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अगर शायरा बानो न होतीं तो महिलाओं को नहीं मिलती ट्रिपल तलाक से आजादी!

अनुराग गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 22 , 2017 , 14:12 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तलाक तलाक तलाक पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। तीन तलाक को 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने 3-2 से खारिज कर दिया है। जिसमें 3 जजों ने इसे गैर संवैधानिक मानते हुए खारिज कर दिया तो 2 जज ने इसे इस्लामिक रीति-रिवाजों का अभिन्न हिस्सा माना और कहा कि इसे संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। इस मामले पर साल 2016 में उत्तराखंड की शायरा बानो ने याचिका दाखिल की थी। जिसके बाद पूरे देश में तीन तलाक को लेकर बहस छिड़ गई कि यह महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

दरअसल, 38 साल की शायरा बानो ने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस रिवाज के तहत कोई भी मुस्लिम समुदाय का शख्स बेहद आसान तरीके से अपनी पत्नी को तलाक तलाक तलाक बोलकर छोड़ सकता है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने इस साल 12 से 18 मई तक लगातार इसपर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शायरा बानो ने कहा कि, वो फैसले का स्वागत और समर्थन करती है। मुस्लिम महिलाओं के लिए बहुत ऐतिहासिक दिन है।

कौन है शायरा बानो?

38 साल की शायरा बानो वो महिला है जिसे उसके पति ने टेलीग्राम के जरिए तलाक दे दिया। उनके दो बच्चे हैं, 13 साल का बेटा और 11 साल की बेटी। मगर उन्होंने एक साल से अपने बच्चों की शक्ल तक नहीं देखी। इतना ही नहीं उन्हें उनके बच्चों से फोन तक में बात नहीं करने दी जाती है। साल 2002 में इलाहाबाद के रहने वाले रिजवान अहमद से शायरा बानो का निकाह हुआ था। वह मूलत: उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली है।

अपनी याचिका में शायरा बानो ने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान करते थे और उनके साथ मारपीट होती थी यहां तक की उन्हें नशीली दवाएं दी जाती थी। जिसकी वजह से उनकी तबीयत भी खराब होने लगी थी। यहां तक की रिजवान ने शायरा का छह बार अबॉर्शन करवाया था।

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शायरा के साथ आए दिन बुरा व्यवहार किया जाने लगा। शायरा की याचिका के मुताबिक अप्रैल 2015 में रिजवान ने उसे तलाक दे दिया और उससे रिश्ता तोड़ दिया। इसके साथ ही शायरा ने सुप्रीम कोर्ट में पर्सनल लॉ बोर्ड के एप्लीकेशन एक्ट की धारा 2 के तहत पुरुषों के बहुविवाह, तीन तलाक, निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को वैधता मिलती है उसे भी चैलेंज किया।

शायरा का कहना था कि इस जंग में पीछे नहीं हटने वाली हैं। उनका यह कदम दूसरी महिलाओं के लिए मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि इतने सालों की शादी महज चंद मिनटों में तलाक तलाक तलाक कहने से टूट गई। यह अन्याय है, ये कानून मुस्लिम महिलाओं को उनके कई अधिकारों से वंचित करता है।


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