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गैंगस्टर से कैसे राजपूत समाज का हीरो बना आनंदपाल, यहां पढ़िए पूरी कहानी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 16 , 2017 , 13:56 IST | जयपुर

किसी भी अपराध करने वाले को तीन नज़रियो से देखा जा सकता है पुलिस , अदालत और पब्लिक। वीरप्पन, ब्रह्मदेव मुखिया और अब आनंदपाल सिंह इन्हें पुलिस कुख्यात कहती रही लेकिन इनको समाज के एक खासवर्ग का हमेशा समर्थन मिला। दरअसल जब कहीं हमारी व्यवस्था जिसका काम है जनता को फरियाद को सुनना लेकिन सुनकर भी नज़रअंदाज़ करती है तब ऐसे किरदार बनते हैं, जिन्हें कानून अपराधी मानता है और एक वर्ग हीरो।

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इस तरह हुआ आनंदपाल का एनकाउंटर

आनंदपाल को पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया है। पुलिस के मुताबिक़ आनंदपाल सिंह चूरू के मालासर में रहने वाले श्रवण सिंह के घर मे छिपा हुआ था। यहां आनंदपाल मकान के ऊपरी हिस्से में रहता था, जबकि मकान के निचले हिस्से में श्रवण सिंह का परिवार रहता था। पुलिस की ओर से आनंदपाल के भाई की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के साथ हुई आनंदपाल की मुठभेड़ में दोनों ओर से गोलियां चलाई गई, जिसमें पुलिस ने आनंदपाल का एनकांउटर कर उसे मार गिराया। वहीं आनंदपाल की ओर से की गई फायरिंग में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन पुलिस की इस कहानी पर राजपूत वर्ग सवाल खड़ा कर रहा है , उनको ये एंकाउंटर फ़र्ज़ी लग रहा है।

राजपूत समाज आनंदपाल के एनकाउंटर को कह रहा फर्जी

आनंदपाल सिंह के एडवोकेट ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए कहा है कि,

आनंदपाल को हरियाणा से पकड़कर लाया गया था और चुरु में मैनेज कर फर्जी एनकाउंटर किया गया है

पुलिस की पूरी कहानी में कई ऐसे तर्क हैं, जिस पर बहुत सारे लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है. उसके लोकेशन के बारे में उसके भाईयों तक को पता नहीं होता था, तो पकड़ा कैसे गया। आनंदपाल के पास 400 कारतूस बचे थे और वो एके-47 से गोलियां बरसा रहा था फिर भी पुलिस ने उसके पास जाकर पीठ में कैसे गोली मार दी। इस एनकाउंटर में घायल सभी पुलिसकर्मी राजपूत है, ऐसे कैसे हो गया। चूंकि राजपूतों की सहानुभूति उसके साथ रहती थी, कहीं इसलिए तो ऐसा नहीं दिखाया गया। ये भी कहा जा रहा है वह सरेंडर करना चाहता था, लेकिन सुरक्षा के साथ पर पुलिस की कुछ और ही योजना थी?

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आरोप- पुलिस ने बल प्रयोग कर कराया आनंदपाल का अंतिम संस्कार

इसी बीच पुलिस ने बल प्रयोग कर आनंदपाल सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया । पुलिस प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच आंनदपाल का अंतिम संस्कार कराया। आनंदपाल एनकाउंटर की सीबीआई मांग को लेकर राजपूत समाज के लोगों ने जमकर हंगामा किया। बुधवार की रात कई वाहनों में आगजनी भी की गई थी। उपद्रवी भीड़ ने रात करीब आठ बजे सांवराद रेलवे स्टेशन पर पटरियां उखाड़दी। कुछ पुलिसकर्मियों को कमरे में बंद कर आग लगाने का प्रयास किया। इस दौरान हुई फायरिंग में करीब 20 लोग घायल हो गए। घायलों को जयपुर रैफर किया गया। देर रात एक घायल की मौत हो गई। हालात बेकाबूहोने पर सांवराद में कर्फ्यू लगादिया गया है। शेष नागौर जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है।

आनंदपाल के परिजन और राजपूत समाज कर रहे सीबीआई जांच की मांग

आनंदपाल के परिवार के साथ ही पूरा राजपूत समाज अभी भी इस बात पर एकजुट है कि एनकाउंटर फर्जी है। आनंदपाल की हत्या की गई है और सीबीआई जांच ही सच सामने ला सकती है। हालांकि शुरू में अड़ी रही सरकार ने अब थोड़ी नरमी के संकेत देते हुए एनकाउंटर की एसआईटी जांच की बात कही है। लेकिन मामला अब सिर्फ एनकाउंटर के फर्जी होने या उसकी जांच तक सीमित नहीं है बल्कि अब तैयारी आनंदपाल को अवतार घोषित करने की जा रही है।

आनंदपाल पर बनेगी फिल्म

यहां तक की सरकार थ्री और फिल्म जेड प्लस की पटकथा और संवाद लिख चुके रामकुमार सिंह ने कहा कि आनंदपाल सिंह की बायोपिक बनाने का निर्णय लिया है लेकिन परिजनों की अनुमति पर ही यह संभव होगा। माहौल सामान्य होने पर परिजनों से बातचीत करूंगा सिंह ने कहा कि शेखावाटी क्षेत्र से आने के कारण शराब का अवैध व्यापार, फलते फूलते अपराधी और इससे जुड़ी गतिविधियों को करीब से देखा है, यह भी तय है कि राजनीतिक संरक्षण के बिना अपराध बढ़ता नहीं है।

राजपूत समाज में भी आनंदपाल को लेकर मतभेद

आज जो राजपूत समाज मरने-मारने पर उतारु है वो ही आनंदपाल के गांव के दबंग राजपूत आनंदपाल को राजपूत नहीं मानते थे, क्योंकि वो दारोगा यानी रावणा राजपूत था। इस जाति के लोगों को आज भी निचले तबके का माना जाता है। यही कारण था कि जब आनंदपाल की बरात घोड़ी पर निकलने के लिए तैयार हुई तो काफी बवाल हुआ। तब आनंदपाल ने अपने दोस्त और उभरते छात्र नेता जीवणराम गोदारा को अपने गांव बुलाया। गोदारा दलबल के साथ आनंदपाल के गांव पहुंचे और तब जाकर आनंदपाल की बरात घोड़ी पर निकली। शादी के बाद आनंदपाल ने बीएड किया और सीमेंट का काम करने लगा। इस दौरान वह राजनीति में भी उतरा। कभी हर प्रकार के नशे से दूर रहने वाला आनंदपाल राजनीति में आना चाहता था। इसके लिए उसने प्रधान का चुनाव भी लड़ा। लेकिन हार के बाद वो राजनेताओं के निशाने पर आ गया। फिर कई सालों बाद आनंदपाल ही गोदारा की हत्या का कारण बना। आनंदपाल ने 27 जून 2006 को डीडवाना में जीवणराम गोदारा हरफूल जाट की हत्या की थी।

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जेल से ही आनंदपाल क्राइम को करता था ऑपरेट

अजमेर हाई सिक्युरिटी जेल के सामने चाय की दुकान चलाने वाले रविकुमार रील ने अपने बयान में बताया था कि उसकी दुकान से रोज सुबह 5 लीटर दूध व 5 लीटर छाछ, जबकि शाम को 6 लीटर दूध जाता था। आनंदपाल के खाते में हर महीने 20 हजार रुपए का दूध-छाछ जेल में पहुंचाए जाते थे। अजमेर के रहने वाले महेंद्र सिंह हर सप्ताह इसका एडवांस हिसाब करता था। इसमें से आधा से भी ज्यादा दूध कुख्यात कैदी आनंदपाल खुद पीता था। हैरानी वाली बात यह थी कि हाई सिक्युरिटी जेल में होने के बावजूद आराम से बाहर का खाना-पीना आता था। वह जेल के भीतर स्मार्ट फोन इस्तेमाल करता था। जेल के भीतर से ही उसका सोशल मीडिया अकाउंट भी ऑपरेट होता था। बता दें कि फेसबुक पर उसके नाम से एक पेज ग्रुप है। उसके कई फॉलोअर हैं।

गोदारा को मार कर इस तरह आनंदपाल बना गैंगस्टर

आनंदपाल मर्डर, लूट, वसूली और गैंगवार के करीब 24 मामलों में शामिल था। आनंदपाल लिकर किंग बनना चाहता था जिसके कारण विरोधी गैंग से उसकी लड़ाई होती रही। बीकानेर जेल में 2015 में उसका गैंगवार हुआ था जिसमें उसे भी गोली लगी थी। आनंदपाल राजस्थान के अपराध जगत में हथियारों और खून-खराबे के सहारे पहले नंबर पर आना चाहता था। अपराध की दुनिया में उसका प्रवेश 2006 में हुआ। उसने तब डीडवाना में जीवनराम गोदारा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। डीडवाना में दर्ज 13 मामलों में से 8 में उसे भगौड़ा घोषित किया हुआ था। सीकर में हुए गोपाल फोगावट हत्याकांड में भी उसी का हाथ बताया जाता है। ये मामला विधानसभा में उठा था। जून, 2011 में उसने बीकानेर के सुजानगढ़ में भोजलाई चौराहे पर गोलीबारी की थी। तीन लोग घायल हुए थे। आरोप था कि उसी दिन उसने गनौड़ा जगह में शराब ठेके पर सेल्समैन के भाई को मार दिया।

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पहले वह बीकानेर और फिर अजमेर जेल में बंद था। 3 सितंबर 2015 को आनंदपाल और उसके साथी सुभाष मूंड की नागौर कोर्ट में पेशी थी। पुलिस वैन में उसे फिर अजमेर सेंट्रल जेल लाया जा रहा था। आनंदपाल ने लौटते हुए पुलिस वालों को मिठाई खिलाई जिससे उन्हें नशा आ गया। आगे उसके साथियों ने सड़क रोक ली और गोलियां चलाते हुए उसे भगाकर ले गए। इसमें एक पुलिसकर्मी मारा गया था।

 


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