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मोदी कैबिनेट में शामिल हुए सभी नए मंत्रियों का पूरा प्रोफाइल पढ़ें

अनुराग गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 3 , 2017 , 12:34 IST | नई दिल्ली

मोदी कैबिनेट में इन 9 मंत्रियों को शामिल किया है। जिनको राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथ दिलाई है। 

 

आर के सिंह

आरके सिंह बिहार के आरा से सांसद हैं। इनका पूरा नाम राजकुमार सिंह है। ये 1975 बैच के बिहार कॉडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। अपने तेवरों के मशहूर आरके सिंह भारत के गृह सचिव भी रहे हैं। बता दें कि आरके सिंह संसद की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, पेंशन औक लॉ कमेटी के सदस्य हैं। इन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेन्स कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की है। इसके बाद कानून की पढ़ाई भी की। आरके सिंह साल 1990 में समस्तीपुर के जिला मजिस्ट्रेट रह चुके है और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को इन्होंने गिरफ्तार भी किया था।

अश्विनी कुमार चौबे

बिहार का एक बड़ा नाम है अश्विनी कुमार चौबे। 2014 में बीजेपी की टिकट पर बिहार के बक्सर सीट से चुनाव लड़े थे। फिलहाल वो बक्सर से सांसद हैं और इससे पहले वो 5 बार विधायक भी रह चुके है। उन्होंने बिहार सरकार में लगातार 8 साल तक मंत्री पद संभाला। साल 1953 में जन्में चौबे बिहार के स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके है।

अनंत कुमार हेगड़े

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ से सांसद अनंत कुमार हेगड़े 28 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने थे। फिलहाल ये उनका 5वां टर्म हैं। सासंद रहने के दौरान वे वित्त, गृह, मानव संसाधन और वाणिज्य जैसी कई समितियों के सदस्य भी रहे। हेगड़े ग्रामीण इलाकों में विकास, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवाओं के लिए काम करते है और उनका किसानों के प्रति खासा लगाव रहा है। हालांकि पिछले दिनों हेगड़े का एक वीडियो खासा वायरल हुआ था जिसमें वो कुछ डॉक्टर्स के साथ हाथापाई करते हुए नजर आए थे।

गजेंद्र सिंह शेखावत

साधारण जिन्दगी गुजारने वाले गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर से सांसद है। शेखावत को कैबिनेट में शामिल करने के पीछे ये माना जा रहा है कि राजस्थान के राजपूतों की जो नाराजगी है इससे वो खत्म हो सकती है। बता दें कि आनंदपाल एनकाउंटर के बाद से राजपूत समाज ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इसके अतिरिक्त शेखावत सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहते है। शेखावत फिलहाल ऑल इंडिया प्लेयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वे वित्त मामलों की संसदीय समिति के सदस्य और फेलोशिप कमेटी के चेयरपर्सन भी हैं।

हरदीप सिंह पुरी

1974 बैच के पूर्व आईएफएस अफसर हरदीप पुरी यूएन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बता दें कि हरदीप सिंह पुरी को राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति का माहिर माना जाता है और करीब 40 साल के राजनीतिक करियर में वह कई देशों में भारत के राजदूत के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके है। हरदीप पुरी ने 1988 से 1991 के दौरान ब्राजील, जापान, श्रीलंका और ब्रिटेन में महत्वपूर्ण राजनयिक जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अतिरिक्त हरदीप सिंह पुरी यूएन में भारतीय प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष भी थे।

डॉ. वीरेंद्र कुमार

बचपन में पिता के साथ साइकिल के पंक्चर बनाने वाले वीरेंद्र कुमार दलित समुदाय से है। बता दें कि सागर के पूर्व और टीकमगढ़ के मौजूदा सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार अपनी सादगी और सीधेपन के लिए जाने जाते हैं। वे संघ, अभाविप, विहिप और भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे। कलेक्ट्रेट परिसर में जनता दरबार की शुरुआत कर वीरेंद्र कुमार ने प्रसिद्धि पाई। छात्र राजनीति से ही मध्य प्रदेश में सक्रिय रहे वीरेंद्र लेबर एंड वेलफेयर और एससी एसटी वेलफेयर कमेटी के भी सदस्य रहे हैं। फिलहाल वे श्रम मामलों की संसदीय समिति के चेयरमैन हैं।

अल्फांज कन्ननाथनम

दिल्ली में अवैध इमारतों के खिलाफ उन्होंने जंग छेड़ी। डिमॉलिशिन मैन के नाम से मशहूर कन्ननाथनम केरल कैडर के 1979 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। केरल में कोट्टयम के कलेक्टर रहने के दौरान उन्होंने शहर को देश का पहला सौ फीसदी शहर बनाया। इसके बाद रिटायर होकर निर्दलीय विधायक भी बने। उन्होंने जनशक्ति नाम का एक एनजीओ भी बनाया था।

सत्यपाल सिंह

1980 बैच के महाराष्ट्र कैडर के पूर्व आईपीएस है। उन्होंने मुंबई में संगठित अपराध की कमर तोड़ी है। इसके अतिरिक्त मुंबई, पुणे और नागपुर के कमिश्नर रह चुके है। उन्होंने मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश के नक्सली इलाकों में भी सर्विस की है। फिलहाल सत्यपाल बागपत से सांसद हैं। स्ट्रेटजिक मैनेजमेंट में एमबीए कर चुके सत्यपाल ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए भी किया है।

शिव प्रताप शुक्ला

शिव प्रताप शुक्ला यूपी से राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की है। छात्र नेता के तौर पर उन्होंने राजनीतिक जीवन में दाखिला लिया। इसके अतिरिक्त इमरजेंसी के समय 19 महीने जेल में भी रहे। शिव प्रताप 5 बार विधायक बने। इस दौरान वे कई सालों तक मंत्री भी रहे।


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