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जंगल-जंगल बात चली है पता चला है... मोगली के जन्मदाता किपलिंग पर विशेष

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 1 , 1970 , 05:30 IST | नई दिल्ली

आज से करीब दो दशक पहले हर रविवार को दूरदर्शन पर धूम मचाने वाला ‘जंगल-जंगल बात चली है पता चला है, चड्डी पहन के फूल खिला है...‘ टाइटल सॉन्ग का सीरियल ‘द जंगल बुक‘ का प्रमुख किरदार मोगली पूरे देश में हर उम्र के लोगों की पहली पसंद बन गया था। रुडयार्ड किपलिंग ने न केवल दुनिया को मोगली दिया बल्कि कई और कहानियां भी लिखीं। जानिए उनके बारे में।

1865 को उनका जन्‍म बंबई में हुआ और 5 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए इंग्‍लैंड चले गए थे।

Kipling 1

ऐसे थे अमेरिका के 'पितामह' किपलिंग

1882 में पत्रकार के तौर पर काम करने के लिए भारत लौटे। ज्‍यादातर वक्‍त पायनियर अखबार के साथ गुजारा। 1907 में साहित्‍य का नोबेल पुरस्‍कार पाने वाले अंग्रेजी भाषा के पहले लेखक बने।

फॉरेस्ट रेंजर से मिली थी किपलिंग को मोगली की जानकारी

रुडयार्ड किपलिंग को सन् 1907 में उनके साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये प्रथम नोबल पुरस्कार से नवाजा गया था। किपलिंग ने मोगली के जीवन को कागज पर उतारा था। किपलिंग का जन्म 30 दिसंबर 1865 को मुंबई में हुआ था। किपलिंग के माता-पिता मुंबई में ही रहा करते थे। कवि रुडयार्ड किपलिंग ने महज 13 साल की आयु से ही कविताएं लिखना आरंभ कर दिया था। किपलिंग की कविताएं तब काफी लोकप्रिय हो गईं थीं। कहा जाता है कि किपलिंग को एक बार भारत की सुरम्य वादियों के बीच देश के जंगलों की अनमोल वादियों में सैर का मौका मिला। उसी दौरान एक फॉरेस्ट रेंजर गिसबार्न ने रुडयार्ड किपलिंग को एक बालक के शिकार करने की क्षमताओं के बारे में बताया। जंगली जानवरों के बीच लालन-पालन होने के कारण उस बालक में यह गुण विकसित हुआ था। यहीं से किपलिंग को जंगली खूंखार जानवरों के बीच रहने वाले उस बालक के बारे में लिखने की प्रेरणा मिली।

Mogli

जापान में हर आदमी मोगली का दीवाना था

किपलिंग की इस किताब में मोगली के सहयोगी मित्रों और बुजुर्गों के तौर पर चमेली, भालू, सांप, अकडू-पकडू, खूंखार शेरखान आदि को भी बखूबी स्थान दिया गया है। विडंवना यह है कि भारत के जंगलों में पाए जाने वाले इस मोगली के बारे में उसकी खासियतें पहचानी तो एक अंग्रेज लेखक ने और इसे फिल्माने का काम किया जापान ने। जापान में सिवनी के इस बालक के कारनामों के बारे में 1989 में एक 52 एपिसोड वाला सीरियल तैयार किया गया था। ‘‘द जंगल बुक शिओन मोगली‘‘ नाम से बनाए गए इस एनिमेटेड टीवी सीरियल को जब प्रसारित किया गया तो जापान का हर आदमी मोगली का दीवाना बन गया था।

जापान के बाद भारत में

जब भारत को यह पता चला कि उसके देश की इस नायाब कला को जापान में सराहा जा रहा है, तो भारत में इसके प्रसारण का मन बनाया गया। एक साल बाद 1990 में इसी जापानी सीरियल द जंगल बुक ऑफ शिओन मोगली को हिन्दी में डब करवाया गया और फिर इस कार्टून सीरियल ‘द जंगल बुक‘ को दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। सीरियल का टाइटल सांग ‘जंगल जंगल बात चली है, चड्डी पहन कर फूल खिला है...‘ को लिखा था मशहूर गीतकार गुलज़ार ने और इसे संगीत दिया था विशाल भारद्वाज ने। पच्चीस साल बाद मोगली एक बार फिर अपनी लोकप्रियता के सारे पैमाने ध्वस्त करने की तैयारी में है। यह कार्टून सीरियल एक बार फिर निर्माण किया जा रहा है। फिल्म अगले साल अक्टूबर रिलीज होगी। मोगली पर फिल्म निर्माण की जवाबदारी अब विजुअल इफेक्ट कंपनी डीक्यू एंटरटेनमेंट ने अपने कंधों पर ली है।

1894 में किताब और मोगली उत्सव

जंगल बुक का पुस्तक के रूप में प्रथम प्रकाशन वर्ष 1894 हुआ था। मध्यप्रदेश सरकार इसी जंगल में हर साल बच्चों में पर्यावरण और प्रदेश में उपलब्ध जैव विविधता के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए तीन दिवसीय मोगली उत्सव का आयोजन करती है। उत्सव के दौरान इन बच्चों को जंगल एवं पहाड़ों की साहसिक सैर सफारी का आनंद और वन ग्रामों के जीवन से परिचित कराया जाता है। 1894 में लिखी गई जंगल बुक के बाद 1895 में आई रुडयार्ड किपलिंग की द सेकंड जंगल बुक भी काफी पसंद की गई। जंगल बुक को लेकर दुनिया भर में ढेर सारी कॉमिक्स, वीडियो/कम्प्यूटर गेम, कार्टून फिल्में, एनिमेशन फिल्में और फीचर फिल्में बनाई गई हैं। वॉल्ट डिज्नी स्टूडियो ने 1967 में इस पर आधारित एक एनिमेशन फिल्म बनाई थी और उसने सफलता के तमाम रेकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसके बाद वॉल्ट डिज्नी स्टूडियो ने 1990 में जंगल बुक के पात्रों को लेकर टेलस्पिन नामक एनिमेशन श्रृंखला शुरु की।

Mogli 3

हिंदुस्तान में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान इस समय के मध्यप्रदेश सिवनी जिले के जंगलों में एक बालक जो जंगली भेड़ियों के बीच पला था, के अस्तित्व में होने की बात आज भी कही जाती है। कई लोग इसे मात्र एक किवदंती मानते है, तो कई इसे सही घटना मानते है। माना जाता है कि एक बालक जो जंगलों की वादियों में पला बढ़ा था, भेडियों की सोहबत में रहने के कारण उसकी आदतें भेडियों की तरह हो गई थीं।

पेंच टाइगर रिजर्व, मोगली लैंड

वन्यजीवन विशेषज्ञ कहते हैं कि मोगली लैंड का क्षेत्र मध्यप्रदेश के सिवनी जिले का जंगल है, जिसे अब इंदिरा प्रियदर्शनी राष्ट्रीय उद्यान अथवा पेंच टाइगर रिजर्व भी कहते हैं। यही क्षेत्र मोगली का घर था। इसके तथ्यात्मक प्रमाण के रूप में सर विलियम हेनरी स्लीमन के एन एकाउंट ऑफ वाल्वस नरचरिंग चिल्ड्रन इन देयर डेन्स शीर्षक के एक दस्तावेज का उल्लेख किया जाता है। सर विलियम हेनरी स्लीमन के इस दस्तावेज में लिखा था कि सिवनी के संतबावडी गांव में सन 1831 में एक बालक पकड़ा गया था जो इसी क्षेत्र के जंगली भेड़ियों के साथ गुफाओं में रहता था। इसके अलावा जंगल बुक के लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने जिन भौगोलिक स्थितियों बैनगंगा नदी, उसके कछारों तथा पहाड़ियों की चर्चा की थी वे सभी वास्तव में इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थितियों से पूरी तरह मेल खाती हैं। पेंच टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 757 वर्ग किमी हैं। पेंच राष्ट्रीय उद्यान और सेंचुरी का कोर एरिया 411 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।

मुंबई में किपलिंग का बंगला है पर्यटन केंद्र

अपनी पुस्तक 'द जंगल बुक' के चरित्र 'मोगली' के लिए विख्यात नोबेल पुरस्कार प्राप्त लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने दक्षिण मुंबई के जिस बंगले में जन्म लिया था, उसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
यह बंगला सर जेजे कला स्कूल के पेड़ों से भरे परिसर में स्थित है और यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किए जा चुके छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के नजदीक है। इसके अलावा किपलिंग के इस जन्मस्थल के नजदीक क्रॉफोर्ड बाजार, मुंबई पुलिस कमिश्नरी जैसे कई धरोहर इमारतें हैं।

 

 

 


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