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राष्ट्रपति चुनाव विशेष: इतिहास में दर्ज वो 13 चेहरे जो भारत के सर्वोच्य पद पर रहे

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 17 , 2017 , 13:40 IST | नयी दिल्ली

भारत के 14वें राष्ट्रपति की घोषणा 20 जुलाई को हो जाएगी। आइए जान लेते हैं कि भारत के इस सर्वोच्च पद पर कौन, कब और किस विशेषता के कारण आसीन हुआ। स्वतंत्रता से अब तक भारत के 13 राष्ट्रपति हो चुके हैं। इन सभी 13 राष्ट्रपतियों के अलावा 3 कार्यवाहक राष्ट्रपति हुए जो पदस्थ राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद बनाये गए। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद थे और प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं हैं।

भारत के अबतक राष्ट्रपति: 

1.डॉ राजेन्द्र प्रसाद

(3 दिसम्बर 1884– 28 फरवरी 1963)

राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था जिसकी परिणति 26 जनवरी 1950 को भारत के एक गणतंत्र के रूप में हुई। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था, वो भारत के इकलौते राष्ट्रपति थे जो लगातार दो कार्यकाल तक इस सम्माननीय पद पर रहे।

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2.डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

(5 सितम्बर 1888 – 17 अप्रैल 1975)

भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (1952 - 1962) और द्वितीय राष्ट्रपति रहे। वे भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे। उनके इन्हीं गुणों के कारण सन् 1954 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया था। उनका जन्मदिन (5सितम्बर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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3.डॉ जाकिर हुसैन

इनका  कार्यकाल 1967 से 1969 तक रहा। देश के प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति बने। डाक्टर ज़ाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे जिनका कार्यकाल 13 मई 1967 से 3 मई 1968 तक था। डा. ज़ाकिर हुसैन का जन्म 8 फ़रवरी, 1897 ई. में हैदराबाद, आंध्र प्रदेश के धनाढ्य पठान परिवार में हुआ था। कुछ समय बाद इनके पिता उत्तर प्रदेश में रहने आ गये थे। केवल 23 वर्ष की अवस्था में वे 'जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय' की स्थापना दल के सदस्य बने । वे अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री के लिए जर्मनी के बर्लिन विश्वविद्यालय गए और लौट कर जामिया के उप कुलपति के पद पर भी आसीन हुए। 1920 में उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना में योगदान दिया तथा इसके उपकुलपति बने। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात वे अलीगढ़ विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने तथा उनकी अध्यक्षता में ‘विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग’ का गठन हुआ। इसके अलावा वे भारतीय प्रेस आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूनेस्को, अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा सेवा तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से भी जुड़े रहे। 1962 ई. में वे भारत के उपराष्ट्रपति बने। उन्हें वर्ष 1963 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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4.वी.वी गिरी

(कार्यकाल 1969-1974) दूसरी वरीयता से जीतने वाले पहले राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन के निधन के कारण 24 अगस्त, 1969 में वाराहगिरि वेंकट गिरि भारत के चौथे राष्ट्रपति चुने गए। इन्होंने इससे पहले 3 मई, 1969 से 20 जुलाई, 1969 तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में यह पद संभाला।

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5.फखरुद्दीन अहमद

इनका कार्यकाल 1974 से 1977 तक रहा। आन्तरिक आपातकाल लगाया। सबसे ज्यादा अध्यादेश जारी करने वाले राष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति बनने से पहले वो मंत्री भी रहे। इंग्लैंड में जवाहर लाल नेहरु से मिलने के बाद वो भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस में शामिल हो गये और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभायी।

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6.नीलम संजीव रेड्डी

कार्यकाल 1977 से 1982 तक रहा। भारत के छठे राष्ट्रपति थे। आन्ध्र प्रदेश के कृषक परिवार में जन्मे नीलम संजीव रेड्डी की छवि कवि, अनुभवी राजनेता एवं कुशल प्रशासक के रूप में थी। इनका सार्वजनिक जीवन उत्कृष्ट था। सन 1977 के आम चुनाव में जब इंदिरा गांधी की पराजय हुई, उस समय नव-गठित राजनीतिक दल जनता पार्टी ने इनको राष्ट्रपति का प्रत्याशी बनाया। वे भारत के पहले गैर काँग्रेसी राष्ट्रपति थे।

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7.ज्ञानी जैल सिंह

इनका कार्यकाल 1982 से 1987 तक रहा। ज्ञानी जैल सिंह भारत के सातवें राष्ट्रपति थे। सिख धर्म के विद्वान पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति, सत्यनिष्ठा के राजनीतिक कठिन रास्तों को पार करते हुए 1982 में भारत के गौरवमयी राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए। 1987 तक के अपने कार्यकाल के दौरान इन्हें 'ब्लूस्टार आपरेशन' एवं इंदिरा गांधी की हत्या जैसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। 1986 में डाक एंव तार संशोधन विधेयक पर वीटो का प्रयोग किया ।

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8.रामास्वामी वेंकटरमण

इनका कार्यकाल 1987 से 1992 तक रहा। रामास्वामी वेंकटरमण विद्धान, स्वाधीनता सेनानी, राजनेता और देश के आठवें राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे करीब चार साल तक उपराष्ट्रपति भी रहे। क़ानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में वकालत की और युवावस्था में भारत के स्वाधीनता आन्दोलन से भी जुड़े। उन्होंने ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में हिस्सा लिया था और संविधान सभा के सदस्य भी चुने गए। वे चार बार लोक सभा के लिए चुने गए और केन्द्र सरकार में वित्त और रक्षा मंत्री रहे। उन्होंने केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के तौर पर भी कार्य किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वे संयुक्त राष्ट्र संघ समेत कई महत्वपूर्ण संस्थाओं के सदस्य और अध्यक्ष रहे।

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9.डॉ शंकरदयाल शर्मा

कार्यकाल 1992-1997, डॉ शंकरदयाल शर्मा भारत के नौवें राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व आप भारत के आठवें उपराष्ट्रपति भी थे।  भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री (1952-1956) रहे तथा मध्यप्रदेश राज्य में कैबिनेट स्तर के मंत्री के रूप में उन्होंने शिक्षा, विधि, सार्वजनिक निर्माण कार्य, उद्योग तथा वाणिज्य मंत्रालय का कामकाज संभाला था। केंद्र सरकार में वे संचार मंत्री के रूप में (1974-1977) पदभार संभाला। इस दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष (1972-1974) भी रहे।

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10.के आर नारायणन

इनका कार्यकाल 1997 से 2002 तक रहा। प्रथम दलित राष्ट्रपति कोचेरिल रमण नारायणन भारत के दसवें राष्ट्रपति थे।1992 में उनका चयन देश के नौवें उपराष्ट्रपति के रूप में हुआ तत्पश्चात 1997 में नारायणन देश के राष्ट्रपति बने थे। इन्होंने अपनी बी.ए और एम.ए की डिग्री केरल यूनिवर्सिटी से ली जबकि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बीएससी पूरा किया ।

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11.एपीजे अब्दुल कलाम

इनका कार्यकाल 2002 से 2007 तक रहा। विजन 2020 का नारा दिया। प्रथम वैज्ञानिक राष्ट्रपति बने। मिसाइल मैन आफ इण्डिया कहा जाता है। अग्नि की उड़ान पुस्तक लिखी। मिसाइल विकास प्रयास से जुड़े थे। भारत रत्न (1997) से सम्मानित कलाम साहब को लोगों का राष्ट्रपति भी कहा जाता है। इसके अलावा इन्हें पद्म विभूषण (1990) और पद्म भषण (1981) तथा कई सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है।

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12.प्रतिभा देवीसिंह पाटिल

इनका कार्यकाल 2007 से 2012 तक रहा। प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति तथा क्रमानुसार 12वीं राष्ट्रपति बनीं । पेशे से वकील उन्होंने राजस्थान की राज्यपाल के रूप में भी सेवा की । राजनैतिक जीवन में अपने इसी गहरे अनुभवों के कारण उन्हें भारत के राष्ट्रपति के रूप में चयन किया गया। प्रतिभा पाटिल को राजनिति में आने की प्रेरणा उनके पिता से मिली।

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13.प्रणब मुखर्जी

इनका कार्यकाल 2012 से जारी है। प्रथम वित्तमंत्री जो राष्ट्रपति बने। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया। सीधे मुकाबले में उन्होंने अपने प्रतिपक्षी प्रत्याशी पी.ए. संगमा को हराया। वे आर्थिक मामलों, संसदीय कार्य, बुनियादी सुविधाएँ व सुरक्षा समिति में वरिष्ठ नेता थे। 2009 से 2012 तक वे देश के वित्त मंत्री रहे। राजनैतिज्ञ के अलावा प्रणब मुखर्जी सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं हमेशा काम के प्रति वफादार और सक्षम रहे हैं।

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