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पूर्व जस्टिस शाह बोले ये है नया 'राष्ट्रवाद', सरकार के खिलाफ बोलने पर देशद्रोही ठहरा दिया जाता है

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 20 , 2017 , 14:33 IST | नयी दिल्ली

इन दिनों देश में राष्ट्रवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठ रहा है। ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह ने देश के मौजूदा हालातों का आकलन करते हुए एमएन रॉय मेमोरियल लेक्चर में कहा कि भारतीयों को राष्ट्रगान में जबरन खड़ा कराया जाता है और हमें बताया जाता है कि क्या खा सकते हैं क्या नहीं, क्या देख सकते हैं, क्या नहीं और क्या बोल सकते हैं क्या नहीं।

अपने लेक्चर के दौरान गुरमेहर कौर मामले का नाम लिए बिना ही जस्टिस शाह ने कहा कि, देश के शिक्षा संस्थानों पर हमले हो रहे हैं और लगातार किसी भी स्वतंत्र विचार को कुचलने का प्रयास होता है। 

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राष्ट्रवाद पर लेक्चर देते हुए जस्टिस शाह कहते है,

यह बेहद दुखद है कि अगर कोई सरकार के पक्ष से परे अपने विचार रखता है तो उन्हें तुरंत राष्ट्रविरोधी या देशद्रोही ठहरा दिया जाता है। असंतुष्टि और विरोध की उठती आवाज के खिलाफ आपराधिक और यहां तक कि राजद्रोह का आरोप थोपा जाता है।

इसी दौरान जस्टिस शाह ने रवींद्र नाथ टैगोर और सावरकर के विचारों की तुलना करते हुए कहा कि,

भारत एक विविधता वाला देश है, इसलिए लोगों को अलग-अलग विचारों का आदर करना चाहिए।

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इसी के साथ जस्टिस शाह कहते है कि, जो राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बारे में अलग विचार रखते हैं हमें उन विरोधाभासों का सम्मान करना चाहिए और यह भी पूछना महत्वपूर्ण है कि देश क्या केवल एक क्षेत्र है या लोगों से मिलकर बना है।

राष्ट्रवाद पर अपने विचारों को व्यक्त करते हुए जस्टिस शाह ने कहा कि ऐसी आवाजें तो अल्पसंख्यकों और वंचितों के हक की बात करती हैं और उन्हें उठाती हैं, क्या वे इस देश के लोगों के खिलाफ है या राष्ट्रविरोधी है।

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इसी के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बात करते हुए जस्टिस शाह कहते है कि, हमारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार कोई उपहार या विशेषाधिकार नहीं है। यह देश की जनता के संघर्ष और त्याग के बाद हमने संविधान के जरिए इसको जीता है।


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