे ज़्यादा मार पड़ी है लघु-कुटीर उद्योग पर। चूड़ी, ताले, चप्पल, कप-प्लेट और बेल्ट वगैरह बनाने वाले हज़ारों छोटे कारखाने बंद हो गए और इनमें काम करने वाले दो-तीन लाख लोग बेरोज़गार हो गए।

लगातार 3 साल से घट रहा है नौकरी देने का ग्राफ

इन कंपनियों के रोजगार के आंकड़ों के अनुसार इन कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष के 742,012 की तुलना में वित्त वर्ष 2016-17 में केवल 730,694 नौकरियां दीं। रोजगार में 11,318 की ये कमी धातु, ऊर्जा, कैपिटल गुड्स, निर्माण क्षेत्र और एमएमसीजी क्षेत्र की कंपनियों में हुई है।

इन 121 कंपनियों में से 107 के पिछले तीन साल के आंकड़े इंडियन एक्सप्रेस के पास उपलब्ध हैं। इन कंपनियों के आंकड़ों से पुष्टि होती है कि नौकरी में ये कमी लगातार दूसरे साल जारी है। जिन 107 कंपनियों के पिछले तीन वित्त वर्षों के आंकड़े हैं उनमें मार्च 2015 तक कुल 684,452 कर्मचारी थे जिनकी संख्या मार्च 2016 में घटकर 677,296 रह गयी और मार्च 2017 तक ये संख्या घटकर 669,784 हो गयी। नौकरी में कमी की संख्या छोटी लग सकती है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ये एक प्रवृत्ति को दिखाती है जो चिंता का विषय है। देश की सबसे बड़ी कंपनियों के कर्मचारियों में कमी से इन कंपनियों के विस्तार की योजनाओं और निकटवर्ती विकास की उम्मीदों का पता चलता है।

 


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