राजनीति

क्या कंप्यूटर बाबा से डर गई थी शिवराज सरकार? निकालने वाले थे नर्मदा घोटाला यात्रा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 4 , 2018 , 16:43 IST

एक साधु को दुनियादारी से क्या मतलब ? वो तो दुनिया के मोह माया से मुक्त होता है। लेकिन ये भी कहा जाता है कि समाज कल्याण और सही मार्गदर्शन के लिए भी साधुओं को राजनीति में आना पड़ता है। जनता भी इनका पुरज़ोर समर्थन करती है। सांसद, विधायक, मुख्यमंत्री, मंत्री बनने में इन संतों ने भी दिलचस्पी दिखाई। ज़ाहिर है समाज उत्थान के लिए?

Computer baba

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने पांच हिंदू धर्म गुरुओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। ये धर्म गुरु हैं नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत। इन सभी को नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया गया है।

बताया जा रहा है कि मंगलवार को इन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देने का आदेश जारी हुआ है। इनमें से एक कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा बचाओ के काम में भ्रष्टाचार को सामने लाने के लिए नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालने का एलान किया था। इधर राज्य में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार धर्मगुरुओं के नाम पर राजनीति कर रही है।

राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले कंप्यूटर बाबा ने कहा कि साधू समुदाय की ओर से हम पर विश्वास जताने के लिए सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। हम समाज के कल्याण के लिए सदा तत्पर रहेंगे। वही पंडित योगेंद्र ने कहा, 'सरकार सभी वर्गों के लिए काम कर रही है। पर्यावरण के लिए, नदियों के संरक्षण के लिए और नदी किनारे वृक्षारोपण के लिए जनता को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में संतों को नियुक्त किया गया है।

Narnada ghotala

मध्यप्रदेश में अब मंत्रियों और मंत्री दर्जा प्राप्त लोगों की संख्या 151 हो गई है। अभी कुछ दिन पहले राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त एक व्यक्ति पर युवती से छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज हुआ था इसलिए उनसे मंत्री दर्जा वापस ले लिया गया है। शिवराज मंत्रिमंडल में उनके अलावा कुल 31 मंत्री हैं जिनमें 20 कैबिनेट और 11 राज्यमंत्री हैं। अभी दो जगह खाली हैं जिन्हें जल्दी भरे जाने की अटकलें चल रही हैं।

लोकतंत्र में सत्ता की ताक़त या सत्ता के क़रीब होना कई बार संतों को अलग राह पर भी ले जाता है। ऐसे कई उदाहरण सामने आये है जैसे बाबा राम रहीम इंसान। बाबाओं को अगर सत्ता शक्ति का सदुपयोग का ज्ञान रहे तो शायद राजनेता भी अपने कामकाज में साधु हो जाएँ ? शायद ?

 

 


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