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अाखिर क्या है 'पनामा पेपर लीक '? यहां पढ़ें पूरा मामला

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 28 , 2017 , 14:25 IST | इस्लामाबाद

पनामा पेपर लीक मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को सुप्रीम कोर्ट से दोषी करार दे दिया गया है। फैसला आने के बाद नवाज शरीफ ने इस्तीफा भी दे दिया है। पांच जजों की खंडपीठ ने एकमत से शरीफ के खिलाफ फैसला दिया है। नवाज और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग जैसे संगीन आरोप थे।

नवाज शरीफ से सीधे जुड़े मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर संयुक्त जांच दल (जेआइटी) गठित किया गया था। जेआइटी ने 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले पीठ में शामिल रहे दो जजों के 11 अगस्त तक के लिए इस्लामाबाद से बाहर होने की बात कही गई थी।

जानें क्या है पूरा मामला?

टैक्स बचाने वाले दुनिया के अमीर लोगों से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा खुलासा पनामा पेपर लीक के रुप में सामने आया था। पनामा की एक लॉ फर्म से लीक हुए दस्तावेजों ने दुनियाभर की तमाम बड़ी हस्तियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी धांधली में व्लादिमीर पुतिन, नवाज शरीफ, शी जिनपिंग और फुटबॉलर मैसी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

इस खुलासे में दुनियाभर की राजनीतिक हस्तियों में 12 मौजूदा या पूर्व राष्ट्र प्रमुख शामिल हैं। इन हस्तियों समेत करीब 140 लोगों की संपत्ति का भी खुलासा हुआ है। भारत से भी कुछ लोगों के नामों का जिक्र पनामा पेपर्स में किया गया था इतनी बड़ी संख्या में ये रिकॉर्ड जर्मन अखबार सुडूशे जीतुंग ने एक अज्ञात सूत्र से प्राप्त किए हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकार संघ (आईसीआईजे) के जरिए दुनिया भर के मीडिया के साथ साझा कर दिया। आईसीआईजे ने कहा कि इस जांच के तहत विदेशों में स्थित 2.14 लाख प्रतिष्ठानों से 1.15 करोड़ दस्तावेज प्राप्त किए गए।

लीक हुए दस्तावेज पनामा की विधि फर्म मोजैक फोंसेका से आए। इस फर्म के 35 से भी अधिक देशों में दफ्तर हैं। जिन लोगों के नाम दस्तावेजों की इस भारी लीक में सामने आए हैं, उनपर इसका गंभीर राजनीतिक असर पड़ सकता है। आईसीआईजे की जांच में जिन लोगों के बारे में मुख्य दावे किए गए हैं, उनमें पुतिन के करीबी सहयोगी शामिल हैं। इन्होंने बैंकों और छद्म कंपनियों के जरिए दो अरब डॉलर का गुप्त घालमेल किया।

नवाज और उनके परिवार पर आरोप

नवाज शरीफ के बेटों हुसैन और हसन के अलावा बेटी मरियम नवाज ने टैक्स हैवन माने जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कम से कम चार कंपनियां शुरू कीं। इन कंपनियों से इन्होंने लंदन में छह बड़ी प्रॉपर्टीज खरीदी। शरीफ फैमिली ने इन प्रॉपर्टीज को गिरवी रखकर डॉएचे बैंक से करीब 70 करोड़ रुपए का लोन लिया। इसके अलावा, दूसरे दो अपार्टमेंट खरीदने में बैंक ऑफ स्कॉटलैंड ने उनकी मदद की।

नवाज और उनके परिवार पर आरोप है कि इस पूरे कारोबार और खरीद-फरोख्त में अनडिक्लियर्ड इनकम लगाई गई। शरीफ की विदेश में इन प्रॉपर्टीज की बात उस वक्त सामने आई जब लीक हुए पनामा पेपर्स में दिखाया गया कि उनका मैनेजमेंट शरीफ के परिवार के मालिकाना हक वाली विदेशी कंपनियां करती थीं। शरीफ के परिवार के लंदन के 4 अपार्टमेंट से जुड़ा मामला भी उन 8 मामलों में शामिल है जिनकी नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने दिसंबर 1999 में जांच शुरू की थी।

क्या हैं पनामा पेपर?

हाल ही में लीक हुए पनामा पेपर पनामा (मध्य अमेरिका का एक देश) स्थित मोजैक फोंसेका नामक फर्म के वो दस्तावेज हैं जो निवेशकों को कर बचाने, काले पैसे को सफेद करने और अन्य कामों से जुड़े होते हैं।

हालांकि खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संघ, जो टीम इस पनामा पेपर्स के पीछे है उसका कहना है कि इस बात की संभावना तेज हैं कि इन विदेशी कंपनियों में से कई सारी कंपनियां ऐसी गतिविधियां वैध रूप से कर रही हैं।

पनामा पेपर्स इस तरह से काम करने वाला अपने आप में दुनिया का एक बड़ा संगठन है। बीते एक साल में करीब 80 देशों के 100 से अधिक मीडिया संगठनों के 400 पत्रकारों ने दस्तावेजों का गहन शोध किया है। मीडिया के जो बड़े संगठन इसमें शामिल हैं उनमें बीबीसी, गार्जियन, Süddeutsche Zeitung और फॉल्टर जैसे बड़े बैनरों ने भी इस परियोजना पर काम किया है।

लिस्ट में और किसका नाम

पनामा पेपर लीक में जिन हस्तियों का नाम सामने आया उनमें आइसलैंड के प्रधानमंत्री, यूक्रेन के राष्ट्रपति, सऊदी अरब के राजा और डेविड कैमरन के पिता का नाम प्रमुख है। इनके अलावा लिस्ट में व्लादिमीर पुतिन के करीबियों, अभिनेता जैकी चैन और फुटबॉलर लियोनेल मेसी का नाम भी था। हालांकि इन हस्तियों ने ऐसा कर कोई गैर-कानूनी काम किया है, इस बारे में पेपर्स में कुछ नहीं कहा गया था।

कैसे लीक हुए पेपर्स?

एक अनाम स्त्रोत ने एक साल पहले जर्मनी के एक अखबार Süddeutsche Zeitung से संपर्क साधा था और उसने मोजैक फोंसेका से मिले कूट दस्तावेज उसे सौंपे। आगामी कुछ महीनों में अखबार ने पाया कि इन दस्तावेजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा था। इसके बाद करीब 2.6 टेराबाइट डेटा को इकट्ठा किया गया जिस पर सबसे बड़ा खुलासा करने के लिए पत्रकारों की एक बड़ी टीम काम कर रही है।

डेटा में क्या है?

जांच में जो डेटा सामने आया था वह 1977 से लेकर 2015 तक का था। लीक हुए दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि विश्व के प्रमुख बैंकों द्वारा संचालित उद्योग, लीगल फर्म और एसेट मैनेजमेंट कंपनियां गुप्त रूप से विश्व की अमीर हस्तियों, राजनेताओं, फीफा के अधिकारियों, ड्रग स्मगलर, फिल्मी हस्तियों और पेशेवर एथलीटों की संपतियों को किस तरह से गुप्त रखा जाता है। इस जांच में एक साफ तस्वीर उभर कर सामने आई है कि किस तरह से विश्व के अमीर लोगों से मोजैक फोंसेका निवेश स्वीकार करती थी।

मोजैक फोंसेका:

यह पनामा की लॉ फर्म है जो दुनियाभर की गुमनाम कंपनियों का कालाधन सफेद करती है। ये कंपनी अपने प्रवर्तकों को उनकी बिजनेस डीलिंग को छुपाने की अनुमति देती है। मोजैक फोंसेका के दुनियाभर में दर्जनों ऑफिस हैं। ये हजारों कंपनियों को फंडिग करती है, बेचती है और उनका प्रबंधन देखती है। ये कंपनी ज्यूरिख, लंदन और हॉन्ग-कॉन्ग जैसे शहरों में शेल कंपनियों की बिक्री करती है। जो कोई भी इन कंपनियों को खरीदना चाहता है उसे मोजैक फोंसेका के तहत ही खरीदारी करनी पड़ती है। यह कंपनियों के लिए फर्जी डॉयरेक्टर भी मुहैया कराती है साथ ही कंपनी के मूल शेयर होल्डर्स के नाम भी छुपाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर कंपनी इस तरह के कारोबार में है जिसमे विदेशी कंपनियों के असली मालिक का नाम छुपाया जा सकता है।


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